लोकसभा चुनाव 2019: खीरी में 2014 की जीत को क्या फिर दोहरा पाएंगी BJP!

साल 2012 में अजय कुमार निघासन विधानसभा सीट से विधायक चुने गए. इसके बाद 2014 में उन्होंने लोकसभा का चुनाव लड़ा और सांसद चुने गए. 

लोकसभा चुनाव 2019: खीरी में 2014 की जीत को क्या फिर दोहरा पाएंगी BJP!
इस सीट को लखीमपुर खीरी के नाम से भी जाना जाता है.

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की 28वीं लोकसभा सीट खीरी है. साल 2014 में बीजेपी ने इस सीट पर कब्जा किया. इस सीट को लखीमपुर खीरी के नाम से भी जाना जाता है. इसको पुराना नाम लक्ष्मीपुर है. खीरी में पाए जाने वाले खीर के पेड़ों की वजह से इसका नाम खीरी पड़ा. ये लोकसभा सीट मेंढक के मंदिर के लिए दुनिया भर मशहूर है, जो भगवान शिव को समर्पित हैं. देशभर में प्रसिद्ध दुधवा राष्ट्रीय पार्क भी यहीं है. बसपा-सपा गठबंधन के बाद इस बार खीरी सीट पर चुनाव दिलचस्प हो गया है. यहां से सांसद अजय कुमार मिश्रा का राजनीतिक सफर ज्यादा लंबा नहीं है. साल 2012 में अजय कुमार निघासन विधानसभा सीट से विधायक चुने गए. इसके बाद 2014 में उन्होंने लोकसभा का चुनाव लड़ा और दिल्ली की संसद तक सांसद बनकर पहुंचे. 

साल 2014 का समीकरण
उत्तर प्रदेश के खीरी लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद भारतीय जनता पार्टी के अजय कुमार मिश्र हैं. साल 2014 के चुनाव में बीजेपी ने बीएसपी के उम्मीदवार को 1,10,274 वोटों से हराया था. साल 2014 के चुनाव में यहां बीएसपी दूसरे, कांग्रेस तीसरे और सपा चौथे नंबर पर रही थी.

क्या है राजनीतिक इतिहास
आजादी के बाद इस सीट पर 1957 में पहली बार लोकसभा चुनाव हुए और सोशलिस्ट पार्टी ने जीत दर्ज की. साल 1962 से 1971 तक यहां कांग्रेस का इस सीट पर कब्जा रहा. आपातकाल के बाद साल 1977 में जब चुनाव हुए तो कांग्रेस को यहां नुकसान उठाना पड़ा और भारतीय लोकदल ने यहां पर जीत दर्ज की. साल 1980, 1984, 1989 में कांग्रेस बड़े अंतर से जीती थी. साल 1990 के दौर में चले मंदिर आंदोलन ने यहां भारतीय जनता पार्टी को भी फायदा पहुंचाया और साल 1991 और 1996 में यहां से बीजेपी चुनाव जीता. 1998, 1999 और 2000 के चुनाव में समाजवादी पार्टी यहां से लगातार तीन बार चुनाव जीता. साल 2009 के लोकसभा चुनाव में यहां पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की और साल 2014 में ये सीट भी मोदी लहर के साथ बीजेपी की झोली में जा पहुंची.

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