ZEE जानकारी: पायलट इस फाइटर प्लेन को बहादुर क्यों कहते हैं?

34 वर्षों तक भारतीय वायुसेना की सेवा करने के बाद आज बहादुर रिटायर हो गया.

ZEE जानकारी: पायलट इस फाइटर प्लेन को बहादुर क्यों कहते हैं?

34 वर्षों तक भारतीय वायुसेना की सेवा करने के बाद आज बहादुर रिटायर हो गया. मिग 27 Fighter Plane को उड़ाने वाले Pilots इस विमान को प्यार से बहादुर बुलाते थे. रिटायरमेंट के बाद अक्सर लोग भुला दिए जाते हैं. लेकिन हमारा देश वायुसेना के इस बहादुर योद्धा को भूल नहीं पाएगा. इसलिए आज हम मिग 27 Fighter Plane की रिटायरमेंट का एक DNA टेस्ट करेंगे. वायुसेना की परंपरा के मुताबिक जब भी कोई लड़ाकू विमान अपनी पहली या आखिरी उड़ान भरता है तो उसे Water Cannon Salute दिया जाता है . यानी पानी की बौछार से उस विमान का स्वागत होता है या फिर विदाई दी जाती है. आज मिग 27 विमान को भी Water Cannon Salute दिया गया है. पहले आप इस Water Cannon Salute को देखिए इसके बाद हम मिग 27 Aircraft के संग्राम से विश्राम तक के जीवन का एक सुपरसोनिक विश्लेषण करेंगे.

भारतीय वायुसेना का मिग 27 Fighter Plane आज रिटायर हो गया है. वर्ष 1985 में इसे भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था. पर आज राजस्थान के जोधपुर एयरबेस से इसे विदाई दे दी है. आज जोधपुर एयरबेस से 7 विमानों ने उड़ान भरी. ये Fighter विमान, Indian Air Force की 'Squadron नंबर 29' का हिस्सा थे. इस Squadron में कुल 15 विमान थे जो अब रिटायर हो गए हैं. और ये मिग 27 को उड़ाने वाली वायुसेना की आखिरी Squadron थी.

Squadron वायुसेना का वो अंग या Operational Unit होती है, जिसमें कम से कम दो Aircrafts और उसे उड़ाने वाले पायलट शामिल होते हैं. भारत में एक Squadron में आमतौर पर 16 से 18 Fighter Planes होते हैं. 1975 में Russia में तैयार किए गए मिग 27 को वर्ष 1985 में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था. इसे Russian कंपनी Mikoyan(मिकायान)  Gurevich(गुरेविच) ने बनाया था.

हमारे देश में Hindustan Aeronautics Limited को Russia से इस विमान के License Production का अधिकार मिला था. और इसके तहत ऐसे 165 विमानों का निर्माण किया गया था . मिग 27 की खासियत थी जमीन के Target पर हमला करने की इसकी बेहतरीन काबिलियत . इस Fighter Plane की Technology, Russia के ही एक और विमान 'मिग 23' पर आधारित थी .

भारत ने 3 दशकों के बाद इसे De-Commission करने का फैसला किया. आज मिग 27 ने अपनी आखिरी उड़ान भरी. इस विमान को उड़ा चुके भारतीय Pilots के लिए ये एक भावुक करने वाली तस्वीर थी.

अब ये समझिए कि इस फाइटर एयरक्राफ्ट को रिटायर क्यों किया गया. वर्ष 2005 में 40 मिग 27 विमानों को Upgrade किया गया था. लेकिन मौजूदा दौर में, भारतीय वायुसेना को इन Fighter Jets की देखरेख में काफी परेशानियां आ रहीं थीं. मिग 27 को रिटायर करने की एक बड़ी वजह थी इसकी Maintenance में आने वाली समस्या. इस विमान के Spare Parts के लिए हमारी वायुसेना Russia पर निर्भर थी लेकिन समय पर ये Spare Parts नहीं मिल रहे थे. और इसलिए पिछले 31 वर्षों में 57 मिग 27 विमान दुर्घटनाग्रस्त हुए हैं. इस हिसाब से हर वर्ष करीब 2 विमान Crash हुए .

हमारी वायुसेना में इससे भी ज्यादा पुराने मिग 21 विमान मौजूद हैं. 60 के दशक में ये विमान भारतीय वायुसेना में शामिल हुआ था. मिग 27 से पुराने होने के बाद भी. मिग 21 के 4 Squadron देश की रक्षा कर रहे हैं. इसकी एक वजह ये है कि भारत में इसके अधिकतर Spare Parts बनाए जा रहे हैं. इसलिए इनका Maintenance हो पाता है. यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि इस विमान ने हर मुश्किल परिस्थिति में भारत की मदद की है. अब दुनिया भर में सिर्फ Kazakhstan की एयर फोर्स ही इन विमानों को इस्तेमाल कर रही है.

अब आपको इस विमान का गौरवशाली इतिहास देखना चाहिए. इसलिए हमने Zee News की लाइब्रेरी से इस Fighter Jet की दुर्लभ तस्वीरें निकाली हैं. वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध में इसने पाकिस्तानी सैनिकों पर अचूक हमला किया था. 26 मई 1999 को वायुसेना ने ऑपरेशन सफेद सागर शुरु किया था. इसी ऑपरेशन के दौरान मिग 27 ने कारगिल की पहाड़ियों पर बने पाकिस्तानी घुसपैठियों के ठिकानों पर Rockets से निशाना लगाकर उन्हें नष्ट कर दिया था. उस समय भारतीय वायुसेना के लिए ये एक नया रिकॉर्ड था. क्योंकि उतनी ऊंचाई पर कभी किसी Fighter Plane से हमला नहीं किया गया था. मिग 27 की शक्ति का ट्रेलर टाइगर हिल और तोलोलिंग जैसी पहाड़ियों में पाकिस्तानी अड्डों में छिपे घुसपैठियों ने भी देखा था. इसके हवाई हमले में सैकड़ों पाकिस्तानी घुसपैठिए मारे गए थे. मिग 27 के ऐसे ही कारनामों की वजह से इसका नाम 'बहादुर' रखा गया था. हालांकि इसी दौरान बटालिक सेक्टर में हुई कार्रवाई में मिग 27 फ्लाइट लेफ्टिनेंट K नचिकेता को विमान क्षतिग्रस्त होने के बाद पाकिस्तानी इलाके में उतरना पड़ा था. तब उन्हें पाकिस्तानियों ने बंदी बना लिया था.

अब मिग 27...Fighter Plane भले ही रिटायर हो चुका हो. लेकिन इसकी खूबियों के कारण इसे भारतीय वायुसेना के सबसे क़ाबिल और ताकतवर Fighter Jets की श्रेणी में याद रखा जाएगा. एक Engine वाले इस विमान की Top Speed आवाज़ की रफ्तार से डेढ़ गुनीयानी 1700 किलोमीटर प्रतिघंटा थी. और ये एक उड़ान में 4 हजार किलोग्राम तक गोला बारूद ले जा सकता था. ये विमान कम ऊंचाई पर उड़ान भरते हुए दुश्मन के रडार से बचकर हमला कर सकता था. और जमीन के करीब उड़ान के दौरान भी इसकी रफ्तार बहुत तेज होती थी.
 
लगभग सभी फाइटर एयरक्राफ्ट्स के Wings, यानी पंख स्थिर होते हैं. लेकिन ये भारतीय वायुसेना का एकमात्र विमान था जिसमें Swing-Wing थे. यानी इसके पंख हवा में जरूरत अनुसार मुड़ सकते थे. Swing-Wing की मदद से ये विमान अपने पंखों को जरूरत के मुताबिक आगे और पीछे कर सकता है. इसको आसानी से समझने के लिए आप किसी पक्षी की उड़ान से तुलना कर सकते हैं. जब कोई शिकारी पक्षी किसी शिकार पर उड़ते हुए हमला करता है तो वो अपने पंखों को पीछे की तरफ़ सिकोड़ लेता है इससे उसे तेज़ रफ्तार मिलती है. वहीं जब वो ज़मीन पर उतरता है तो वो अपने पंखों को फैला लेता है जिससे उसे उतरने में मदद मिलती है. मिग 27 में भी यही खूबी थी. इस एयरक्राफ्ट को कई Pilots समय के लिहाज़ से बूढ़ा शेर भी कहते थे.

शायद आप सोच रहे होंगे कि रिटायर होने के बाद इन विमानों का क्या होता है?
तो जान लीजिए कि वायुसेना का ये वीर रिटायर होने के बाद भी देश के काम आएगा . इन मिग 27 के विमानों से उन हिस्सों और पुर्ज़ों को निकाल लिया जाएगा जिनका कहीं और इस्तेमाल हो सकता है. इसके बाद उन विमानों को महत्वपूर्ण सैनिक और शिक्षण संस्थानों में रखा जाएगा. ताकि दूसरे लोगों को भी देश की सेवा करने की प्रेरणा मिले.

मिग 27 की रिटायरमेंट का असर भारतीय वायुसेना की 'Squadron नंबर 29' पर भी पड़ेगा. अब इस Squadron को Numberplated(नंबरप्लेटेड) कर दिया जाएगा. यानी जब तक इस Squadron को नए एयरक्राफ्ट नहीं मिलेंगे तब तक इसे निलंबित रखा जाएगा. 'Squadron नंबर 29' को Scorpions के नाम से भी जाना जाता है. वायुसेना के सूत्रों के मुताबिक इस Squadron को अगले साल सुखोई 30 MKI विमान मिलेंगे और ये दोबारा दुश्मनों को डंक मारने के लिए तैयार हो जाएगी.

भारतीय वायु सेना की ताक़त से आप अच्छी तरह से परिचित हैं. आज ये दुनिया की चौथी सबसे ताकतवर वायुसेना है जिसके पास 1 लाख 40 हज़ार जवान हैं और 2 हज़ार से ज़्यादा Aircrafts की ताक़त है. अपनी सुरक्षा की चुनौतियों का सामना करने के लिए, भारत को कम से कम 42 Squadron चाहिए. लेकिन लम्बे समय से वायुसेना की ज़रुरतों को अनदेखा करने की वजह से, अब ये सिर्फ 28 रह गई हैं.