close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

Zee जानकारी : खुफिया एजेंसी ISI का अड्डा बना दिल्ली स्थित पाकिस्तानी दूतावास

देश की संसद से सिर्फ 4 किलोमीटर दूर स्थित पाकिस्तान का हाईकमीशन, उसकी खुफिया एजेंसी ISI का अड्डा बन चुका है। ये खुलासा पाकिस्तान हाईकमीशन में तैनात ISI के अफ़सर, महमूद अख़्तर के पकड़े जाने के बाद हो चुका है। और हमें जो जानकारी मिल रही है, उसके मुताबिक बहुत जल्द ISI के कुछ और जासूसों को पकड़ा जा सकता है।

Zee जानकारी : खुफिया एजेंसी ISI का अड्डा बना दिल्ली स्थित पाकिस्तानी दूतावास

नई दिल्ली : देश की संसद से सिर्फ 4 किलोमीटर दूर स्थित पाकिस्तान का हाईकमीशन, उसकी खुफिया एजेंसी ISI का अड्डा बन चुका है। ये खुलासा पाकिस्तान हाईकमीशन में तैनात ISI के अफ़सर, महमूद अख़्तर के पकड़े जाने के बाद हो चुका है। और हमें जो जानकारी मिल रही है, उसके मुताबिक बहुत जल्द ISI के कुछ और जासूसों को पकड़ा जा सकता है।

दिल्ली पुलिस के सूत्रों के मुताबिक महमूद अख़्तर ISI में एनसीओ यानी नॉन-कमीशंड ऑफिसर था। और वो पाकिस्तानी हाईकमीशन के 4 अफ़सरों के निर्देश पर दिल्ली में ISI का जासूसी विंग चला रहा था। दिल्ली पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तानी हाईकमीशन के अफ़सरों में ISI की टीम का कैप्टन सैय्यद फारुख़ है। जो कामर्सियल काउंसलर के पद पर तैनात है।

-सैयद फारूख़ के बाद फर्स्ट सेक्रेटरी ख़ादिम हुसैन दूसरे नंबर पर है।
-इन दोनों के अलावा पाकिस्तान हाईकमीशन के प्रेस डिपार्टमेंट में फर्स्ट सेक्रेटरी के पद पर तैनात मुदस्सिर इक़बाल चीमा और शाहिद इक़बाल ISI के जासूसों की Core टीम का हिस्सा हैं।
-ISI के लिए जासूसी नेटवर्क चलाने के आरोप में महमूद अख़्तर को भारत से निकाला जा चुका है। 
-पाकिस्तान हाईकमीशन में तैनात होने और डिप्लोमेटिक इम्युनिटी मिलने की वज़ह से ISI के जासूस महमूद अख़्तर को दिल्ली पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई थी।

लेकिन उससे पूछताछ के दौरान दिल्ली पुलिस को ISI के कई जासूसों के बारे में पता चला है, जो पाकिस्तानी हाईकमीशन में अफ़सर के रूप में काम कर रहे हैं। दिल्ली पुलिस के मुताबिक पाकिस्तानी हाईकमीशन से ऑपरेट होने वाले ISI के जासूसी नेटवर्क में कम से कम 10 से 12 लोग हो सकते हैं। पाकिस्तान जानता है, कि अगर ये जासूस पकड़े गए, तो उसकी कूटनीतिक बेइज़्ज़ती होना तय है। यही वजह है, कि ISI के लिए जासूसी करने वाले पाकिस्तानी हाईकमीशन के 4 अफ़सरों को बचाने के लिए, पाकिस्तान उन्हें वापस बुला सकता है।