राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बताया, 2020 ने देश को दिए 4 बड़े सबक

'हम सौभाग्यशाली हैं कि महात्मा गांधी हमारे मार्ग दर्शक थे. समानता हमारे गणतंत्र का मूल मंत्र है. इस साल स्वतंत्रता दिवस पर धूमधाम नहीं होगी क्योंकि, कोरोना ने विश्व को क्षति पहुंचाई है.'

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बताया, 2020 ने देश को दिए 4 बड़े सबक

74वें स्वतंत्रता दिवस पर देश-विदेश में रह रहे भारत के सभी लोगों को बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं. 15 अगस्त स्वाधीनता के गौरव को महसूस करने का दिवस है. स्वाधीन भारत की नींव पर ही आधुनिक भारत का निर्माण हो रहा है. हम सौभाग्यशाली हैं कि महात्मा गांधी हमारे मार्गदर्शक थे. समानता हमारे गणतंत्र का मूल मंत्र है. इस साल स्वतंत्रता दिवस पर धूमधाम नहीं होगी क्योंकि, कोरोना ने विश्व को क्षति पहुंचाई है.

कोरोना के योद्धाओं ने डट कर काम किया
आश्वस्त करने वाली बात यह है कि समय रहते सभी प्रभावी कदम उठाए गए. राज्य सरकारों ने स्थानीय परिस्थिति के अनुसार काम किया और लोगों के जीवन की रक्षा करने में ये कदम प्रभावी साबित हुए. कोरोना के योद्धाओं ने डट कर काम किया. दुर्भाग्यवश कोरोना से लड़ते हुए कोरोना योद्धाओं ने अपनी जान भी गंवाई. राष्ट्र उन सभी डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों का ऋणी है जो कोरोना वायरस के खिलाफ इस लड़ाई में अग्रिम पंक्ति के योद्धा रहे हैं.

महामारी का सबसे कठोर प्रहार गरीबों पर
पश्चिम बंगाल और ओडिशा में अम्फान तूफान का सामना करना पड़ा पूर्वोत्तर राज्यों में बाढ़ का सामना करना पड़ा. ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना’ की शुरुआत करके सरकार ने करोड़ों लोगों को आजीविका दी है ताकि महामारी के कारण नौकरी गंवाने, एक जगह से दूसरी जगह जाने और जीवन के अस्त-व्यस्त होने के कष्ट को कम किया जा सके. इस महामारी का सबसे कठोर प्रहार, गरीबों और रोजाना आजीविका कमाने वालों पर हुआ है. संकट के इस दौर में, उनको सहारा देने के लिए, वायरस की रोकथाम के प्रयासों के साथ-साथ, अनेक जन कल्याणकारी कदम उठाए गए हैं.

किसी भी परिवार को भूखा न रहना पड़े, इसके लिए जरूरतमंद लोगों को मुफ्त अनाज दिया जा रहा है. इस अभियान से हर महीने लगभग 80 करोड़ लोगों को राशन मिलना सुनिश्चित किया गया है. किसी भी प्रकार से लोगों को भूखा नहीं रहना पड़े इसके लिए वन नेशन वन राशन कार्ड सभी राज्यों में लाया जा रहा है.

भारत विश्व समुदाय के साथ
दुनिया में कहीं पर भी मुसीबत में फंसे हमारे लोगों की मदद करने के लिए प्रतिबद्ध, सरकार द्वारा ‘वंदे भारत मिशन’ के तहत, दस लाख से अधिक भारतीयों को स्वदेश वापस लाया गया है. भारतीय रेल द्वारा इस चुनौतीपूर्ण समय में ट्रेन सेवाएं चलाकर, वस्तुओं तथा लोगों के आवागमन को संभव किया गया है. अपने सामर्थ्य में विश्वास के बल पर, हमने कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में अन्य देशों की ओर भी मदद का हाथ बढ़ाया है. अन्य देशों के अनुरोध पर, दवाओं की आपूर्ति करके, हमने एक बार फिर यह सिद्ध किया है कि भारत संकट की घड़ी में, विश्व समुदाय के साथ खड़ा रहता है.

चुनौती से एकजुट होकर संघर्ष करने की आवश्यकता
भारत की आत्मनिर्भरता का अर्थ स्वयं सक्षम होना है, दुनिया से अलगाव या दूरी बनाना नहीं. इसका अर्थ यह भी है कि भारत वैश्विक बाजार व्यवस्था में शामिल भी रहेगा और अपनी विशेष पहचान भी कायम रखेगा. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता के लिए हाल ही में सम्पन्न चुनावों में मिला भारी समर्थन, भारत के प्रति व्यापक अंतरराष्ट्रीय सद्भावना का प्रमाण है. आज जब विश्व समुदाय के समक्ष आई सबसे बड़ी चुनौती से एकजुट होकर संघर्ष करने की आवश्यकता है, तब हमारे पड़ोसी ने अपनी विस्तारवादी गतिविधियों को चालाकी से अंजाम देने का दुस्साहस किया.

हमारी आस्था शांति में
सीमाओं की रक्षा करते हुए, हमारे बहादुर जवानों ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए. भारत माता के वे सपूत, राष्ट्र गौरव के लिए ही जिए और उसी के लिए मर मिटे. पूरा देश गलवान घाटी के बलिदानियों को नमन करता है. हर भारतवासी के हृदय में उनके परिवार के सदस्यों के प्रति कृतज्ञता का भाव है.

उनके शौर्य ने यह दिखा दिया है कि यद्यपि हमारी आस्था शांति में है. फिर भी यदि कोई अशांति उत्पन्न करने की कोशिश करेगा तो उसे माकूल जवाब दिया जाएगा. हमें अपने सशस्त्र बलों, पुलिस तथा अर्धसैनिक बलों पर गर्व है जो सीमाओं की रक्षा करते हैं, और हमारी आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं.

सामंजस्य पर आधारित जीवन-शैली
वर्ष 2020 में हम सबने कई महत्वपूर्ण सबक सीखे हैं. एक अदृश्य वायरस ने इस मिथक को तोड़ दिया है कि प्रकृति मनुष्य के अधीन है. मेरा मानना है कि सही राह पकड़कर, प्रकृति के साथ सामंजस्य पर आधारित जीवन-शैली को अपनाने का अवसर, मानवता के सामने अभी भी मौजूद है.

जलवायु परिवर्तन की तरह इस महामारी ने भी यह चेतना जगाई है कि विश्व-समुदाय के प्रत्येक सदस्य की नियति एक दूसरे के साथ जुड़ी हुई है. मेरी धारणा है कि वर्तमान संदर्भ में ‘अर्थ-केंद्रित समावेशन’ से अधिक महत्व ‘मानव-केंद्रित सहयोग’ का है.

मेरा मानना है कि कोविड-19 के विरुद्ध लड़ाई में, जीवन और आजीविका दोनों की रक्षा पर ध्यान देना आवश्यक है. हमने मौजूदा संकट को सबके हित में, विशेष रूप से किसानों और छोटे उद्यमियों के हित में, समुचित सुधार लाकर अर्थव्यवस्था को पुन: गति प्रदान करने के अवसर के रूप में देखा है.

कृषि क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार किए गए हैं. किसान बिना किसी बाधा के, देश में कहीं भी, अपनी उपज बेचकर उसका अधिकतम मूल्य प्राप्त कर सकते हैं. किसानों को नियामक प्रतिबंधों से मुक्त करने के लिए ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम’ में संशोधन किया गया है. इससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी.

कोरोना वायरस मानव समाज द्वारा बनाए गए कृत्रि‍म विभाजनों को नहीं मानता है. इससे यह विश्वास पुष्ट होता है कि मनुष्यों द्वारा उत्पन्न किए गए हर प्रकार के पूर्वाग्रह और सीमाओं से, हमें ऊपर उठने की आवश्यकता है.

21वीं सदी को उस सदी के रूप में याद किया जाना चाहिए जब मानवता ने मतभेदों को दरकिनार करके, धरती मां की रक्षा के लिए एकजुट प्रयास किए. सार्वजनिक अस्पतालों और प्रयोगशालाओं ने कोविड-19 का सामना करने में अग्रणी भूमिका निभाई है. सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं के कारण गरीबों के लिए इस महामारी का सामना करना संभव हो पाया है. इसलिए  इन सार्वजनिक स्वास्थ्य-सुविधाओं को और अधिक विस्तृत व सुदृढ़ बनाना होगा.

स्वास्थ्य-सुविधाओं को और अधिक विस्तृत व सुदृढ़ बनाना होगा
सार्वजनिक अस्पतालों और प्रयोगशालाओं ने कोविड-19 का सामना करने में अग्रणी भूमिका निभाई है. सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं के कारण गरीबों के लिए इस महामारी का सामना करना संभव हो पाया है. इसलिए इन सार्वजनिक स्वास्थ्य-सुविधाओं को और अधिक विस्तृत व सुदृढ़ बनाना होगा.

चौथा सबक, विज्ञान और प्रौद्योगिकी से संबंधित है. इस वैश्विक महामारी से विज्ञान और टेक्‍नोलॉजी को तेजी से विकसित करने की आवश्यकता पर और अधिक ध्यान गया है. लॉकडाउन और उसके बाद क्रमशः अनलॉक की प्रक्रिया के दौरान शासन, शिक्षा, व्यवसाय, कार्यालय के काम-काज और सामाजिक संपर्क के प्रभावी माध्यम के रूप में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी को अपनाया गया है.

मुझे विश्वास है कि हमारे देश और युवाओं का भविष्य उज्ज्वल है.

श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का शुभारंभ
केवल दस दिन पहले अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का शुभारंभ हुआ है और देशवासियों को गौरव की अनुभूति हुई है. देशवासियों ने लंबे समय तक धैर्य और संयम का परिचय दिया है और देश की न्याय व्यवस्था में आस्था को बनाए रखा है. सभी पक्षों ने निर्णयों को स्वीकार किया. मैं सभी देशवासियों को बधाई देता हूं.

आप सभी देशवासी इस वैश्विक महामारी का सामना करने में, जिस समझदारी और धैर्य का परिचय दे रहे हैं, उसकी सराहना पूरे विश्व में हो रही है. मुझे विश्‍वास है कि आप सब इसी प्रकार, सतर्कता और जिम्मेदारी बनाए रखेंगे.

पूरा देश गलवान घाटी के बलिदानियों को नमन करता है.

हमारे पास विश्व-समुदाय को देने के लिए बहुत कुछ है, विशेषकर बौद्धिक, आध्यात्मिक और विश्व-शांति के क्षेत्र में. मैं प्रार्थना करता हूं कि समस्त विश्व का कल्याण हो.

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः ।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत् ॥