लोकसभा चुनाव 2019: बांदा में 30 सालों से जीत को तरसी कांग्रेस, लेफ्ट का भी रहा यहां कब्जा

साल 1967 में वामपंथी दल सीपीआई ने पहली बार और साल 1989 में दूसरी बार जीत हासिल करने में कामयाब रही.

लोकसभा चुनाव 2019: बांदा में 30 सालों से जीत को तरसी कांग्रेस, लेफ्ट का भी रहा यहां कब्जा
बांदा लोकसभा सीट पर पहली बार साल 1957 में लोकसभा चुनाव हुए.

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश का का बांदा जिला चित्रकूट मंडल का हिस्सा है, जो मध्यप्रदेश से सटा है. बांदा लोकसभा को नाम महर्षि वामदेव के नाम से मिला. बांदा जिला चित्रकूट मंडल का हिस्सा है. इस शहर से लगे चित्रकूट और कालिंजर को देखने के लिए सैकड़ों की संख्या में सैलानी आते हैं. साल 2014 के चुनाव में मोदी लहर ने इस सीट को बीजेपी के पाले में डाला था. 

2014 में ऐसा था लोगों का मत
साल 2014 के चुनावों में इस सीट पर बीएसपी दूसरे, सपा तीसरे और कांग्रेस चौथे नंबर पर रही थी. साल 2014 में यहां पर 16,01,855 मतदाताओं ने अपने मतों का इस्तेमाल किया था. बांदा की 77 प्रतिशत आबादी हिंदू और 21 प्रतिशत जनसंख्या मुस्लिमों की है.

 

ऐसा है राजनीतिक इतिहास
बांदा लोकसभा सीट पर पहली बार साल 1957 में लोकसभा चुनाव हुए और राजा दिनेश सिंह सांसद चुने गए. साल 1967 में भी कांग्रेस ने यहां से जीत दर्ज की. लेकिन साल 1967 में वामपंथी दल सीपीआई ने कांग्रेस की जीत की हेट्रिक नहीं होने दी और जागेश्वर सांसद बनकर लोकसभा में पहुंचे. साल 1971 में पहली बार जनसंघ अपना खाता यहां से खोला. साल 1977 में लोकदल के अंबिका प्रसाद ने जीत हासिल की. 1980 में हुए चुनावों में कांग्रेस ने फिर इस सीट पर वापसी की. साल 1984 में भी कांग्रेस लोगों का मन जीत पाई. साल 1989 में सीपीआई दूसरी बार जीत हासिल करने में कामयाब रही. 1991 में पहली बार बीजेपी कमल खिलाने में कामयाब रही. साल 1996 में बीएसपी के राम सजीवन सिंह सांसद बने. 1999 में एक बार फिर बीएसपी ने जीत दर्ज की. साल 2004 के लोकसभा चुनाव में सपा के श्यामाचरण गुप्ता ने विजयी पताका लहराया. साल 2009 में फिर सपा ने इस सीट से जीत दर्ज की और आरके पटेल सांसद बने. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर पर सवार बीजेपी के टिकट पर भैरो प्रसाद मिश्रा यहां से सांसद चुने गए.