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Zee Jaankari: Trump ने तुर्की को लिखा पत्र- 'मूर्ख मत बनो...होश में आ जाओ

हमारा अगला विश्लेषण अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के एक पत्र से जुड़ा हुआ है. Donald Trump ने Turkey के राष्ट्रपति को एक पत्र लिखा है. ये पत्र Turkey के द्वारा Syria में किए गए हवाई हमलों के संबंध में लिखा गया है . 

Zee Jaankari: Trump ने तुर्की को लिखा पत्र- 'मूर्ख मत बनो...होश में आ जाओ

हमारा अगला विश्लेषण अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के एक पत्र से जुड़ा हुआ है. Donald Trump ने Turkey के राष्ट्रपति को एक पत्र लिखा है. ये पत्र Turkey के द्वारा Syria में किए गए हवाई हमलों के संबंध में लिखा गया है . लेकिन इस पत्र की सबसे खास बात इसकी भाषा है. जब भी विश्व के बड़े नेता एक दूसरे को पत्र लिखते हैं...तो बेहद शालीन और संयमित भाषा का प्रयोग करते हैं . लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति के इस पत्र की भाषा...कहीं से भी शिष्टाचार की भाषा नहीं है . राष्ट्रपति Trump ने इस पत्र में जिन शब्दों का प्रयोग किया है...उसकी उम्मीद अमेरिका के राष्ट्रपति से नहीं की जा सकती. 

Trump ने अपने पत्र में...'मूर्ख मत बनो...होश में आ जाओ...सजा भुगतने को तैयार रहो' जैसे शब्दों का प्रयोग किया है. 9 अक्टूबर को लिखे गए इस पत्र में Trump ने Turkey के राष्ट्रपति को धमकी देते हुए ये कहा है...कि अगर Turkey अपनी हरकतों से बाज नहीं आता...तो अमेरिका उसकी अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर देगा.

अपने इस बयान को लेकर उन्होंने आगे कहा...कि आप हजारों लोगों के कत्लेआम के लिए जिम्मेदार नहीं होना चाहते...और मैं Turkey की अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने के लिए जिम्मेदार नहीं होना चाहता हूं. लेकिन मैं ये कर सकता हूं. Donald Trump ने अपने पत्र में लिखा है...कि Turkey के राष्ट्रपति. इतिहास में शैतान के तौर पर अपना नाम दर्ज कराने का जोखिम मोल ले रहे हैं.

Trump ने इस पत्र में कहा. कि अगर आप सही और मानवीय तरीके अपनाते हैं, तो इतिहास आपके हक में होगा. लेकिन, अगर इसी तरह गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाए रखते हैं, तो इतिहास आपको हमेशा शैतान के तौर पर देखेगा. अमेरिका के राष्ट्रपति यहीं नहीं रुके. इसके बाद उन्होंने अपने पत्र में लिखा,..कि 'तानाशाह की तरह कठोर बनने की कोशिश मत करो, वरना बर्बाद हो जाओगे.

अपने लक्ष्य को मानवीय तरीके से हासिल करो. कठोर और जटिल आदमी मत बनो...मूर्ख मत बनो.' भारत में पत्र लिखने की परंपरा काफी पुरानी है. हम जब भी किसी को पत्र लिखते हैं. तो उसमें आग्रह और निवेदन की भाषा होती है. न कि अमेरिका के राष्ट्रपति की तरह धमकी वाली भाषा. भारत के प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति जब किसी को पत्र लिखते हैं, तो उनकी भाषा बहुत गरिमापूर्ण होती है.

इन पत्रों में भारत की सभ्यता, संस्कृति और संस्कार दिखाई देता है. महात्मा गांधी के द्वारा लिखे गए पत्र आज भी हमारे इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद के द्वारा वर्ष 1934 से 1963 के बीच लिखे गये पत्रों को एक किताब का रूप दिया गया है...ताकि आने वाली पीढ़ी इन पत्रों से कुछ सीख सके.

भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के द्वारा अपनी बेटी इंदिरा गांधी को लिखे गए पत्र...आज भी इतिहास की कक्षाओं में बच्चों को पढ़ाए जाते हैं . भारत के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के द्वारा लिखे गए पत्र...युवाओं को प्रेरणा देने का काम करते हैं . लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति के पत्र की इस धमकी भरी भाषा से.

अमेरिका के युवा आखिर क्या सीखेंगे. अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भी इस तरह की भाषा का कोई स्थान नहीं है...और आज Donald Trump को भी ये समझना चाहिए.