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कुम्भ में धर्मसंसद से पहले संगम क्षेत्र में होगी योगी कैबिनेट की बैठक

राम मंदिर को लेकर 31 जनवरी और 1 फरवरी को धर्म संसद में ठोस निर्णय लेंगे. 

कुम्भ में धर्मसंसद से पहले संगम क्षेत्र में होगी योगी कैबिनेट की बैठक
फाइल फोटो

प्रयागराजः कुम्भ 2019 में साधु संतों की धर्मसंसद से पहले संगम क्षेत्र में योगी कैबिनेट की बैठक होगी. खबर है कि 29 जनवरी को सीएम योगी आदित्यनाथ संगम क्षेत्र में अपनी कैबिनेट की बैठक लेंगे. बता दें कि 31 जनवरी को राम मंदिर पर धर्मसंसद का भी आयोजन कुम्भ में होने जा रहा है. 

संत धर्माचार्य प्रयागराज कुंभ के दौरान 31 जनवरी और 1 फरवरी को धर्म संसद में ठोस निर्णय लेंगे
राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण शीघ्र होना चाहिए क्योंकि लाखों-करोड़ों राम भक्तों की आशा आज भी मोदी सरकार से जुड़ी हुई है.उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय में इस मामले पर बार बार आगे की तारीख पड़ने से हिंदू समाज को भावनात्मक पीड़ा पहुंच रही है. न्यायविद हिंदू समाज की धार्मिक भावनाओं को भी समझें. आखिर कब तक राम लला कपड़े के मंदिर में विराजमान रहेंगे और धूप गर्मी बरसात और ठंड का सामना करते रहेंगे .70 वर्षों से अदालती चौखट पर रामलला स्वयं याची बनकर खड़े हैं. अब उन्हें न्याय मिलना ही चाहिए.

उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए अब संत धर्माचार्य प्रयागराज कुंभ के दौरान 31 जनवरी और 1 फरवरी को आयोजित धर्म संसद में इस संबंध में ठोस निर्णय लेंगे.

नृत्य गोपाल दास ने दिल्ली मे आयोजित "अयोध्या पर्व" कार्यक्रम से वापस अयोध्या लौटते समय लखनऊ में प्रवास के दौरान सोमवार को जारी एक बयान मे कहा कि 'श्री राम जन्मभूमि पर भव्य और दिव्य मंदिर निर्माण के लिए सन् 1528 से लगातार हिंदू समाज संघर्ष करता रहा है, 1990 में निवर्तमान मुलायम सिंह सरकार द्वारा निहत्थे कार सेवकों पर गोलियां बरसाई गईं और वे आज भी मंदिर निर्माण के लिए प्रतीक्षारत हैं.

वर्तमान की मोदी सरकार से हमें ही नहीं संपूर्ण हिंदू समाज को अभी भी आशा है कि वह इस गंभीर विषय का निस्तारण शीघ्र से शीघ्र कराएं और शहीद कारसेवकों को श्रद्धांजलि प्रदान करें.' उन्होंने कहा सुप्रीम कोर्ट में जिस प्रकार से इस मामले में तारीखें पड़ रही हैं उससे हिंदू समाज की भावनाएं आहत हो रही हैं. शीर्ष न्यायालय का हम सम्मान करते हैं लेकिन न्यायालय को भी हिंदू भावनाओं का सम्मान करना चाहिए.