सीमा विवाद को हल करने की दिशा में एक और कदम, कमांडर स्तरीय बैठक जल्द: MEA

सीमा विवाद हल (India China Standoff) करने के लिए भारत और चीन वरिष्ठ कमांडरों (Senior Commanders ) की अगली बैठक के लिए सहमत हो गए हैं.

सीमा विवाद को हल करने की दिशा में एक और कदम, कमांडर स्तरीय बैठक जल्द: MEA
फाइल फोटो

नई दिल्ली: सीमा विवाद हल (India China Standoff) करने के लिए भारत और चीन वरिष्ठ कमांडरों (Senior Commanders ) की अगली बैठक के लिए सहमत हो गए हैं. विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) ने गुरुवार को बताया कि दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों की बैठक जल्द हो सकती है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव (Spokesperson Anurag Srivastava) ने एक ब्रीफिंग के दौरान कहा, ‘दोनों देशों ने शांति बहाली के लिए बातचीत जारी रखने का फैसला लिया है. दोनों पक्षों के वरिष्ठ कमांडरों की अगली बैठक जल्द से जल्द कराने पर सहमति बनी है. इसके साथ ही परामर्श और समन्वय (WMCC) के लिए कार्यतंत्र की अगली बैठक भी जल्द ही होने की संभावना है’.

कई मुद्दों पर बनी सहमति
भारत और चीन के वरिष्ठ कमांडरों की 6वीं बैठक सोमवार को हुई थी. इस बैठक में किसी भी गलतफहमी से बचने के लिए जमीनी संचार मजबूत करने के साथ ही सीमा पर अतिरिक्त सैनिक न भेजने पर सहमति बनी थी. बैठक के आबाद रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक तौर से प्रेस‌ रिलीज जारी करके बताया कि दोनों पक्ष फ्रंटलाइन पर अतिरिक्त सैनिक ना भेजने के लिए तैयार हो गए हैं. साथ ही वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर एकतरफा परिस्थिति बदलने से भी बचने का फैसला लिया है.

इस बैठक में सैन्य कमांडर-स्तरीय बैठक के अगले दौर को जल्द से जल्द शुरू करने पर भी दोनों देशों ने सहमति व्यक्त की है. सोमवार को हुई छठे दौर की बैठक एलएसी पर चीन कै मोल्डो गैरिसन में आयोजित की गई थी. इसमें भारत की तरफ से दो लेफ्टिनेंट जनरल रैंक के अधिकारियों ने हिस्सा लिया था. 

होश आ गए ठिकाने
गौरतलब है कि पिछले काफी समय से पूर्वी लद्दाख से सटी एलएसी पर भारत और चीन की सेनाओं के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है. हाल ही में चीनी सेना ने घुसपैठ की कोशिश भी की थी, लेकिन भारतीय जाबांजों ने मुंहतोड़ जवाब दिया. भारतीय सेना की जवाबी कार्रवाई से न केवल चीनी सेना का मनोबल टूटा बल्कि चीनी सरकार को भी समझ आ गया कि विवाद को आगे बढ़ाने का सबसे ज्यादा नुकसान उसे ही उठाना पड़ेगा. यदि वजह है कि चीन अब शांति के रास्ते विवाद सुलझाने पर जोर दे रहा है. 

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