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इस साल देखें दुर्गा का ईको-फ्रेंडली अवतार, दिल्ली में रिसाइकिल वेस्ट से बनाई गई 14 फीट ऊंची प्रतिमा

जूट के थैले से लेकर खराब बल्ब (bulb), सिलेंडर, मोटर साइकिल के स्पेयर पार्ट्स (Motorcycle spare parts), तवा, सॉफ्ट ड्रिंक की बेकार कैन (soft drink cans), इन सभी चीजों का इस्तेमाल इस प्रतिमा (idol) को बनाने के लिए किया गया है

इस साल देखें दुर्गा का ईको-फ्रेंडली अवतार, दिल्ली में रिसाइकिल वेस्ट से बनाई गई 14 फीट ऊंची प्रतिमा
प्रतिमा (idol) देखने आए लोगों ने बताया कि इस तरह की मूर्ति उन्होंने पहली बार देखी है

नई दिल्ली: देश भर में पर्यावरण (environment) को बचाने की मुहिम जोरों पर है और इसका असर दुर्गा पूजा (Durga Puja) में भी देखने को मिला. दुर्गा पूजा के लिए पंडाल तैयार है. माता की प्रतिमा (idol) भी स्थापित हो चुकी है. हर साल की तरह इस साल भी दुर्गा पूजा के लिए एक से बढ़ कर एक मूर्तियां तैयार की गई हैं. लेकिन इस साल दिल्ली (Delhi) के एक पंडाल में लोगों को मां दुर्गा (Maa Durga) का एक अलग अवतार (avtar) देखने को मिलेगा. ये है दुर्गा का ईको-फ्रेंडली अवतार (eco-friendly avtar). दुर्गा (Durga) के इस खास रूप को रिसाइकिल वेस्ट (recycle waste) से तैयार किया गया है. दुर्गा की इस भव्य प्रतिमा को तैयार करने के लिए हर वो सामान इस्तेमाल किया गया है, जो कि आम तौर पर कबाड़ी (ragman) को बेच दिया जाता है.

जूट के थैले से लेकर खराब बल्ब (bulb), सिलेंडर, मोटर साइकिल के स्पेयर पार्ट्स (Motorcycle spare parts), तवा, सॉफ्ट ड्रिंक की बेकार कैन (soft drink cans), इन सभी चीजों का इस्तेमाल इस प्रतिमा (idol) को बनाने के लिए किया गया है. दिल्ली (Delhi) के आईपी एक्सटेंशन (IP extension) में आराधना पार्क में लगी दुर्गा की मूर्ति (Durga idol) 14 फीट ऊंची है और इसमें करीब 100 किलो रिसाइकिल वेस्ट (recycle waste) का इस्तेमाल किया गया है. इसे 1 महीने में तैयार किया गया है. इसमें दुर्गा के साथ-साथ लक्ष्मी (Laxmi), सरस्वती (Saraswati), गणेश (Ganesh) और कार्तिकेय की मूर्तियां भी बनाई गई हैं.

प्रतिमा (idol) देखने आए लोगों ने बताया कि इस तरह की मूर्ति उन्होंने पहली बार देखी है. और जब हम पर्यावरण (environment) को बचाने की कोशिश करते हैं तो भगवान तो खुश होंगे ही. इस प्रतिमा को बनाने वाले आर्टिस्ट (artist) पिनाकी शाह का कहना है कि आम तौर पर लोग आस्था (Faith) में किसी तरह का बदलाव नहीं चाहते. लेकिन इस पंडाल के आयोजकों की सोच प्रगतिशील है. पंडाल (Pandal) में आने वाले लोग भी इससे जागरुक होंगे.

इंद्रप्रस्थ मात्री मंदिर (temple) सोसाइटी के इस पंडाल (Pandal) में न सिर्फ दुर्गा की मूर्ति ईको-फ्रेंडली (eco-friendly) है बल्कि सजावट से लेकर भंडारे तक प्लास्टिक (plastic) का इस्तेमाल कहीं नहीं किया गया है. इसके सेक्रेटरी प्रसुन दत्त ने बताया कि वो हर साल कुछ न कुछ अलग करने की कोशिश करते हैं. पिछले साल उन्होंने अखबार से मूर्ति बनाई थी और इस साल रिसाइकिल वेस्ट (recycle waste) से बनाया है. खास बात यह है कि दुर्गा पूजा (Durga Puja) के बाद इन प्रतिमाओं को यमुना (Yamuna) में विसर्जित नहीं किया जाएगा. बल्कि श्रद्धालु खुद इन्हें अपने घर में स्थापित करेंगे.