आजम एंड फैमली की बढ़ी मुश्किलें, अब कोर्ट ने जारी किया कुर्की का नोटिस

स्पेशल कोर्ट एडीजे-6 की कोर्ट ने ये आदेश जारी किया है. लगातार कोर्ट में पेश न होने की वजह से कुर्की का आदेश हुआ है.

आजम एंड फैमली की बढ़ी मुश्किलें, अब कोर्ट ने जारी किया कुर्की का नोटिस
लगातार कोर्ट में पेश न होने की वजह से स्पेशल कोर्ट एडीजे-6 की ओर से कुर्की का आदेश हुआ.

रामपुर: समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) से सांसद आजम खान (Azam Khan) और उनके परिवार की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. अब्दुल्ला आजम (Abdullah Azam Khan) का निर्वाचन रद्द होने के बाद अब आजम खान, अब्दुल्ला आजम, तंजीन फातिमा के विरुद्ध रामपुर की एक कोर्ट ने धारा 82 के तहत कुर्की का नोटिस जारी किया है.

बता दें कि इससे पहले सपा सांसद आजम खान, अब्दुल्ला आजम, राज्यसभा सांसद तंजीन फातिमा के खिलाफ कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी किया था. अब्दुल्ला आजम पर 2 जन्म प्रमाण बनवाने का आरोप है. अब मामले की सुनवाई 24 जनवरी को होगी.

दरअसल, भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने आजम खान, अब्दुल्ला आजम और तंजीन फातिमा पर 420, 467, 468, 471 के तहत मुकदमा दर्ज करवाया था. आरोप था कि आजम खान और तंजीन फातिमा ने जालसाजी करते हुए अपने बेटे अब्दुल्ला आजम के दो जन्म प्रमाण पत्र बनवा रखे है.

अधिवक्ता संदीप सक्सेना ने बताया कि कोर्ट में पहले से ही तीनों के खिलाफ गैर जमानती वारंट चल रहे थे. आज भी आजम खान, अब्दुल्ला आजम और तंजीन फातिमा कोर्ट में पेश नहीं हुए. जिसके बाद, अब न्यायालय ने धारा 82 की कार्यवाही की है.

याद दिला दें कि, हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अब्दुल्ला आजम का निर्वाचन रद्द कर दिया था. रामपुर की स्वार सीट से जीतकर विधायक बने अब्दुल्ला आजम का दो बर्थ सर्टिफिकेट के मामले में निर्वाचन रद्द किया गया.

दरअसल, साल 2017 में बसपा (Bahujan Samaj Party) नेता नवाब काजिम अली ने अब्दुल्ला की उम्र को आधार बनाकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी. बहुजन समाज पार्टी के नेता नवाब काजिम अली ने अपनी अर्जी में कहा था कि 2017 में चुनाव के वक्त अब्दुल्ला आजम की न्यूनतम निर्धारित उम्र 25 साल नहीं थी. चुनाव लड़ने के लिए फर्जी डॉक्यूमेंट्स और झूठा हलफनामा दाखिल किया गया था. काजिम अली की ओर से दायर की गई याचिका में अब्दुल्ला आजम की 10वीं की मार्कशीट के साथ-साथ कई दस्तावेजों में दर्ज जन्मतिथि को आधार बनाया गया था.

जिसके बाद 27 सितंबर को इलाहाबाद कोर्ट ने सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. और सोमवार को जस्टिस एसपी केसरवानी की बेंच ने निर्वाचन रद्द करने का फैसला सुनाया.