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Zee Jankari: दिल्ली-NCR में EPCA ने घोषित की पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी

दिल्ली में प्रदूषण के खतरनाक स्तर पर पहुंच जाने के बाद आज EPCA ने Public Health Emergency घोषित की है. इ

Zee Jankari: दिल्ली-NCR में  EPCA ने घोषित की पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी

अब आपको बताते हैं कि दिल्ली और आस पास के इलाकों में आपातकाल क्यों लगाया गया है? सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 1998 में प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण के लिए EPCA यानी Environment Pollution Prevention & Control Authority का गठन किया था .दिल्ली में प्रदूषण के खतरनाक स्तर पर पहुंच जाने के बाद आज EPCA ने Public Health Emergency घोषित की है. इसमें प्रदूषण की रोकथाम के लिए 15 अक्टूबर से लागू नियमों का और कड़ाई से पालन किया जाएगा . साथ ही कुछ नए प्रतिबंध भी लगाए गए हैं . सबसे पहले से समझना जरूरी है कि Public Health Emergency का मतलब क्या है?

ये एक ऐसी स्थिति है जिसमें किसी प्राकृतिक आपदा से निबटने के लिए कई एजेंसियां मिलकर काम करती हैं. ये वायु प्रदूषण... किसी बीमारी या फिर ऐसे हालात में घोषित की जाती है जब लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ जाता है. जब बच्चों के स्वास्थ्य पर बहुत ज्यादा खतरे की संभावना होती है तब Public Health Emergency लगाने की जरूरत होती है. आपातकाल लगाने के बाद दिल्ली के सभी स्कूलों को 5 नवंबर तक के लिए बंद कर दिया गया है. दिल्ली और आस पास के इलाकों में किसी भी तरह के निर्माण कार्य को रोक दिया गया है.

दिल्ली में सरकारी दफ्तरों का वक्त बदल दिया गया है. अब कुछ ऑफिस सुबह साढ़े 9 बजे... और बाकी साढ़े 10 बजे खुलेंगे . अभी तक प्राइवेट कंपनियों को ऐसा कोई आदेश नहीं दिया गया है. दीवाली के दिन पटाखे चलाने के अगले दिन से दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बढ़ना शुरु हो गया था. अब EPCA ने पूरी सर्दियों में पटाखे चलाने पर बैन लगाया है.

आमलोगों को ये भी सलाह दी गई है कि वो खुले में Exercise ना करें... मरीजों, बच्चों और बुजुर्ग लोगों को घर से अंदर रहने के लिए कहा गया है. Public Health Emergency की घोषणा के बाद आपके मन में ... अपने बच्चों और परिवार के स्वास्थ्य पर खतरे की आशंका को लेकर कई सवाल होंगे. DNA में सभी खबरों को तैयार करने में विशेषज्ञों की राय ली जाती है. इस पर और जानकारी के लिए आज हमने डॉक्टरों से भी बात की . ताकि आपको इस खबर की हर बात अच्छे से समझा सकें . आप भी इनकी बातें ध्यान से सुनकर खुद को प्रदूषण के खिलाफ 100 प्रतिशत तैयार कर सकते हैं.

आपको जानकर हैरानी होगी और दुख भी होगा कि दुनिया में रहने लायक 140 शहरों की सूची में देश की राजधानी दिल्ली 118वें नंबर पर और देश की आर्थिक राजधानी 119वें नंबर पर है . इसी साल सितंबर में Economist Intelligence Unit की तरफ से जारी की गई इस लिस्ट के मुताबिक दिल्ली की खराब Ranking के लिए यहां का प्रदूषण भी जिम्मेदार है . World Health Organization के मुताबिक दिल्ली दुनिया के उन शहरों की सूची में छठे नंबर पर है..जहां प्रदूषण के लिए जिम्मेदार PM2.5 कणों का औसत पूरे साल बहुत खतरनाक स्थिति में रहता है .

ऑस्ट्रिया की राजधानी विएना को रहने के लिहाज़ से दुनिया का सबसे अच्छा शहर माना गया है . आज जब दिल्ली का औसत Air Quality Index 484 है, तब ऑस्ट्रिया के ज्यादातर शहरों का AQI 7 से लेकर 55 के बीच था . यानी हमारी दिल्ली के मुकाबले 10 से 60 गुना कम.

आज से कुछ वर्ष पहले तक चीन की राजधानी बीजिंग की स्थिति भी दिल्ली की तरह थी. वहां अक्सर प्रदूषण खतरनाक स्तर तक पहुंच जाया करता था . एक वक्त तो ऐसा था...जब बीजिंग को दिल्ली की ही तरह दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी होने का तमगा मिल गया था . लेकिन बीजिंग ने इस जानलेवा प्रदूषण के खिलाफ लड़ने की प्रतिबद्धता दिखाई और आज बीजिंग विश्न के 200 सबसे प्रदूषित शहरों की लिस्ट से भी बाहर होने वाला है.

स्विटज़रलैंड की कंपनी IQAir AirVisual के मुताबिक बीजिंग के वायु प्रदूषण में इस साल 20 प्रतिशत की कमी आई है और 2017 से लेकर अब तक बीजिंग की हवा में PM 2.5 कणों की मात्रा पहले के मुकाबले 33 प्रतिशत कम हुई है .

बीजिंग ने प्रदूषण के खिलाफ इस युद्ध की शुरुआत 2014 में की थी और सिर्फ 5 वर्षों में उसने इस युद्ध को लगभग जीत लिया है. लेकिन भारत में तो अभी ना सरकारें प्रदूषण को लेकर चिंतित हैं और ना ही आम लोग पर्यावरण के प्रति जागरुक हो पा रहे हैं . आज Zee News के कार्यक्रम इंडिया का DNA में हमने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से भी प्रदूषण के मसले पर सवाल पूछा उन्होंने इस समस्या को लेकर क्या कहा...आप भी सुनिए

हमने इस विषय पर दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया से भी बात की उनका कहना है कि पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने जानी की घटनाएं ही दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति के लिए जिम्मेदार है. लेकिन वो ये भी मानते हैं कि दिल्ली के लोगों को भी इसके खिलाफ लड़ाई लड़नी होगी . अब सवाल ये है कि जब सारे नेता प्रदूषण से लड़ने की प्रतिबद्धता दिखा रहे हैं .तो फिर देश के लोगों को इससे छुटकारा क्यों नहीं मिल रहा .

दिल्ली के पड़ोसी राज्यों पंजाब और हरियाणा में किसानों द्वारा पराली जलाए जाने को लेकर राजनीति हो रही है. एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं लेकिन दुनिया के दूसरे देशों में ऐसा नहीं होता . आपको जानकर हैरानी होगी कि अमेरिका के केलिफॉर्निया राज्य के कई इलाकों के जंगलों में इस वक्त भयंकर आग लगी हुई है .

अमेरिका के Wildland Fire Air Quality Response Program के मुताबिक इन इलाकों में फिलहाल Air Quality Index.. Good से Moderate के बीच है . यानी जंगलों में लगी आग के बावजूद कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता साफ है . जबकि पराली जलाए जाने की घटनाओं के बाद से दिल्ली का Air Quality Index 500 के पार जा चुका है .

पंजाब और हरियाणा की तरह...चीन ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, फ्रांस और इंग्लैंड के कुछ इलाकों में भी किसानों द्वारा पराली जलाई जाती है. चीन और इंग्लैंड में इस पर पूरी तरह प्रतिबंध है तो कनाडा, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में किसान कुछ शर्तों के साथ पराली जला सकते हैं . पंजाब और हरियाणा में भी पराली जलाए जाने पर प्रतिबंध है और ये कानून अपराध भी है लेकिन फिर भी इन दोनों राज्यों में 23 सितंबर से लेकर 27 अक्टूबर तक पराली जलाने की 12 हज़ार से ज्यादा घटनाएं हो चुकी हैं .

अब आप अंदाज़ा लगाइए कि जब हमारे देश में कोई प्रदूषण को लेकर गंभीर ही नहीं है तो फिर हम प्रदूषण के खिलाफ ये युद्ध कैसे जीत पाएंगे .नियमों का उल्लंघन सिर्फ गांवों में रहने वाले किसान ही नहीं कर रहे हैं..बल्कि दिल्ली-NCR के शहरों में भी प्रदूषण रोकने के लिए बनाए गए नियमों का उल्लंघन हो रहा है. The Energy and Resources Institute के द्वारा कराई गई एक स्टडी के मुताबिक दिल्ली के कुल वायु प्रदूषण में पराली की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत के आसपास होती है . लेकिन ये सिर्फ 15 से 20 दिनों के लिए होता है जबकि बाकी के दिनों में 36 प्रतिशत प्रदूषण के लिए खुद दिल्ली जिम्मेदार होती है...इसमें 34 प्रतिशत हिस्सेदारी NCR के दूसरे शहरों की होती है. जबकि 30 प्रतिशत प्रदूषण के लिए अन्य कारण जिम्मेदार हैं .

जब हमने दिल्ली के वायु प्रदूषण का Breakup तैयार किया तो हमें पता लगा कि दिल्ली में 28 प्रतिशत PM2.5 कणों के लिए वाहनों से निकलने वाला धुआं जिम्मेदार है. जबकि 18 प्रतिशत प्रदूषण दिल्ली में उड़ने वाली धूल की वजह से होता है. पावर प्लांट्स से 6 प्रतिशत, और छोटे उद्योगों से 14 प्रतिशत और रिहाइशी इलाकों से 10 प्रतिशत वायु प्रदूषण होता है.

दिल्ली-NCR के कई रिहायशी इलाकों में Power Backup की सुविधा दी जाती है. ऊंची ऊंची इमारतों में रहने वाले लोग इस Power Back Up के लिए महंगी कीमत भी चुकाते हैं. लेकिन इसके लिए पर्यावरण की बलि दी जाती है. EPCA यानी ENVIRONMENT POLLUTION PREVENTION & CONTROL AUTHORITY के मुताबिक खतरनाक प्रदूषण वाले दिनों में दिल्ली-NCR के शहरों में डीज़ल जेनरेटर चलाना कानून जुर्म है.

लेकिन बहुत सारी Resedential Societies में डीज़ल जनरेटरों के ज़रिए ही Power Back Up की सुविधा दी जाती है . और इस पर रोक लगाने के बावजूद बहुत सारी Societies में नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है . और जहां नियमों का पालन हो रहा है वहां रहने वाले लोग इससे परेशान है क्योकि कई Societies में लोगों को Inverter लगाने की इजाज़त भी नहीं दी जाती है . हालांकि EPCA के चेयरमैन का कहना है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले बिल्डरों पर कार्रवाई की जाएगी.

आज हमने अपना ये विश्लेषण तैयार करते वक्त...ये समझने की कोशिश की ...कि प्रदूषण से बचने के लिए आम आदमी क्या कर सकता है ? हमने इसके केंद्र में दिल्ली और NCR को रखा और दिन भर इस पर अध्ययन किया, कई विशेषज्ञों से बात की . लेकिन आज हमें ये बात अफसोस के साथ कहनी पड़ रही है कि इस प्रदूषण से बचने का कोई पुख्ता उपाय नहीं है.

ना तो Mask पूरी तरह से आपकी रक्षा कर सकता है और ना ही Air Purifiers आपको पूरी तरह से साफ हवा दे सकते हैं . हम ये बात बहुत दुख के साथ कह रहे हैं क्योंकि आपकी तरह हम भी इस प्रदूषण से प्रभावित हैं . इसलिए हमें लगता है कि अगर सरकारें आपको साफ हवा और पानी नहीं दे सकतीं..तो आपको इसके लिए असहनशील हो जाना चाहिए . वोट मांगने वाले नेताओं से पूछना चाहिए कि वो प्रदूषण के खिलाफ क्या कर रहे हैं ? आज हमने इस समस्या पर दिल्ली वालों से भी बात की..दिल्ली वाले इसे लेकर क्या कहते हैं आपको सुनना चाहिए

हमें ये भी लगता है कि दिल्ली जैसे शहर अब रहने लायक नहीं बचे हैं इसलिए इन्हें छोड़ देना ही बेहतर होगा. क्योंकि अगर आपको अपनी और अपने परिवार की जान बचानी है तो आपको इस गैस चैंबर से बाहर निकलना होगा. दिल्ली जैसे शहर सिर्फ आपके हिस्से की सांसें ही नहीं छीन रहे हैं बल्कि आपकी आने वाली पीढ़ियों को भी बर्बाद कर रहे हैं .