मंदिर में प्रार्थना करते हुए घायल हुए कांग्रेस नेता शशि थरूर, सिर में लगे 6 टांके

शशि थरूर एक बार फिर तिरुवनंतपुरम से किस्मत आजमा रहे हैं. उनके सामने बीजेपी के कुम्मनम राजशेखरन और सीपीआई केसी दिवाकरन मैदान में है.

मंदिर में प्रार्थना करते हुए घायल हुए कांग्रेस नेता शशि थरूर, सिर में लगे 6 टांके
फोटो साभारः ट्विटर @ShashiTharoor

तिरुवनंतपुरमः लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha elections 2019) चुनाव के प्रचार में जुटे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर के घायल होने की खबर है. ऐसा बताया जा रहा है कि थरूर तिरुवनंतपुरम में अपने चुनावी कार्यक्रम के दौरान मंदिर में प्रार्थना करने के लिए पहुंचे थे, इसी दौरान उन्हें चोट लग गई. शशि थरूर को तुरंत पास के जनरल अस्पताल में भर्ती कराया गया. थरूर के सिर में चोट लगी, उनके सिर में 6 टांके लगे हैं. डॉक्टरों का कहना है कि वह खतरे से बाहर हैं. शशि थरूर एक बार फिर तिरुवनंतपुरम से किस्मत आजमा रहे हैं. उनके सामने बीजेपी के कुम्मनम राजशेखरन और सीपीआई केसी दिवाकरन मैदान में है.

तुलाभारम के संस्कार के दौरान लगी चोट
केरल के रीति-रिवाजों के मुताबिक तुलाभारम का संस्कार मंदिरों में होता है. इसमें तराजू के एक पलड़े में व्यक्ति को बैठाया जाता है और दूसरे पलड़े में किसी वस्तु को रखा जाता है. इन वस्तुओं में लड्डू, मिठाई, फल, सिक्के आदि हो सकते हैं. जिस वक्त यह संस्कार चल रहा था उसी दौरान तराजू की चेन टूट गई और कांग्रेस नेता के सिर में चोट लग गई. शशि थरूर अपने प्रचार अभियान के दौरान ऐसे कई कार्यक्रमों में लगातार शिरकत करते रहे हैं. 


फोटो साभारः ट्विटर @ShashiTharoor

11 अप्रैल को ही उन्होंने ऐसे ही किसी कार्यक्रम की तस्वीरें अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर की थी.

थरूर को नहीं मिल रहा है स्थानीय नेताओं का साथ?
रविवार (14 अप्रैल) को कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि तिरुवनंतपुरम में एक विशेष पर्यवेक्षक नियुक्त करने का कांग्रेस का निर्णय प्रमुख निर्वाचन क्षेत्रों में चुनावी गतिविधियों की निगरानी करने के लिए है. वरिष्ठ नेता नाना पटोले को तिरुवनंतपुरम निर्वाचन क्षेत्र में पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया गया है जहां से पार्टी उम्मीदवार शशि थरूर चुनाव लड़ रहे हैं. उन्होंने मीडिया में आयी उन खबरों का जिक्र किया कि थरूर ने स्थानीय नेताओं द्वारा चुनाव क्षेत्र में उनके लिए चुनाव प्रचार नहीं करने के बारे में कांग्रेस से शिकायत की थी और कहा कि “ये सिर्फ अफवाहें थीं.’’ 

प्रधानमंत्री ने सबरीमला श्रद्धालुओं को ‘‘धोखा’’ किया :कांग्रेस
केरल में विपक्षी कांग्रेस ने रविवार (14 अप्रैल) को सबरीमला मुद्दे पर बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला करते हुए कहा कि लोग भगवान अयप्पा के नाम पर भगवा पार्टी द्वारा किये जा रहे 'नाटक' को बर्दाश्त नहीं करेंगे और श्रद्धालुओं से ‘‘धोखा’’ किया गया है. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव (संगठन) के सी वेणुगोपाल ने मोदी और बीजेपी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी ने श्रद्धालुओं से ‘‘धोखा’’ किया है और वे ‘‘सबरीमला के लिए तभी ईमानदार होते हैं, जब चुनाव और मतदान आता है.’’ 

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने आरोप लगाया कि सबरीमला मुद्दे को बिगाड़ने में केंद्र और राज्य दोनों की मिलीभगत थी. उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री सबरीमला पर नाटक क्यों कर रहे हैं? मैंने चार जनवरी को संसद में मामला उठाया था. मैंने श्रद्धालुओं के अधिकारों की रक्षा के लिए विधायी हस्तक्षेप की मांग की थी.’’  वेणुगोपाल ने सवाल किया, ‘‘क्या प्रधानमंत्री या उनके मंत्री ने संसद में इस मुद्दे पर एक भी शब्द बोला?’’ 

'सबरीमाला मुद्दे पर तीन तलाक की तरह का उत्साह क्यों नहीं दिखाया'
कांग्रेस नेता ने यह भी उल्लेख किया कि एनडीए तीन तलाक पर निष्प्रभावी हो गए विधेयक को फिर से लागू करने के लिए अध्यादेश लाया. उन्होंने सवाल किया कि सबरीमला के मामले में उस तरह का उत्साह क्यों नहीं था. वेणुगोपाल ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘एक अध्यादेश पर्याप्त होता. केंद्र विश्वास के नाम पर हस्तक्षेप कर सकता था. लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया.’’ 

मोदी ने कहा कि उनकी पार्टी और सरकार सबरीमला की परंपराओं को समझाते हुए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी. वे ऐसा बहुत पहले कर सकते थे. लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. लोग हर तरह के नाटक को बर्दाश्त कर लेंगे लेकिन चुनावी नाटक के लिए स्वामी अयप्पा के नाम का इस्तेमाल करना सीमा से परे है.’’ उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने सबरीमला मामले पर विधायी हस्तक्षेप के लिए आधिकारिक तौर पर संसद में कहा है. 

केरल की वाम सरकार को भी घेरा
वेणुगोपाल ने रविवार को राज्य में वाम सरकार पर हमला करते हुए कहा कि यह उच्चतम न्यायालय के फैसले को लागू करने के लिए समय मांग सकती थी लेकिन ऐसा नहीं किया. उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘आरएसएस/ संघ परिवार ने पहाड़ी मंदिर में शांति भंग करने की कोशिश की. ईमानदार श्रद्धालुओं को प्रार्थना करने के उनके अधिकारों से वंचित किया गया. स्थिति को और खराब करने में राज्य और केंद्र सरकार की मिलीभगत थी. सबरीमला मुद्दे को बिगाड़ने के लिए दोनों सरकारें जिम्मेदार थीं.’’