ZEE जानकारीः मानसिक बीमारी के लक्षण है सोशल मीडिया पर ज्यादा मैसेज टाइप करना?

ये देश का ऐसा पहला केस है जिसमें ज़रूरत से ज़्यादा Message Type करने के चक्कर में कोई व्यक्ति इलाज के लिए अस्पताल पहुंचा है. 

ZEE जानकारीः मानसिक बीमारी के लक्षण है सोशल मीडिया पर ज्यादा मैसेज टाइप करना?

आज सबसे पहले हम उन लोगों की बात करेंगे जो मोबाइल फोन की डिजिटल अंधभक्ति का शिकार हो चुके हैं. इन लोगों को सोते- जागते..खाते-पीते और चलते- फिरते..हर वक़्त सिर्फ़ मोबाइल फोन चाहिए . आप अपने आसपास हर रोज़ ऐसे लोगों को देखते होंगे.. जो गर्दन झुकाकर कई घंटों तक अपने मोबाइल फोन में उलझे रहते हैं . इन लोगों को अपने फोन पर Notification और Message की Alert Tone बहुत बेचैन कर देती है . इन बातों को सुनकर आपको लग रहा होगा कि हम आप ही की बात कर रहे हैं . अगर आप सोशल मीडिया पर ज़रूरत से ज़्यादा Active हैं और पूरे दिन कई घंटों तक Message टाइप करते रहते हैं.. तो ये सsमझ लीजिए कि आप मानसिक रूप से बीमार हैं . अपने दोस्तों से लगातार जुड़े रहने के लिए कई घंटो तक Chatting करने की आदत...इस दौर की एक गंभीर बीमारी है और इस बीमारी का नाम है Texting Addiction.

देश में मानसिक बीमारियों का इलाज करने वाले अस्पताल National Institute of Mental Health and Neuro Sciences यानी NimHans ने एक रिपोर्ट जारी की हैं. इस रिपोर्ट में 19 साल की एक लड़की का ज़िक्र किया गया है जो ज़रूरत से ज़्यादा message टाइप करने की वजह से Texting Addiction का शिकार हो चुकी है . 

ये देश का ऐसा पहला केस है जिसमें ज़रूरत से ज़्यादा Message Type करने के चक्कर में कोई व्यक्ति इलाज के लिए अस्पताल पहुंचा है. ये लड़की पूरे दिन में 8 से 10 घंटे तक अपने फोन पर Chat करती थी . और इस दौरान वो करीब 200 Message type करती थी. डॉक्टरों के मुताबिक ज़रूरत से ज़्यादा Message करना.. एक आदत नहीं बल्कि एक नशा है, जो धीरे-धीरे आपको मानसिक रूप से बीमार बना देता है . ये लड़की अकेली नहीं है, भारत में ये समस्या बहुत तेज़ी से बढ़ रही है 

एक सर्वे के मुताबिक भारत में एक व्यक्ति हर रोज़ औसतन 19 मिनट तक फोन पर बात करता है. 3 मिनट sms करने में खर्च करता है और Whatsapp जैसी Social Messaging apps पर करीब 44 मिनट बिताता है. यानी फोन पर सबसे ज़्यादा समय chatting में खर्च हो रहा है . देश के 60 प्रतिशत से ज़्यादा युवा हर रोज़ करीब 65 Message भेजते हैं, और उनके पास 125 Message आते हैं. इनमें से 80 प्रतिशत युवाओं ने ये स्वीकार किया था कि नये Message की उम्मीद के चक्कर में ये लोग बार-बार अपना फोन Check करते हैं . 

मोबाइल फोन पर कई घंटों तक चिपके रहने वाली आदत..देश के लोगों को बीमार बना रही है लेकिन दुख की बात ये है कि हमारे देश के लोगों को ये सारी बातें ..किसी प्रवचन की तरह लगती हैं . लेकिन ये कोई प्रवचन नहीं है.. ये आपके फायदे की बात है. आपके मन में ये सवाल आ रहा होगा कि ये कैसे तय किया जाए कि मोबाइल पर chatting  वाली आदत...  एक मानसिक बीमारी की तरफ़ बढ़ रही है . इसे समझने के लिए पहले आपको ...अपने दिमाग में होने वाले एक रासायनिक बदलाव को समझना होगा . हमारे दिमाग में Dopamine नाम का एक Hormone होता है जो दिमाग को खुश होने और इच्छाएं पैदा करने का एहसास देता है . इसे विज्ञान की भाषा में liking” system और wanting system कहते हैं . 

जब आप मोबाइल फोन पर अपने दोस्तों से Chat करते हैं तो आपको खुशी का अहसास होता है यानी आपका liking system..Active हो चुका है. लेकिन जब Chatting करने की समय सीमा बढ़ने लगती है तो ये hormone अधिक मात्रा में पैदा होता है.. जिससे wanting system तेज़ी से Activate  हो जाता है. वैज्ञानिकों के मुताबिक wanting system हमारे  liking” system से ज़्यादा ताक़तवर होता है . सामान्य भाषा में कहा जाए तो किसी चीज़ को पाने या हासिल करने की इच्छा.. उसे पसंद करने की इच्छा से ज़्यादा ताक़तवर होती है . और इसी वजह से आप Texting Addiction के शिकार हो जाते हैं. इस बीमारी के कुछ शुरुआती लक्षण हैं .. आप इन्हें नोट कर लीजिए इस बीमारी में खाने पीने और नींद की आदतों में ज़बरदस्त बदलाव होते हैं. मरीज़ को डिप्रेशन हो जाता है, वो परिवार के सदस्यों से बातचीत कम कर देता है, और अपने मोबाइल फोन के बगैर एक मिनट भी नहीं रह सकता. अगर आपको इस तरह के लक्षण महसूस होते हैं तो हमारी रिपोर्ट को ध्यान से देखिए इसमें आपको मोबाइल फोन से उचित दूरी बनाने के लिए, ज़रूरी टिप्स मिलेंगे.