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zee jaankari: Rafale की डील के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच 36 का हो जाएगा आंकड़ा!

हरियाणा के अंबाला एयरबेस में...वायुसेना ने अपनी 17 Squadron...'Golden Arrows' को Rafale Fighter Aircraft के लिए तैयार करना शुरू कर दिया है . 

zee jaankari: Rafale की डील के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच 36 का हो जाएगा आंकड़ा!

अब चर्चा भारतीय वायुसेना में हो रही नई शुरुआत की...आज हम भारतीय वायुसेना की गौरवशाली 17 Squadron....'Golden Arrows' के पुनर्जन्म का विश्लेषण करेंगे . इसी Squadron ने कारगिल युद्ध में पाकिस्तान के घुसपैठियों पर हमला करके... हवाई पराक्रम का नया इतिहास लिखा था . वायुसेनाध्यक्ष एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ उस समय 'Golden Arrows' Squadron के कमांडिंग अफसर थे और उन्होंने भी कारगिल में बमवर्षा की थी . आज आपके साथ Golden Arrows की चर्चा इसलिए जरुरी है.... क्योंकि फ्रांस से खरीदे जा रहे Rafale Fighter Aircraft को उड़ाने का गौरव...

वायुसेना में सबसे पहले 17 Squadron को मिलने वाला है...और इसी उद्देश्य से Golden Arrows को नया अवतार दिया जा रहा है. ये भारतीय वायुसेना की Squadron नंबर 17 है, जिसे Golden Arrows भी कहा जाता है आज हरियाणा के अंबाला एयरबेस में...वायुसेना ने अपनी 17 Squadron...'Golden Arrows' को Rafale Fighter Aircraft के लिए तैयार करना शुरू कर दिया है .

और इस कार्यक्रम में वायुसेनाध्य़क्ष एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ भी शामिल हुए. अगले महीने 8 अक्टूबर को... वायुसेना दिवस के मौके पर फ्रांस में RAFALE भारतीय वायुसेना को सौंपा जाएगा . वायुसेना को कुल 36 RAFALE Fighter एयरक्राफ्ट मिलेंगे जिनसे दो Squadron बनाई जाएंगी .पहली Squadron को अंबाला और दूसरी पश्चिम बंगाल के हाशिमारा Air Force Station में तैनात किया जाएगा.

'Golden Arrows' Squadron का अंबाला से ऐतिहासिक रिश्ता रहा है. वर्ष 1951 में 'Golden Arrows' Squadron को पहली बार अंबाला में ही तैयार किया गया था. मॉडर्न Fighter Aircraft से भी  'Golden Arrows' का पुराना संबंध रहा है. वर्ष 1975 में इस Squadron में आधुनिक मिग-21 शामिल किए गए थे. और अब वर्ष 2019 में 'Golden Arrows' Squadron को आधुनिक RAFALE मिलनेवाला है. 'Golden Arrows' ने वर्ष 1965 और 1971 के युद्ध में भी पाकिस्तान के खिलाफ हवाई हमले किए थे. जब हमलोग दो दुश्मनों की...आपसी नफरत की...चर्चा करते हैं...तो कई बार ये कहते हैं कि उनके बीच...36 का आंकड़ा है...

आज हम आपको बताएंगे कि कैसे Rafale Fighter Aircraft की डील के बाद...भारत और पाकिस्तान के बीच भी 36 का आंकड़ा हो जाएगा...भारतीय वायुसेना...फ्रांस के साथ 36...Rafale Fighter Aircraft का सौदा कर रही है...ये Aircraft...भारतीय वायुसेना की ताकत और पाकिस्तान की परेशानी कई गुना बढ़ाने वाला है...French भाषा में Rafale का अर्थ होता है तूफान...और Rafale Fighter Aircraft भी दुश्मनों पर तूफान की रफ्तार से प्रहार करता है....फ्रांस से भारत आने वाले पहले Rafale विमानों को हरियाणा के अंबाला Air Force Station पर तैनात किया जाएगा. अंबाला में मौजूद Rafale की ताकत...

पाकिस्तान को भारतीय सीमा से दूर रखेगी. अंबाला से पाकिस्तान के शहर लाहौर की दूरी करीब 264 किलोमीटर है. Rafale Fighter Aircraft की रफ्तार करीब 2 हज़ार किलोमीटर प्रति घंटा है, इस रफ्तार पर ये सिर्फ 8 मिनट में लाहौर पहुंचकर हमला कर सकता है. अंबाला से पाकिस्तान का बहावलपुर करीब 5 सौ किलोमीटर दूर है . बहावलपुर में ही आतंकवादी मौलाना मसूद अजहर का हेडक्वार्टर है .

और रफाल से बहावलपुर तक हमले के लिए पहुंचने में सिर्फ 15 मिनट का समय लगेगा . कुल मिलाकर रफाल विमान की एंट्री से पाकिस्तान की परेशानी बढ़ने वाली है. और इसकी मदद से हमारी वायुसेना आने वाले कई दशकों तक एशिया के आसमान पर राज करेगी .पाकिस्तान की बढ़ती परेशानियों के बाद....

आइए...अब भारतीय सेना के...एक ऐसे जांबाज को याद करते हैं...जिनके पराक्रम की कहानियों से...आज भी पाकिस्तान कांपता है...भारत के उस परमवीर का नाम है...अब्दुल हमीद...भारत और पाकिस्तान के बीच हुए 1965 के युद्ध में... आज का दिन बहुत महत्वपूर्ण है . 10 सितंबर 1965 को Company QuarterMaster हवलदार अब्दुल हमीद ने सर्वोच्च बलिदान दिया था . 1965 के युद्ध में अब्दुल हमीद ने अकेले... पाकिस्तान के 8 टैंकों को ध्वस्त कर दिया था... इस असाधारण वीरता के लिए मरणोपरांत उन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था.

वर्ष 1965 में पाकिस्तान ने पंजाब से जुड़े इंटरनेशनल बॉर्डर के पास 'असल उत्तर' में बड़ा हमला किया था... ऐसा लग रहा था कि पाकिस्तानी फौज अमृतसर तक पहुंच जाएगी... लेकिन भारतीय जवान पाकिस्तान के सामने चट्टान बनकर खड़े हो गए... और पाकिस्तानी फौज को असल उत्तर से एक इंच भी आगे बढ़ने नहीं दिया...

भारतीय जवानों ने अद्भुत शौर्य दिखाते हुए 'असल उत्तर' में... पाकिस्तान के शक्तिशाली पैटन टैंकों की कब्रगाह बना दी थी. पाकिस्तान के खिलाफ इस पराक्रम में अब्दुल हमीद का बड़ा योगदान था. 8 सितंबर की सुबह करीब साढ़े आठ बजे पाकिस्तानी टैंकों की पूरी फौज़ खेमकरण को पार करके... वहां से 7 किलोमीटर दूर असल उत्तर तक पहुंचने लगी थी. पाकिस्तान ने अमेरिका से खरीदे गए Patton(पैटन) टैंकों से हमला किया था.

उस वक्त ये टैंक अजेय माने जाते थे. पाकिस्तान को ये भरोसा था पैटन टैंक की मदद से वो भारत के खिलाफ युद्ध जीत जाएगा. पाकिस्तान की 1 Armored(आर्मर्ड) डिवीज़न के 200 से ज़्यादा पैटन टैंक और सैनिकों को रोकना बहुत मुश्किल था...

लेकिन जांबाज अब्दुल हमीद... पाकिस्तानी फौज़ के सामने चट्टान की तरह खड़े थे. उनके पास एक Recoilless Rifle लगी जीप के अलावा... सबसे बड़ा हथियार था उनका बुलंद हौसला. लगातार तीन दिन तक तोपखाना, टैंकों और पाकिस्तानी वायुसेना की भारी बमबारी के बीच... परमवीर अब्दुल हमीद...

पाकिस्तानी टैंकों को तबाह करते रहे...8 से 10 सितंबर तक हुए युद्ध में पाकिस्तान के 72 पैटन टैंकों समेत कुल 97 टैंक तबाह हुए थे. इसमें से 8 टैंक अकेले परमवीर अब्दुल हमीद ने नष्ट किए थे. हवलदार अब्दुल हमीद शायद पाकिस्तानी सेना को और नुकसान पहुंचाते. तभी एक पाकिस्तानी टैंक को नष्ट करने के हमले में उनपर जानलेवा हमला हुआ और वो शहीद हो गए. शहादत से पहले अब्दुल हमीद ने पाकिस्तान की हार तय कर दी थी... इसके साथ ही वर्ष 1965 की लड़ाई में पाकिस्तान का... अब तक सबसे बड़ा हमला पूरी तरह नाकाम हो चुका था...

पाकिस्तान की फर्स्ट आर्मर्ड डिवीज़न पूरी तरह तबाह हो चुकी थी... उसके कमांडर तक मारे जा चुके थे... परमवीर अब्दुल हमीद सहित भारतीय जवानों ने अपनी सूझबूझ और सर्वोच्च बलिदान से पाकिस्तान के अहंकार को धूल में मिला दिया...1965 की लड़ाई में पाकिस्तान का अब तक सबसे बड़ा हमला पूरी तरह नाकाम हो चुका था..

.72 पैटन टैंकों समेत पाकिस्तान के 97 टैंक तबाह और बर्बाद हालत में पड़े थे .. फर्स्ट आर्मर्ड डिवीज़न पूरी तरह तबाह हो गई थी ..डिवीजन के कमांडर तक मारे जा चुके थे... भारतीय जवानों ने अपनी सूझबूझ और सर्वोच्च बलिदान से पाकिस्तान के अहंकार को धूल में मिला दिया...