शाहजेब रिजवी को मेरठ पुलिस ने किया गिरफ्तार, बेंगलुरु हिंसा को लेकर की थी भड़काऊ बयानबाजी

शाहजेब रिजवी ने 13 अगस्त को सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया था. इस वीडियो में उसने कर्नाटक के दलित कांग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के भतीजे पी. नवीन का सिर काटने वाले को 51 लाख रुपए का इनाम देने की घोषणा की थी.

  शाहजेब रिजवी को मेरठ पुलिस ने किया गिरफ्तार, बेंगलुरु हिंसा को लेकर की थी भड़काऊ बयानबाजी
शाहजेब रिजवी. (File Photo)

मेरठ: बेंगलुरु हिंसा मामले में विवादित बयान देने वाले शाहजेब रिजवी को मेरठ पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. शाहजेब पूर्व में सपा अल्पसंख्यक मोर्चे का सचिव रह चुका है. उस पर मेरठ के सरधना थाने में लॉकडाउन उल्लंघन का मुकदमा भी है दर्ज. मेरठ के थाना फलावदा इलाके से शाहजेब को पुलिस ने गिरफ्तार किया. आपको बता दें कि शाहजेब रिजवी ने 13 अगस्त को सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया था.

इस वीडियो में उसने कर्नाटक के दलित कांग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के भतीजे पी. नवीन का सिर काटने वाले को 51 लाख रुपए का इनाम देने की घोषणा की थी. वीडियो जारी कर शाहजेब ने कहा था, ''फेसबुक पोस्ट के जरिए से नवीन ने हुजूर के शान में जो गुस्ताखी की है, मैं उसकी कड़ी शब्दों में निंदा करता हूं. इस युवक का जो सर कलम करके लाएगा उसे मैं 51 लाख का नगद इनाम दूंगा.'' रिजवी ने इनाम की राशि के लिए क्राउड फंडिंग की अपील भी की थी.

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शाहजेब के इस वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मेरठ पुलिस ने उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी. शाहजेब पर IPC की धाराओं 153A, 505(2) के तहत केस दर्ज हुआ था. मेरठ एसएसपी अजय साहनी ने शाहजेब के वीडियो का संज्ञान लेते हुए मामले की जांच के आदेश दिए थे. पुलिस ने जब शाहजेब रिजवी के घर दबिश दी, तो वह फरार मिला. शाहजेब रिजवी उत्तर प्रदेश के मेरठ में फलावदा थाना क्षेत्र के रसूलपुर गांव का रहने वाला है. वह जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव भी लड़ चुका है, जिसमें उसे हार का सामना करना पड़ा था. वह खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताता है.

सोशल मीडिया पर पोस्ट को लेकर बेंगलुरु में भड़की थी हिंसा
आपको बता दें कि कर्नाटक के दलित कांग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के भांजे पी. नवीन ने एक समुदाय विशेष को लेकर सोशल मीडिया पर विवादित टिप्पणी की थी. इसके बाद बेंगलुरु में हिंसा भड़क गई थी. एक समुदाय विशेष के लोगों ने पत्थरबाजी करने के साथ ही कांग्रेस विधायक के घर और दो पुलिस थानों में आग लगा दी थी. सार्वजनिक संपत्ति को भी काफी नुकसान पहुंचाया गया. हिंसा रोकने की कोशिश में करीब 60 पुलिसकर्मी घायल हो गए. पुलिस फायरिंग में तीन लोगों की मौत भी हुई.

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