लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा की वजह से अब तक राम मंदिर का निर्माण नहीं- सपा नेता

यूपी विधानसभा में नेता विपक्ष रामगोविंद चौधरी ने कहा कि अगर लाल कृष्ण आडवाणी ने रथ यात्रा नहीं निकाली होती तो अब तक राम मंदिर का निर्माण हो चुका होता.

लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा की वजह से अब तक राम मंदिर का निर्माण नहीं- सपा नेता
अक्टूबर 1990 में लालकृष्ण आडवाणी ने रथयात्रा निकाली थी. (फाइल फोटो)

बलिया: समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता रामगोविंद चौधरी ने आज कहा कि यदि भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने रथ यात्रा नहीं निकाली होती और अयोध्या में बाबरी मस्जिद नहीं ढहायी जाती तो अब तक राम मंदिर मसले का हल निकल चुका होता. चौधरी ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में एक सवाल पर अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण नहीं होने के लिए भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को जिम्मेदार ठहराया.

उन्होंने कहा कि अयोध्या में विवादित स्थल का मसला मंदिर का ताला खुलवाये जाने और शिलान्यास कराये जाने के बाद ही हल हो गया होता और देश में शांति तथा भाईचारा बना रहता, लेकिन वर्ष 1990 में उसी समय आडवाणी ने देश में रथ यात्रा निकाली और उससे फैले उन्माद की वजह से मस्जिद ढहा दी गयी. इसी कारण मामला अटक गया.

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चौधरी ने देश में कहीं सूखा और कहीं भारी बारिश के बारे में पूछे गये सवाल पर कहा कि इन घटनाओं के लिए भाजपा जिम्मेदार है. उन्होंने कहा कि भारत आस्था का देश है. सपा भगवान राम, कृष्ण, शिव, गंगा, यमुना तथा सरयू को आस्था का केंद्र और भगवान राम को अपना इष्ट देवता मानती है, लेकिन भाजपा भगवान राम को ‘वोट देवता’ मानती है. भाजपा भगवान राम का जिस तरह से इस्तेमाल कर रही है उससे नाराज होकर वह दैवीय आपदा के रूप में दंड दे रहे हैं. मगर इसका दर्द जनता भुगत रही है. उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का फिलहाल कोई विचार नहीं है.

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अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में 1994 के इस्माइल फारुकी के फैसले में पुनर्विचार के लिए मामले को संविधान पीठ भेजा जाए या नहीं, इस मसले पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. दरअसल, मुस्लिम पक्षों ने नमाज के लिए मस्जिद को इस्लाम का जरूरी हिस्सा न बताने वाले इस्माइल फारुकी के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है. मुख्‍य न्‍यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली 3 जजों की पीठ में शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान हिन्दू और मुस्लिम पक्ष के वकीलों के बीच तीखी बहस हुई.

(इनपुट-भाषा)