close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

लोकसभा चुनाव 2019 : बहुत कठिन है श्रीनगर की डगर

जम्मू-कश्मीर देश का इकलौता ऐसा राज्य है, जहां दो किस्म की सियासत सांस लेती है. एक जम्मू की और एक घाटी, यानी कश्मीर की. 

लोकसभा चुनाव 2019 : बहुत कठिन है श्रीनगर की डगर
फाइल फोटो

नई दिल्ली : जम्मू कश्मीर की श्रीनगर लोकसभा सीट पर इस बार मुकाबला काफी अहम है. इस बार चुनावों में नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी के मुखिया फारूक अब्दुल्ला, बीजेपी से शेख खालिद जहांगीर रण में हैं. वहीं, पीडीपी ने सैयद मोहसिन पर दावा खेला है. जम्मू कश्मीर में पुलवामा हमले के बाद पूरे देश में राष्ट्रवाद की लहर है. ऐसे में बीजेपी को पूरे कयास है कि वो इस सीट से जीत दर्ज कर ही लेगी, लेकिन फारूख अब्दुल्ला को भी अपनी जीत पर पूरा भरोसा है. 

जम्मू-कश्मीर देश का इकलौता ऐसा राज्य है, जहां दो किस्म की सियासत सांस लेती है. एक जम्मू की और एक घाटी, यानी कश्मीर की. श्रीनगर के गुपकार रोड (जहां सभी सियासी आकाओं का ठिकाना है) की नब्ज दिल्ली से तय होती है और डोगराओं के जम्मू की पॉलिटिक्स कश्मीरियत से गुलजार घाटी से. श्रीनगर लोकसभा सीट, जम्मू और कश्मीर की महत्वपूर्ण सीटों में से एक है. सूबे की राजधानी की इस लोकसभा सीट से पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला सांसद हैं. 

वह 2017 के उपचुनाव में जीते थे. 2014 के आम चुनाव के दौरान फारूक अब्दुल्ला को पीडीपी के तारिक हमीद कर्रा ने करारी शिकस्त दी थी. 2016 में हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादी बुरहान वानी की हत्या के बाद भड़की हिंसा के दौरान लोगों पर हुए कथित अत्याचार के विरोध में हामिद कर्रा ने इस्तीफा दे दिया था. ऐसे में अब्दुल्ला को उम्मीद है कि वह इन चुनावों में भी परचम लहराएंगें. वहीं, बीजेपी को उम्मीद है कि वह राष्ट्रवाद के मुद्दे से ही घाटी की राजनीति में फतह करेगी.