नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ीं 64 फाइलें सार्वजनिक, मौत से जुड़े रहस्य के खुलने की संभावना

Last Updated: Friday, September 18, 2015 - 14:30
नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ीं 64 फाइलें सार्वजनिक, मौत से जुड़े रहस्य के खुलने की संभावना

कोलकाता : नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ी 64 फाइलों को शुक्रवार को कोलकाता में सार्वजनिक कर दिया गया है। जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल सरकार ने नेताजी से जुड़ीं 64 फाइलों को कोलकाता पुलिस म्यूजियम में जनता के देखने के लिए रख दिया है और इसके डिजिटल संस्करण नेताजी के परिवार को सौंप दिए गए हैं। अब इस बात की संभावना बढ़ गई है कि नेताजी की मौत से जुड़े राज खुलेंगे। चूंकि सालों से सरकारी और पुलिस लॉकर में बंद नेताजी से जुड़ी 64 गुप्त फाइलों को अब सार्वजनिक कर दिया गया है।

पश्चिम बंगाल सरकार ने आज नेताजी से जुड़ी इन फाइलों को उनके परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में सार्वजनिक कर दिया। नेताजी के परिवार के लोग अब तक गोपनीय रखी फाइलों को सार्वजनिक करने की लंबे समय से मांग करते रहे हैं। फाइलों को यहां कोलकाता पुलिस संग्रहालय में शीशे के बक्से में प्रदर्शित किया गया। इस दौरान कोलकाता पुलिस के आयुक्त सुरजीत कार पुरकायस्थ और नेताजी के परिवार के कुछ लोग मौजूद थे। इन 64 फाइलों में से 55 कोलकाता पुलिस के पास और नौ अन्य राज्य पुलिस के पास थीं। इन फाइलों में कुल 12 हजार 744 पृष्ठ हैं। पुलिस आयुक्त ने नेताजी के परिवार के सदस्यों को एक डीवीडी सौंपी जिसमें फाइलें डिजिटल स्वरूप में हैं।

इस संबंध में नेताजी के ग्रैंड नेफ्यू चंद्रा बोस ने कहा कि मैं यह कदम उठाने के लिए ममता बनर्जी सरकार को बधाई देता हूं। उन्होंने कहा कि यह शर्म की बात है कि आजाद भारत में भी नेताजी के परिवार की जासूसी की जाती थी। बोस ने कहा कि उम्मीद है कि इन फाइलों के सार्वजनिक होने से काफी सच्चाई सामने आएगी। हम चाहते हैं कि मोदी सरकार इस बात की जांच करे कि आखिर हमारे परिवार की जासूसी क्यों की गई थी। उन्होंने कहा कि अब ये साफ हो जाएगा कि आखिर आजाद भारत में विलेन कौन था।

फाइलों के डिजिटल संस्करण नेताजी के परिवार को सौंपते हुए कोलकाता के पुलिस कमिश्नर सुरजीत पुरकायस्थ ने कहा कि इन फाइलों को कोलकाता पुलिस म्यूजियम के अर्काइव में आज से रख दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन 64 फाइलों में 12744 पन्ने हैं, सभी को डिजिटलाइज़्ड कर लिया गया है। जबकि असली फाइलों को बिना किसी छेड़छाड़ के कोलकाता पुलिस म्यूजियम में रख दिया गया है। उन्होंने इन फाइलों के डिजिटल संस्करणों की सीडी बोस के परिवार से जुड़े लोगों को दी।

इन फाइलों के सार्वजनिक होते ही सालों से पहेली बनी हुई नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े कई और रहस्यों से पर्दा उठ सकता है। इसके साथ ही ऐसी और भी कई सूचनाएं हैं जो दिल्ली के राष्ट्रीय अभिलेखागार की गुप्त सूची से पहले ही हटा दी गई हैं। 1997 की रिपोर्ट से ऐसी ही एक फाइल सामने आई है जिसके अनुसार 18 अगस्त 1945 में ताईहोकू के प्लेन क्रैश में बोस की कथित तौर से मृत्यु के बाद महात्मा गांधी ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि उन्हें लगता है कि नेताजी जिंदा हैं। बंगाल में एक प्रार्थना सभा में दिए इस वक्तव्य के चार महीने बाद एक लेख छपा था जिसमें गांधीजी ने माना था कि इस तरह की निराधार भावना के ऊपर भरोसा कोई नहीं किया जा सकता।

1946 की एक गुप्त फाइल के अनुसार गांधीजी ने अपनी इस भावना को 'अंतर्मन' की आवाज कहा था लेकिन कांग्रेसियों को लगता था कि उनके पास हो न हो कुछ गुप्त सूचना है। फाइल में यह भी लिखा गया था कि एक गुप्त रिपोर्ट कहती है कि नेहरू को बोस की एक चिट्ठी मिली है जिसमें उन्होंने बताया है कि वह रूस में हैं और भारत लौटना चाहते हैं। हो सकता है कि जब गांधी ने सार्वजनिक तौर पर बोस के जिंदा होने की बात कही थी उसी दौरान यह चिट्ठी भेजी गई हो। नेताजी के परिवार से चंद्र बोस का कहना है कि महात्मा गांधी को ज़रूर कुछ पता था कि गांधी ने कहा था कि बोस परिवार को उनका श्राद्ध नहीं करना चाहिए क्‍योंकि उनकी मौत को लेकर एक प्रश्न चिह्न लगा हुआ है।

 

ज़ी मीडिया ब्‍यूरो



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