लखनऊ में 21 स्टेशनों से गुजरेगी मेट्रो ट्रेन

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मेट्रो रेल चलाने का रास्ता साफ हो गया है। पहले चरण में अमौसी एयरपोर्ट से इंदिरानगर क्षेत्र में मुंशी पुलिया तक नार्थ-साउथ कारीडोर के 23 किमी. के क्षेत्र में दौड़ेगी। कैबिनेट ने इस रूट और मेट्रो निर्माण के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मेट्रो रेल चलाने का रास्ता साफ हो गया है। पहले चरण में अमौसी एयरपोर्ट से इंदिरानगर क्षेत्र में मुंशी पुलिया तक नार्थ-साउथ कारीडोर के 23 किमी. के क्षेत्र में दौड़ेगी। कैबिनेट ने इस रूट और मेट्रो निर्माण के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
इसका निर्माण दिल्ली में डीएमआरसी पद्धति पर होगा। इसी वर्ष नवंबर से मेट्रो का कार्य जमीन पर दिखने लगेगा। राजधानी के निवासियों को यातायात की सुगम व सुचारु व्यवस्था मुहैया कराने के लिए एयरपोर्ट से चारबाग, विधानसभा, हजरतगंज, लखनऊ विश्वविद्यालय, आईटी चैराहा, पालीटेक्निक चैराहा से होकर मेट्रो मुंशी पुलिया तक जाएगी। मेट्रो इस रूट पर चारबाग से स्टेडियम (डीएम बंगले तक) के निकट तक भूमिगत चलेगी। उसके बाद उसे ऐलीवेटेड चलाया जाएगा।
लखनऊ में मेट्रो रेल के लिए दिल्ली मेट्रो के लिए केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए मेट्रो रेलवे अधिनियम 1978 यथा संशोधित 2009 तथा मेट्रो रेलवे अधिनियम 2002 को अंगीकृत किया जाएगा। परियोजना की लागत का 40 फीसद खर्च केंद्र व राज्य सरकार वहन करेगी। शेष 60 फीसद राशि के लिए भारत सरकार के जरिए जापानी वित्तीय संस्था जायका से 0.10 प्रतिशत ब्याज की दर से ऋण हासिल करने के प्रयास होंगे। इस तरह का ऋण लेने में करीब एक साल लग सकता है। तब तक मेट्रो के कार्य के लिए राज्य सरकार के बजट से व्यवस्था की जाएगी। इसका नाम लखनऊ मेट्रो रेल कारपोरेशन रखा जाएगा। इसकी अलग कंपनी होगी।
मेट्रो निर्माण के लिए पहले सलाहकार नियुक्त होंगे। डीएमआरसी के विशेषज्ञों तथा अन्य इस क्षेत्र में कार्य करने में अन्य दक्ष लोगों का भी सहयोग लिया जाएगा। मेट्रो निर्माण के लिए जापान या अन्य दूसरे राष्ट्रों से बिडिंग के जरिए तकनीकी सहयोग भी लिया जा सकता है। चारबाग के मवैया में मेट्रो के लिए करीब 96 मीटर का एक पुल बनेगा। राजाजीपुरम से लेकर लोहियापथ होते हुए गोमती नदी तक हैदर कैनाल नाले को भी मेट्रो के इस्तेमाल करने पर विशेषज्ञों से विचार-विमर्श किया जाएगा। पुराने शहर में अभी मेट्रो को ले जाने के लिए फिर से डीपीआर तैयार कराई जाएगी।
प्रमुख सचिव सदाकांत ने बताया कि पुराना शहर घना होने के कारण वहां ऐलीवेटेड मेट्रो संचालन संभव नहीं होगा। ऐसे में वहां भूमिगत मेट्रो बनानी पड़ेगी। मेट्रो परियोजना के लिए सरोजनी नगर क्षेत्र में 32वीं वाहिनी पीएसी के पीछे हिस्से में करीब 75 एकड़ सरकारी भूमि मौजूद है। शेष ग्राम समाज की भूमि भी ली जा सकती है। यहां पर मेट्रो का डिपो निर्माण हो सकता है। पीएसी को मोहनलालगंज क्षेत्र में नयी जेल के पास भूमि देकर जरूरी निर्माण कराए जा सकते हैं।
लखनऊ में मेट्रो रेल के कुल 21 स्टेशन होंगे। इनमें तीन भूमिगत और 18 जमीन के ऊपर यानी एलिवेटेड स्टेशन बनेंगे। मेट्रो के लिए लखनऊ मेट्रो रेल कारपोरेशन नाम से स्पेशल पर्पज व्हीकल का गठन किया जाएगा। इसके लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया गया है। उम्मीद की जा रही है कि अगले तीन से पांच साल के भीतर सपनों की रेल शुरू हो जाएगी। डीएमआरसी के डीपीआर में दो कॉरिडोर नॉर्थ-साउथ और ईस्ट-वेस्ट बनाने का प्रस्ताव था। पहले चरण में नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर का निर्माण और संचालन किया जाना है। इसमें 7.02 किमी भूमिगत ट्रेन चलाने का प्रस्ताव दिया गया था लेकिन आवास विभाग और डीएमआरसी की बातचीत के बाद इसे घटाकर 4.2 किमी कर दिया गया। इससे करीब एक हजार करोड़ रुपये की बचत होगी।
स्टॉपेज टाइम मिला कर मेट्रो रेल की रफ्तार 34 किमी प्रति घंटा होगी। हर किमी पर करीब दो मिनट के स्टॉपेज को मिला कर यह स्पीड होगी। यानी कि ट्रैक पर ट्रेन करीब 45 किमी प्रति घंटा की रतार से दौड़ेगी। पहले चरण में नॉर्थ साउथ कॉरिडोर में रतार 34 किलोमीटर प्रति घंटा होगी जबकि ईस्ट वेस्ट कॉरिडोर में यह रतार 32 किमी प्रति घंटा रह जाएगी। योजना के तहत सबसे पहले नॉर्थ साउथ कॉरिडोर का ही संचालन किया जाना है।
32वीं वाहिनी पीएसी सरोजनी नगर में मेट्रो के मदर डिपो के लिए जमीन तय की गई है। जिला प्रशासन ने 80 एकड़ जमीन फाइनल कर दी है। इस भूमि में 50 एकड़ पर डिपो बनेगा जबकि 30 एकड़ का इस्तेमाल लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन अन्य सुविधाओं को विकसित करने के लिए करेगी। (एजेंसी)