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बालाकोट स्‍ट्राइक में जिसने मचाया कहर, दुश्‍मन को मिटाने के लिए IAF को मिलेंगे वैसे 100 बम

पाकिस्‍तान के भीतर बालाकोट एयर स्‍ट्राइक को सफल बनाने में महत्‍वपूर्ण निभाने वाले स्‍पाइस-2000 बम का एडवांस वर्जन भारत को मिलने वाला है.

बालाकोट स्‍ट्राइक में जिसने मचाया कहर, दुश्‍मन को मिटाने के लिए IAF को मिलेंगे वैसे 100 बम
बालाकोट एयर स्‍ट्राइक के दौरान भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने स्‍पाइस-2000 बम का इस्‍तेमाल किया था.(फाइल फोटो)

नई दिल्‍ली: पाकिस्‍तान के भीतर बालाकोट एयर स्‍ट्राइक को सफल बनाने में महत्‍वपूर्ण निभाने वाले स्‍पाइस-2000 बम का एडवांस वर्जन भारत को मिलने वाला है. भारतीय वायुसेना को अगले महीने इजराइल से 100 स्पाइस बम मिलने शुरू हो जाएंगे. जून में इजराइल के साथ स्पाइस-2000 बम को लेकर 300 करोड़ की डील हुई थी. बिल्डिंग को पूरी तरह नेस्‍तनाबूद करने की क्षमता के कारण स्‍पाइस-2000 बम को बिल्डिंग ब्‍लास्‍टर (Building Blaster) भी कहा जाता है. वायुसेना के सूत्रों ने ANI को बताया कि मार्क 84 वारहेड के साथ स्‍पाइस-2000 की डिलीविरी मध्‍य सितंबर के आस-पास होना शुरू हो जाएगी. इनकी सप्‍लाई ऐसे वक्‍त होने जा रही है जब उसी के आस-पास इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्‍याहू द्विपक्षीय मीटिंग के लिए भारत का दौरा करेंगे.

इस साल जून में 100 स्‍पाइस 2000 खरीदने का समझौता भारतीय वायुसेना और इजरायल के बीच हुआ था. उल्‍लेखनीय है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने सेनाओं को आपातकालीन सरकारी खरीद की शक्तियां दी हैं. उसी के तहत ये समझौता हुआ था. बालाकोट एयर स्‍ट्राइक के सफल ऑपरेशन के बाद वायुसेना इन बमों को खरीदना चाहती थी.

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उल्‍लेखनीय है कि बालाकोट एयर स्‍ट्राइक के तहत वायुसेना ने जैश-ए-मोहम्‍मद के आतंकी कैंपों को निशाना बनाया था. उस ऑपरेशन के दौरान वायुसेना ने मिराज-2000 लड़ाकू विमानों से स्‍पाइस-2000 बम गिराए थे. उस वक्‍त 12 लड़ाकू विमानों ने नियंत्रण रेखा (LoC) पारकर खैबर-पख्‍तूनखवा प्रांत में जैश-ए-मोहम्‍मद के ठिकानों पर धावा बोला था. हालांकि जिन स्‍पाइस-2000 का इस्‍तेमाल बालाकोट में किया गया था, वे इमारत को पूरी तरह नष्‍ट करने वाले नहीं थे. इसकी जगह वह अपने भार के इस्‍तेमाल से आतंकी कैंप की कंक्रीट की छत को नष्‍ट कर भीतर जाकर विस्‍फोट करने वाले थे. उल्‍लेखनीय है कि आपातकालीन शक्तियों के तहत तीन भारतीय सेनाएं दुश्‍मन से निपटने के लिए अपनी जरूरत के मुताबिक 300 करोड़ रुपये तक के रक्षा उपकरण खरीद सकती हैं.