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Zee जानकारी : गया का पटवाटोली गांव पैदा कर रहा टॉपर्स

खराब शिक्षा व्यवस्था के लिए बदनाम बिहार में इन दिनों हर कोई टॉपर घोटाले की चर्चा कर रहा है। बिहार में छात्रों को टॉप कराने के लिए बाकायदा घोटाला किया जा रहा है लेकिन जो खबर हम आपको बताएंगे वो आपके मन में बिहार के छात्रों के प्रति सम्मान की भावना को कई गुना बढ़ा देगा।

Zee जानकारी : गया का पटवाटोली गांव पैदा कर रहा टॉपर्स

नई दिल्ली : खराब शिक्षा व्यवस्था के लिए बदनाम बिहार में इन दिनों हर कोई टॉपर घोटाले की चर्चा कर रहा है। बिहार में छात्रों को टॉप कराने के लिए बाकायदा घोटाला किया जा रहा है लेकिन जो खबर हम आपको बताएंगे वो आपके मन में बिहार के छात्रों के प्रति सम्मान की भावना को कई गुना बढ़ा देगा।

इसके लिए हम आपको गया के उस गांव में ले चलेंगे जो 100 फीसदी शुद्ध टॉपर पैदा कर रहा है। गया का पटवाटोली गांव बुनकरों की आबादी के लिए जाना जाता है लेकिन यहां की 10 हज़ार की आबादी में से अब तक 100 से ज्यादा इंजीनियर निकल चुके हैं।

-इस वर्ष इस गांव के 14 छात्रों ने IIT JEE एडवांस्ड परीक्षा में कामयाबी हासिल की है। 
-पिछले साल पटवाटोली के 16 छात्र  IIT की कठिन परीक्षा में अच्छी रैंकिंग के साथ पास हुए थे। 
-बुनकरों के गांव पटवाटोली में इस सोशल इंजीनियरिंग की शुरुआत 1992 से हुई थी।
-1990 के दौर में जब पटवाटोली के आसपास आर्थिक मंदी का दौर आया तो पटवाटोली के बुनकर अपने बच्चों की पढ़ाई की तरफ ध्यान देने लगे।
-तब से लेकर आज तक अभाव में रहने वाले पटवाटोली गांव के बच्चे लगातार अपने इलाके का नाम रौशन कर रहे हैं।
-1992 में पटवाटोली के जितेंद्र प्रसाद पहले ऐसे छात्र बने थे जिन्हे IIT में सफलता मिली।

इसके बाद जितेंद्र प्रसाद वर्ष 2000 में नौकरी करने अमेरिका चले गए लेकिन उनकी कामयाबी ने पटवाटोली के छात्रों में इंजीनियर बनने की ललक पैदा कर दी। पटवाटोली के पूर्व इंजीनियरिंग छात्रों ने मिलकर नवप्रयास नाम से एक संस्था बनाई है जो IIT की परीक्षा देने वाले छात्रों को पढ़ाई में मदद करती है। 

पटवाटोली में पावरलूम के शोर में पढ़ाई करने वाले छात्रों का कहना है कि उन्हें शोर से कोई परेशानी नहीं होती बल्कि शोर उनके लिए संगीत की धुन बन जाता है और वो ध्यान लगाकर पढ़ाई कर पाते हैं। हमें लगता है कि पटवाटोली के इन छात्रों से देश के वो छात्र सबक ले सकते हैं जो भारी सब्सिडी का फायदा उठाकर देश के उच्च शिक्षा संस्थानों में पढ़ाई करते हैं और फिर देशविरोधी नारे लगाते हैं।

बिहार के गया ज़िले के बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे तपस्या कर रहे गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। भगवान बुद्ध को अध्यात्म की दुनिया का इंजीनियर कहा जा सकता है जिन्होंने सबसे मुश्किल खोज यानी स्वयं की खोज का रास्ता बताया था। इसी तरह गया के पटवाटोली गांव के छात्र भी मुश्किल रास्ते पर चलते हुए देश विदेश में इंजीनीयरिंग वाले ज्ञान का झंडा फहरा रहे हैं। 

आखिर क्यों IIT यानी Indian Institutes of Technology की परीक्षा में पास हो जाना एक बहुत बड़ी कामयाबी माना जाता है।

-दरअसल IIT की प्रवेश परीक्षा को Mother of all exams यानी सभी परीक्षाओं से बड़ी परीक्षा भी कहा जाता है। 
-IIT-JEE की परीक्षा को दुनिया की तीन सबसे मुश्किल परीक्षाओं में से एक माना जाता है।
-JEE Advanced में हिस्सा लेने वाले छात्र को गणित, रसायन और गणित के 6 पेपर्स देने होते हैं।
-IIT की प्रवेश परीक्षा का मकसद सबसे होनहार छात्रों की पहचान करना होता है। 
-छात्रों को पहले JEE (main) की परीक्षा देनी होती है जिसमें पास होने वाले छात्र ही JEE Advanced की परीक्षा में हिस्सा ले सकते हैं।
-इस साल JEE (main) की परीक्षा में करीब 14 लाख छात्र शामिल हुए जिनमें से सिर्फ 1 लाख 47 हज़ार 678 छात्रों को ही JEE Advanced की परीक्षा में बैठने का मौका मिला।
-देश भर के IIT संस्थानों और धनबाद में मौजूद इंडियन स्कूल ऑफ माइंस में कुल 10 हज़ार 575 छात्रों को ही एडमिशन मिलेगा।
-IIT, Bombay की वर्ष 2015 की रिपोर्ट के मुताबिक IIT की प्रवेश परीक्षा में पास होने वाले 1600 छात्र ऐसे थे जिनके परिवारों की वार्षिक आय 1 लाख रुपये से कम थी यानी ये छात्र बेहद गरीब परिवारों से आते हैं।
-देश में इस वक्त 22 IIT संस्थानों में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कराई जाती है। 

कुल मिलाकर IIT की परीक्षा पास करना एक बड़ी कामयाबी है और जितने भी छात्र इसमें कामयाब हुए हैं उन्हें हम ज़ी न्यूज़ की तरफ से बधाई देना चाहते है। हमे विश्वास है कि देश के तमाम छात्रों के लिए पटवाटोली गांव की कहानी प्रेरणा का काम करेगी। 

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