डायमंड हार्बर लोकसभा सीट: खत्म हो गई वामपंथ की धमक, दोबारा परचम लहराने की कवायद में TMC

 पहले आम चुनाव लेकर 16वें लोकसभा चुनाव तक इस सीट पर सिर्फ पांच बार मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) से इतर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस जीत पाई हैं.

डायमंड हार्बर लोकसभा सीट: खत्म हो गई वामपंथ की धमक, दोबारा परचम लहराने की कवायद में TMC
फाइल फोटो.

नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल की डायमंड हार्बर लोकसभा सीट किसी जमाने में वामपंथी दलों का गढ़ मानी जाती थी. अंग्रेजों के जमाने में इसी स्थान पर बंदरगाह हुआ करता था, लेकिन आज डायमंड हार्बर में कोई भी बंदरगाह नहीं है. वक्त और व्यवस्था बदलने के साथ ही देश-विदेश के व्यापार का केंद्र होने का गौरव डायमंड हार्बर अब उसी तरह खो चुका है जिस तरह यह कभी वामपंथ का गढ़ हुआ करता था. 

2014 में तृणमूल कांग्रेस ने दर्ज की जीत
2014 के लोकसभा चुनावों में इस सीट से तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बनर्जी ने जीत दर्ज़ की थी. कहा जाता है कि अभिषेक बनर्जी को ममता बनर्जी के परिवार के सदस्य होने का भी इस सीट से फायदा मिला था. पहले आम चुनाव लेकर 16वें लोकसभा चुनाव तक इस सीट पर सिर्फ पांच बार मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) से इतर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस जीत पाई हैं.

2011 की जनगणना के अनुसार, डायमंड हार्बर संसदीय क्षेत्र की आबादी 2221470 है जिनमें 49.07% लोग गांवों में रहते हैं और 50.93% जनसंख्या शहरी है. 2014 के आम चुनावों में यहां 81.07% मतदान हुए थे. इस संसदीय सीट के अंतर्गत 7 विधानसभा सीटें आती हैं, जिनमें डायमंड हार्बर, फलता, सतगछिआ, बिष्णुपुर, महेशतला, बुडगे और मेटियाबुरुज शामिल हैं. 

किसके बीच है मुकाबला
2014 के आम चुनावों की तरह एक बार फिर इस सीट पर तृणमूल कांग्रेस और माकपा के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है, हालांकि बीजेपी की धमक के बाद मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है, जिसके बाद किसी भी पार्टी के जीतने के कयास लगाना मुश्किल है.