ZEE जानकारी: अमेरिका से 5 गुना अधिक बड़ा है भारत का लिखित संविधान

देश का संविधान... आज़ाद भारत की आत्मा के समान है. इसलिए आज हम संविधान पर पाठशाला लेकर आए हैं.आप अपने घर के सभी सदस्यों को इस खबर को देखने के लिए प्रेरित कीजिए.

ZEE जानकारी: अमेरिका से 5 गुना अधिक बड़ा है भारत का लिखित संविधान

देश का संविधान... आज़ाद भारत की आत्मा के समान है. इसलिए आज हम संविधान पर पाठशाला लेकर आए हैं.आप अपने घर के सभी सदस्यों को इस खबर को देखने के लिए प्रेरित कीजिए... क्योंकि संविधान देश की सबसे पवित्र पुस्तक है और इसमें भारत के प्राण बसते हैं . इसलिए आज का दिन आपके लिए 15 अगस्त और 26 जनवरी की तरह बहुत महत्वपूर्ण है. आज संसद में संविधान दिवस पर विशेष कार्यक्रम में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक हुई . यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संविधान में भारत के 130 करोड़ लोगों की आस्था और भरोसे को देश की ताकत बताया.

लेकिन विपक्ष के ज्यादातर दलों ने करीब 90 मिनटों तक चले इस कार्यक्रम का बहिष्कार करके. इसका इस्तेमाल अपनी राजनीति को आगे बढ़ाने के लिए किया . देश के संविधान से जुड़े इस कार्यक्रम का कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना सहित कई विपक्षी दलों ने Boycott किया . महाराष्ट्र में चल रही राजनीति को मुद्दा बनाकर इस कार्यक्रम का विरोध करने की मुहिम कांग्रेस ने शुरु की.

और बाद में शिवसेना ने इसका समर्थन किया . एक तरफ संसद भवन के सेंट्रल हॉल में संविधान दिवस कार्यक्रम चल रहा था और उसी वक्त संसद परिसर में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की मूर्ति के सामने कुछ विपक्षी दल विरोध प्रदर्शन कर रहे थे . अच्छा ये होता कि संविधान दिवस के मौके पर.. देश के संविधान को और मजबूत बनाने और डॉक्टर अंबेडकर के आदर्शों को बनाए रखने का संकल्प दिखाया जाता . लेकिन कांग्रेस यहां भी देश का विरोध करने की अपनी इमेज से बाहर नहीं निकल पाई.

भारत का संविधान दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान है. संविधान की प्रस्तावना, संविधान का सबसे अहम हिस्सा है . और इसकी शुरुआत में लिखा गया है 'हम भारत के लोग... ' यानी 'We the People of India'...
प्रस्तावना के ये शब्द अमेरिका के संविधान से प्रभावित हैं..अमेरिका के संविधान को भी कुछ इसी तरह शुरू किया गया है... 'We the People of America' यानी हम अमेरिका के लोग .

आज सबसे पहले आपको देश के संविधान की पहली पांडुलिपि दिखाते हैं. 26 नवंबर 1949 को संविधान स्वीकृत किए जाने के बाद... एक विशेष कागज पर हाथ से लिखकर इसे तैयार किया गया था . इस विशेष कागज की उम्र करीब 1 हजार वर्ष है... यानी एक हजार वर्षों तक ये सुरक्षित रहेगा . 251 पन्नों पर लिखकर तैयार की गई संविधान की इस कॉपी का वजन करीब 4 किलोग्राम है . संविधान की इस कॉपी पर ही 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के 292 प्रतिनिधियों ने दस्तखत किया था .

वर्ष 1947 में स्वतंत्रता के समय, भारत की जनसंख्या करीब 35 करोड़ थी... और आज देश की आबादी 130 करोड़ हो गई है . इसलिए सबसे पहले ये समझिए कि करोड़ों भारतीयों के सबसे बड़े और पवित्र ग्रंथ यानी संविधान का निर्माण कैसे किया गया था .

भारत की संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई थी .संविधान निर्माण के लिए संविधान सभा के कुल 11 अधिवेशन हुए थे . इन अधिवेशनों में कुल 53 हजार लोग उपस्थित हुए थे . संविधान सभा को इसे पास करने में दो वर्ष, 11 महीने और 17 दिन का वक्त लगा था...अभी हमारे संविधान में 448 अनुच्छेद, 12 अनुसूचियां, 24 भाग और 103 संशोधन हैं...

आपको ये जानकर हैरानी होगी कि संविधान का प्रारूप तैयार करने वाली समिति ने इसे हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में हाथ से लिखकर तैयार किया था.. यानी इसमें कोई टाइपिंग या प्रिंटिंग शामिल नहीं थी...संविधान के Draft में संशोधन के लिए 7 हजार 635 नोटिस दिए गए थे . लेकिन 2 हजार 473 संशोधन किए गए .

संविधन का Draft बनाने से पहले संविधान सभा के सलाहकार B N Rao के निर्देशन में 60 देशों के संविधानों का अध्ययन किया गया था .संविधान सभा के सलाहकारों ने अमेरिका, Canada, Ireland और Britain का दौरा करके वहां के संविधान विशेषज्ञों से बातचीत भी की थी .

भारत के संविधान को अमेरिका, Australia, Canada, Ireland और England के लोकतंत्रों के आधार पर बनाया गया है . अमेरिका का संविधान पूरी दुनिया का सबसे छोटा लिखित संविधान है . इसके मुकाबले भारत का संविधान करीब 5 गुना बड़ा है . दुनिया का सबसे बड़ा संविधान भारत का है... इसमें 1 लाख 46 हज़ार से ज्यादा शब्द हैं . और दुनिया का दूसरा बड़ा संविधान नाइजीरिया का है जिसमें करीब 66 हजार शब्द हैं... यानी भारतीय संविधान में इससे दोगुना बड़ा है .जबकि सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका के संविधान में करीब 7 हजार 7 सौ शब्द ही हैं

दुनिया की दूसरी महाशक्ति रूस के संविधान में करीब 12 हजार 9 सौ शब्द ही हैं दुनिया की 5 बड़ी ताकतों में एक France के संविधान में करीब 10 हजार शब्द हैं

और हमारे पड़ोसी चीन के संविधान में लगभग 10 हजार 900 शब्द हैं...संविधान देश के लिए जरूरी है क्योंकि इसमें प्रशासन या सरकार के अधिकार, उसके कर्तव्य और नागरिकों के अधिकार विस्तार से बताये गये हैं. आज संविधान दिवस पर बड़ा प्रश्न ये भी है कि क्या सच्चे अर्थों में हमने संविधान की भावना को अपनाया है ? संविधान दिवस के मौके पर हम सभी को ये संकल्प लेना चाहिए कि हम संविधान की सच्ची भावना को अपने जीवन में उतारें . हम तभी एक शक्तिशाली देश बन पाएंगे .

संविधान की मूल कॉपी के हर पेज पर आपको भारत की सभ्यता और संस्कृति की झलक दिखाई देगी . जिस पन्ने पर मूल अधिकारों का जिक्र है उसपर श्रीराम के अयोध्या लौटने की तस्वीर भी है. इसमें कृष्ण और अर्जुन के साथ नटराज की तस्वीर भी मौजूद है.

इन तस्वीरों को लगाने के पीछे एक संक्षिप्त कहानी है. संविधान सभा जब भारतीय संविधान को अंतिम रूप दे रही थी, उस दौरान संविधान बनाने वालों को इस बात की भी चिंता थी कि... ये भारतीय सभ्यता-संस्कृति से जुड़ा हुआ दिखे . और इसी वजह से इसमें भारतीय संस्कृति से जुड़े कई चित्रों को शामिल किया गया था .

समानता...हमारे संविधान की प्रस्तावना की मूल भावनाओं में है . लेकिन क्या हमारे सिस्टम के लिए समानता के मूल्य का कोई महत्व है . ये सवाल हम इसलिए पूछ रहे हैं क्योंकि हमारे देश में इंजीनियरिंग और MBA जैसी डिग्रियां रखने वाले युवा भी...चपरासी, माली और सफाईकर्मी की नौकरी के लिए आवेदन करने पर मजबूर हैं .

बिहार विधानसभा में चपरासी, माली, सफाईकर्मी और गेटकीपर जैसे 166 पदों के लिए करीब 5 लाख आवेदन मिले हैं . यानी एक पद के लिए 3 हज़ार लोगों ने आवेदन किया है . दुर्भाग्य की बात ये है...आवेदन देने वाले 5 लाख युवाओं में ऐसे युवा काफी संख्या में हैं जिनके पास बड़ी बड़ी डिग्रियां हैं . कोई इंजीनियर है . किसी के पास MBA की डिग्री है . लेकिन बड़ी बड़ी डिग्रियां हासिल करने वाले युवाओं को....चौथी पास की योग्यता वाली नौकरी के लिए..आवेदन भरना पड़ रहा है....ये दुख और चिंता का विषय है .

वैसे तो कोई काम छोटा नहीं होता.. और किसी काम को कमतर करके नहीं आंकना चाहिए.. लेकिन जब कोई छात्र इंजीनियरिंग या MBA की पढ़ाई करने के बाद चपरासी या सफाईकर्मी के पद पर नौकरी करता है तो इससे देश को ही नुकसान होता है .

अलग अलग क्षेत्रों के हुनर के हिसाब से डिग्री हासिल करने वाले युवा अपने हुनर का प्रयोग सही जगह नहीं करेंगे.. तो देश की पूरी शिक्षा प्रणाली फेल हो जाएगी....बिहार में बेरोजगारी की पूरी तस्वीर दिखाने से पहले हम आपको कुछ आंकड़े दिखाना चाहते हैं .

युवाओं का देश कहे जाने वाले भारत में हर वर्ष 50 लाख से ज़्यादा युवा...Graduate या Post Graduate की पढ़ाई पूरी करते हैं....बेरजगार युवाओं में सबसे बड़ा हिस्सा Graduate और Post Graduate की पढ़ाई पूरी करने वाले युवाओं का है.

देश के हर 100 बेरोजगारों में Graduate कर चुके युवाओं की संख्या 17 है और Post Graduate कर चुके युवाओं की संख्या 15 है . दोनों को अगर मिलाकर देखें तो हर 100 बेरोजगार में 32 युवा या तो Graduate हैं या फिर Post Graduate

और 20 युवा ऐसे हैं जिन्होंने तकनीकी शिक्षा हासिल की है . यानी जिन्होंने डिप्लोमा या सर्टिफिकेट कोर्स किया हुआ है . बेरोजगारों की सूची में...हर 100 में से 16 युवा ऐसे हैं जिन्होंने 10वीं या 12वीं तक की पढ़ाई की है .इन आंकड़ों से साफ है, कि हमारे देश में बड़ी बड़ी डिग्रियां भी...रोजगार की गारंटी नहीं है .

एक निजी विश्वविद्यालय के रिसर्च में ये दावा किया गया...कि भारत में शिक्षित होना आपके रोजगार की गारंटी को आधा कर देता है . यानी अगर आप शिक्षित हैं तो आपके बेरोजगार होने की संभावना..दूसरों की तुलना में घटने की जगह बढ़ जाती है .

देश के शिक्षित युवाओं की बेरोजगारी वाली समस्या की, एक बड़ी वजह हमारी शिक्षा व्यवस्था भी है...जो दशकों पुराने पाठ्यक्रमों के ज़रिये देश का भविष्य बनाने की कोशिश में लगी हुई है...भ्रष्टाचार और शिक्षा को व्यवसाय बनाने की मानसिकता का परिणाम ये होता है कि कॉलेज से डिग्रियां लेकर निकलने वाले युवा नौकरी करने लायक ही नहीं बन पाते...

AssoCham के सर्वे के मुताबिक...
भारत में उच्च शिक्षा ग्रहण करने वाले 85 प्रतिशत युवा किसी भी परिस्थिति में अपनी योग्यता सिद्ध नहीं कर सकते...

सर्वे में 47 फीसदी शिक्षित युवा...रोज़गार के लिए अयोग्य माने गए

जबकि 65 फीसदी युवा क्लर्क का काम भी नहीं कर सकते

और कॉलेज की पढ़ाई पूरी कर चुके 97 फीसदी युवा Accounting का काम सही तरीके से नहीं कर सकते...

यहां तक कि देश के उच्च शिक्षित युवाओं में से 90 प्रतिशत को कामचलाऊ अंग्रेजी भी नहीं आती
<<PCR GFX out>>

वर्ष 2020 तक देश के हर 10 में से 3 युवा उच्च शिक्षा हासिल करेंगे. लेकिन बड़ा सवाल ये है कि उच्च शिक्षा को लेकर सरकार का लक्ष्य तो तय है लेकिन क्या इन पढ़े लिखे नौजवानों को रोजगार देने के लिए सरकार के पास कोई नीति है .
=================================================================================================================================================
बिहार में शिक्षा पर हज़ारों रुपये खर्च करने वाले छाक्षों के पास भी नौकरी नहीं है तो देश की राजधानी दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्विविद्यालय के छात्रों को मुफ्त शिक्षा की लालसा है . और अब हम इसी लालसा का विश्लेषण करेंगे .

((VISUALS IN))

जेएनयू में प्रशासन के फीस बढ़ोतरी के फैसले के बाद यूनिवर्सिटी के छात्रों के विरोध प्रदर्शनों की तस्वीरें, ऐसे कई युवाओं को निराश कर रही होंगी ...जो पढ़ने के लिए जेएनयू आना चाहते हैं.
हाथों में पोस्टर , बैनर लिए छात्र देश के सामने जेएनयू की जो छवि पेश कर रहे है उन्हें देखकर लग रहा है कि होनहार, मेहनती और गरीब छात्र फीस बढोतरी के बाद जेएनयू में अपनी पढाई को पूरा कर पाने में असमर्थ हो गए हैं. लेकिन ,क्या स्थिति सच में वही है जो दिखाने की कोशिश की जा रही है.

जी न्यूज के पास ऐसे कई दस्तावेज हैं जो ये साफ कर रहे हैं कि जेएनयू के 70 फीसदी से ज्यादा छात्रों को किसी ना किसी तरह की SCHOLARSHIP मिल रही है. दूसरी तरफ इनमें से भी कई छात्रों ने हॉस्टल कैंटीन का ज़रुरी बकाया बिल भी नहीं दिया है ... और विश्विद्यालय को घाटे की हालत में पहुंचा दिया है. JNU प्रशासन इस वक्त बिजली, पानी और कर्मचारियों की तनख्वाह के चलते लगभग 45 करोड़ के घाटे में है.

इस पूरी खबर पर आज का विश्लेषण शुरू करने से ये जानकारी भी जरूरी है कि जेएनयू प्रशासन की ओर से बनी हाई लेवल कमिटी ने दूसरी बार बढ़ाई हुई फीस घटा दी है.

जेएनयू प्रशासन ने पहली बार 28 अक्टूबर को फीस बढ़ाने का फैसला किया था . छात्रों के विरोध के बाद 13 नवंबर को पहली बार इसे कम किया गया और कल यानी 25 नवंबर को दोबारा फीस घटाई गई है. हालांकि छात्र अभी भी पूरी तरह के रोल बैक पर... अड़े हुए हैं.

<<
ग्राफिक्स इन ..
(कमरे का किराया)>>

JNU में हॉस्टल के सिंगल रुम SINGLE ROOM का किराया 10 रुपए से बढ़ाकर 300 रुपए किया गया था . इस तरह TWIN SHARING यानी दो बिस्तरों के कमरों का किराया 20 रुपए से बढ़ाकर 600 रुपए किया गया था . जबकि 13 नवंबर को इसे घटाकर 150 कर दिया गया...और 600 रुपए की जगह 300 रुपए का चार्ज कर दिया गया. 25 नवंबर को जो चार्ज घटाए गए हैं इसे उतना ही रखा गया है.

<<सर्विस और यूटीलिटी चार्ज SERVICE AND UTILITY CHARGE>>
<<SCHOLARSHIP DOCU SHOTS>>
इसी तरह 28 अक्टूबर को SERVICE AND UTILITY CHARGE 1700 रुपए लगाए गए . ये नया चार्ज है. पहले छात्र ऐसा कोई चार्ज नहीं देते थे.
13 नवंबर को फीस घटाई गई तब सर्विस चार्ज में बदलाव नहीं किए गए .
25 नवंबर को ये चार्ज घटाकर 1000 रुपए कर दिया गया है. गरीब आय वर्ग के छात्रों को अब इसके लिए 500 रुपए देने होंगे.

देश के 40 केंद्रीय विश्वविदयालयों की तुलना में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय को सबसे अधिक अनुदान मिलता है.
जेएनयू में पढनेवाले 7557 छात्रों में से 5371 छात्रों को अलग-अलग स्कॉलरशिप मिलती है. वहां 2000 रुपए से लेकर 47000 रुपए ...हर महीने छात्रवृत्ति यानी SCHOLARSHIP दी जाती है. 71 प्रतिशत छात्रों को इस वक्त SCHOLARSHIP मिल रही है.

<<SCHOLARSHIP DOCU SHOTS>>

<<VISUALS OUT>>

 

इतनी स्कॉलरशिप पाने वाले कई छात्रों ने भी हॉस्टल कैंटीन के 3 करोड़ रुपए नहीं दिए हैं. जेएनयू के 18 हॉस्टल के 4 महीने का बिल 3 करोड़ रुपए हो चुका है. ये बिल जुलाई से अक्टूबर 2019 के बीच का है.

इस खबर में हम आपको आज विस्तार से समझाएंगे कि सबसे ज्यादा GRANT पाने वाली UNIVERSITY कैसे सबसे ज्यादा घाटे में है. और सबसे ज्यादा SCHOLARSHIP पा रहे छात्र गरीबी का रोना कैसे रो रहे हैं.

<<FIR MENTION>>

इन्हीं में से कई छात्र ऐसे भी हैं जो उनके मन मुताबिक खबर ना दिखाने वाले मीडिया को कवरेज से सिर्फ रोकते ही नहीं हैं, बल्कि अभद्रता की सारी हदें पार कर जाते हैं. ज़ी न्यूज़ संवाददाताओं के साथ कवरेज के दौरान अक्सर जेएनयू के कुछ छात्र बदतमीजी करते हैं. ज़ी न्यूज़ संवाददाता पूजा मक्कड़ जब फीस की खबर की कवरेज के लिए जेएनयू पहुंची तो कुछ छात्रों ने उनके साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया, बदतमीजी की और कवरेज करने से रोका - पूजा मक्कड़ ने इस घटना की FIR दर्ज करवा दी है.

<<Hold And Play Pkg>>
====================================================================================