Life on Mars: मंगल ग्रह पर बच्चे पैदा करेंगे इंसान! 200 साल तक जीवित रहेगा स्पर्म

Human Reproduction on Mars: इंटरनैशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर कई साल तक रखे गए चूहे के स्पर्म सैंपल से स्वस्थ बच्चे पैदा हुए हैं. वैज्ञानिकों ने इसे मानव सभ्यता के लिए अहम खोज बताया है. विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ें पूरी खबर.

Life on Mars: मंगल ग्रह पर बच्चे पैदा करेंगे इंसान! 200 साल तक जीवित रहेगा स्पर्म
Life on Mars

नई दिल्ली: मंगल (Life On Mars) पर जीवन की तलाश में जुटे वैज्ञानिकों अब एक बड़ा दावा किया है. वैज्ञानिकों ने कहा है कि लाल ग्रह पर जीवन संभाविता का पता भले न चला हो लेकिन कुछ वैज्ञानिकों ने यह दावा किया है कि मार्स (Mars Mission) पर इंसान बच्चे जरूर पैदा (Human Reproduction on Mars) कर सकता है. वैज्ञानिकों के अनुसार मंगल ग्रह पर 200 साल तक स्पर्म (Sperm) सुरक्षित और एक्टिव रह सकता है. आपको बता दें कि इंटरनैशनल स्पेस स्टेशन पर 6 साल तक चूहे का स्पर्म रखा रहने के बाद भी स्वस्थ पाया गया.

ISS पर रखे गए चूहे के सैंपल 

'साइंस अडवांसेज' जर्नल में छपी इस स्टडी के अनुसार, साल 2012 में वैज्ञानिकों ने 66 चूहों से लिए गए सैंपल्स को 30 से ज्यादा ग्लास ऐंप्यूल्स में रखा था.  फिर वैज्ञानिकों ने बेहतर सैंपल चुन कर उससे बच्चे पैदा करने पर विचार किया। 4 अगस्त, 2013 को 3 सैंपल्स ISS के लिए लॉन्च किए गए और तीन सैंपल को जापान के सुकूबा में रखा गया. ये सैंपल वैसे ही कंडीशन्स में रखा गया जिनमें कई रेडिएशन शामिल थे. 

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नहीं दिखा कोई असर 

इसके बाद, वैज्ञानिकों ने 19 मई, 2014 को पहला बॉक्स वापस धरती पर लाया गया और सैंपल पर विस्तृत अध्ययन किया गया. इसके बाद, दूसरा बॉक्स 11 मई, 2016 को वापस लाया गया. वहीं, तीसरा सैंपल 3 जून, 2019 को वापस लाया गया. इसके बाद वैज्ञानिकों  ने RNA सीक्वेंसिंग की मदद से देखा कि सैंपल्स में कितना रेडिएशन पहुंचा है. वैज्ञानिक ये देख कर दंग रह गए कि ISS ट्रिप से स्पर्म के न्यूक्लियस पर फर्क नहीं होता है.

वैज्ञानिकों को मिली सफलता 

उधर, धरती पर रखे बॉक्स भी जापान की यामानाशी यूनिवर्सिटी लाए गए. यहां ड्राई-फ्रीज करके भेजे गए स्पर्म को रीहाइड्रेट किया गया और फिर इन्हें फ्रेस ओवरी सेल्स (Fresh Ovary Cells) में इंजेक्ट किया गया. इस शोध से जुड़ी प्रोफेसर सयाका वकायमा के मुताबिक जेनेटिक रूप से कई सामान्य बच्चे पैदा हुए. वैज्ञानिकों को ये देख कर बेहद ख़ुशी हुई कि इनमें कोई डिफेक्ट नहीं पाया गया. प्रफेसर सयाका ने इसे मानव सभ्यता के लिए अहम खोज बताया है.

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