क्राइम रिपोर्टर: दिल्‍ली मेट्रो स्‍टेशनों के कमरे बने `अय्याशी के अड्डे`

दिल्ली की शान है दिल्ली मेट्रो। देश की पहली और सबसे आधुनिक मेट्रो अब तक के सबसे आरामदायक और सुरक्षित सफर के लिए भी मानी जाती है। लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि मेट्रो की साफ-सफाई और उसके इंतजामों के बीच सुरक्षा में सेंध लग रही है। मेट्रो के स्टेशन कपल्स के लिए मीटिंग और डेटिंग ही नहीं, शारीरिक संबंधों की जगह भी बन चुके हैं।

क्राइम रिपोर्टर, ज़ी मीडिया
दिल्ली की शान है दिल्ली मेट्रो। देश की पहली और सबसे आधुनिक मेट्रो अब तक के सबसे आरामदायक और सुरक्षित सफर के लिए भी मानी जाती है। लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि मेट्रो की साफ-सफाई और उसके इंतजामों के बीच सुरक्षा में सेंध लग रही है। मेट्रो के स्टेशन कपल्स के लिए मीटिंग और डेटिंग ही नहीं, शारीरिक संबंधों की जगह भी बन चुके हैं।
ज़ी मीडिया की क्राइम एंड इन्वेस्टिगेशन टीम को जब इस बात की जानकारी मिली तो शुरुआत में हमें भी यकीन नहीं हुआ लेकिन जब दिल्ली के मेट्रो स्टेशनों की रिएलिटी चेक शुरू किया गया तो ये बात सौ फीसदी सच साबित हुई।
मेट्रो स्टेशनों पर तैनात फॉर्थ क्लास कर्मचारी मेट्रो के प्रशासनिक कामों और जनसुविधाओं के लिए बने कमरों को किराए पर देने का काम कर रहे हैं। ऑन डिमांड मेट्रो स्टेशनों पर बॉथरुम, टॉयलेट और विकलांगों के लिए बनाए गए विशेष सुविधा कक्ष को कुछ इस तरह से तब्दील कर दिया जाता है कि वो यौन जोड़ों के लिए इंटिमेट मोमेंट्स के प्वाइंट बन सकें। इसके लिए युवा जोड़ों के हाव-भाव को देखकर उनसे किराया भी वसूला जाता है। एक घंटे का किराया 500 रुपए तक हो सकता है। ऐसा किसी एक स्टेशन पर नहीं, बल्कि ज्‍यादातर मेट्रो स्टेशन्स पर हो रहा है।
राजधानी पार्क मेट्रो स्टेशन-
रिपोर्टर : कमरा मिल जाएगा।
मेट्रो स्टाफ : कमरा कब के लिए चाहिए?
रिपोर्टर : गर्लफ्रेंड साथ में है, कब मिल पाएगा?
मेट्रो स्टाफ : कल मिल जाएगा, 200 रुपये लगेंगे।
रिपोर्टर- यहां कोई आएगा तो नहीं?
मेट्रो स्टाफ : यहां कोई नहीं आएगा, कुंडी बंद कर लेना, बस शोर मत करना।
यही हाल रेस कोर्स मेट्रो स्टेशन, अशोक पार्क मेट्रो स्टेशन, ग्रीन पार्क मेट्रो स्टेशन, मादीपुर मेट्रो स्टेशन और ज़ोरबाग मेट्रो स्टेशन का भी था।

सुरक्षा में संकट बन सकते हैं लालची कर्मचारी
जिस तरह से महज़ 500 रुपए के लिए मेट्रो स्टेशनों के कर्मचारी अपने बॉथरुम, टॉयलेट्स और रुम्स को युवा जोड़ों को किराए पर दे सकते हैं] उससे मेट्रो का सुरक्षा घेरा टूट सकता है। क्या हुआ अगर आतंकी संगठन क्लिनिंग स्टाफ के लालच को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर लिया। दिल्ली पुलिस और सीआईएसएफ दोनों इसे सुरक्षा में बड़ी चूक मानते हैं।
मेट्रो एंड रेलवे के ज्वाइंट सीपी मुकेश कुमार मीणा के अनुसार, मेट्रो स्टेशनों पर पैसे लेकर युवा जोड़ों को कमरे उपलब्ध कराने की बात से मेट्रो की साख को बट्टा लगा है। दिल्ली पुलिस ने मामले की जांच करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के आदेश दे दिए हैं।

नोट : अगर आप भी किसी ग़ुनाह की जानकारी रखते हैं तो ज़ी मीडिया की क्राइम एंड इन्वेस्टिगेशन टीम को crime@zeemedia.esselgroup.com पर संपर्क करें।