चाइनीज उत्पादों का बहिष्कार करने के बाद अब चीन के खिलाफ बड़े एक्शन की तैयारी!

कई चीनी कंपनियां जिनमें Huawei शामिल है. ये चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) से जुड़े हुए हैं.

चाइनीज उत्पादों का बहिष्कार करने के बाद अब चीन के खिलाफ बड़े एक्शन की तैयारी!

नई दिल्ली: एक तरफ जहां ग्लोबल लीडर के तौर पर जाने जानी वाली चीन की कंपनी हुवावे (Huawei) , 5G मोबाइल टेक्नोलॉजी से जुड़े इक्विपमेंट को लेकर भारतीय बाजार में उतरने की तैयारी में है. वहीं दूसरी तरफ Huawei और ZTE जैसे चीनी फर्म्स को प्रतिबंधित करने की मांग देश में बढ़ती जा रही है. 

हाल ही में सीमा पर भारत और चीन के बीच तनाव बढ़ने के बाद भारत ने 59 चीनी मोबाइल एप्स को बैन किया है. इनमें टॉप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स टिक टॉक और वी चैट भी शामिल हैं. 

भारत सरकार ने इस प्रतिबंध को सही बताया और कहा कि ये एप्लीकेशन देश की संप्रभुता, सुरक्षा और अखंडता के लिए खतरा थे.  

कई चीनी कंपनियां जिनमें Huawei शामिल है. ये चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) से जुड़े हुए हैं. ये कॉरिडोर पीओके और गिलगित-बलटिस्तान में है. 

भारत में ये मांग की जा रही है कि चीनी कंपनियां जो पीओके में पाकिस्तान के साथ काम कर रही हैं. उन्हें भारत में काम करने की इजाजत न मिले. 

जबसे लद्दाख के गलवान में चीनी और भारतीय सैनिकों के बीच झड़प हुई है भारत में चीनी सामान को बैन करने की मांग बढ़ती जा रही है. 

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भारत अब 4जी नेटवर्क से जुड़ी चीन की टेलीकम्युनिकेशन कंपनियों को प्रतिबंधित करने की योजना बना रहा है. वहीं 5जी नेटवर्क के लिए भी चीनी कंपनियों को इजाजत न​हीं देगा.

ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) के वाइस प्रेसीडेंट गौतम चिकरमने ने 5जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर अपने रिसर्च पेपर में कहा है कि चीन की इस प्रवृति को देखते हुए जिस तरह कॉरपोरेट ​ऑपरेशंस में उसका दखल बढ़ा ​है. और जिस तरह के क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ हुवावे डील करता है, कंपनी अपनी उपस्थिति से किसी देश की सुरक्षा में खतरा पैदा कर सकती है. वहीं भारत के लिए इस तरह का खतरा और बढ़ जाता है. 

सुरक्षा एजेंसियों ने भी पीओके में चीनी कंपनियों की उपस्थिति को लेकर चिंता जताई है. और राष्ट्रहित के लिए इसे खतरा बताया है.

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, हुवावे जैसी चीनी टेलीकॉम कंपनियां पाकिस्तान के कराची औ ग्वादर स्थित नौसेना के बेस में सेक्योर केबल लाइंस बिछाने का काम भी कर रही हैं. और इसके साथ ही डिफेंस फोर्सेज को हाई टेक टेक्नोलॉ​जी भी उपलब्ध करवा रही हैं. 

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