इमरान खान के आतंकी पाकिस्तान के सामने नया भारत, धारा-370 रद्द हो

पीओके पर संसद के सर्वसम्मत प्रस्ताव का सम्मान हो- सन् 1994 में कांग्रेस की नरसिम्हा राव सरकार के दौरान संसद ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करके पाक अधिकृत कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा बताया था.

इमरान खान के आतंकी पाकिस्तान के सामने नया भारत, धारा-370 रद्द हो

सर्जिकल स्ट्राइक की नई डोज से कश्मीर में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का नासूर खत्म नहीं होगा. जम्मू-कश्मीर में इस समय राष्ट्रपति शासन लागू है और भारत को फ्रांस, अमेरिका, इजराइल समेत अंतर्राष्ट्रीय  समुदाय का बहुतायत से समर्थन मिल रहा है. केन्द्र सरकार ने तीन तलाक समेत चार मामलों पर अध्यादेश जारी किया है. उसी तर्ज पर संविधान के अनुच्छेद-370 को समाप्त करने की सर्जिकल स्ट्राइक यदि की जाये तो एक तीर से ग्यारह शिकार किये जा सकते हैं-

सेना को खुली छूट, तो फिर सरकार के हाथ क्यों बंधे
पुलवामा घटना के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सैन्य बलों को आतंकवाद से लड़ने के लिए खुली छूट दे दी गई है. उसके बाद सेना के लेफ्टिनेंट जनरल ढिल्लन ने कहा कि कश्मीर में जो भी बंदूक उठायेगा, उसे मार दिया जायेगा. सेना को खुली छूट देनी वाली सरकार राष्ट्रीय  आपदा के इस दौर में, एक झटके में धारा-370 को खत्म क्यों नहीं करती? 

धारा-370 का खात्मा यानि निर्णायक सर्जिकल स्ट्राइक
एनआरसी के मुद्दे पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि आसाम को दूसरा कश्मीर नहीं बनने देंगे. पूर्वात्तर राज्यों में भारी विरोध के बावजूद केन्द्र सरकार नागरिकता कानून को देश के सभी राज्यों में लागू करने पर विचार कर रही है. सैन्य सर्जिकल स्ट्राइक से आतंकवाद के रक्तबीज का खात्मा नहीं होगा. अब संविधान के अल्पकालिक प्रावधान अनुच्छेद-370 को रद्द होना ही चाहिए. 

कमल हासन द्वारा जनमत संग्रह का बेतुका प्रस्ताव
फिल्म अभिनेता और राजनेता कमल हासन ने जम्मू-कश्मीर में जनमत संग्रह का बेतुका प्रस्ताव दिया है. जम्मू-कश्मीर राज्य में लद्दाख और जम्मू के हिस्सों में अधिकांश क्षेत्र और आबादी रहती है. परन्तु अलगांववाद का नासूर कश्मीर घाटी में ज्यादा फैला है. संविधान के अनुच्छेद-370 और धारा 35-ए को खत्म करने के बाद राज्य के सभी हिस्सों में भारतवासियों का आवागमन शुरु हो जायेगा, जिसके बाद कोई भी जनमत संग्रह अलगाववादी शक्तियों को नकार देगा. 

मेघालय के राज्यपाल द्वारा कश्मीर के बायकाट का बेतुका समर्थन
भारत द्वारा कश्मीर की सुरक्षा और पोषण में लाखों करोड़ खर्च किये जाते हैं, तो फिर राज्यपाल सौगत राय द्वारा बायकाट की अपील क्यों की गई? अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ाई में महात्मा गांधी द्वारा विदेशी वस्तुओं के बायकाट की अपील की जाती थी. परन्तु कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, जिसके बायकाट की बजाए मुख्य धारा में लाने के लिए धारा-370 को खत्म करने का संवैधानिक यत्न होना चाहिए. 

कश्मीरी आतंकवाद से आहत भारतीय अर्थव्यवस्था
कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत द्वारा कई लाख करोड़ खर्च किये जा चुके हैं, फिर भी स्थिति बिगड़ती जा रही है. आतंकवाद की वजह से कश्मीर और देश की अर्थव्यवस्था को 4.55 लाख करोड़ के नुकसान का आंकलन है. देश के बाकी राज्यों की तुलना में केन्द्र सरकार द्वारा कश्मीर को 8 गुना से ज्यादा फण्ड दिया जाता है. इसलिए धारा-370 अब पूरे देश की समस्या बन गई है और जनमानस की इच्छाओं के अनुरुप इस प्रावधान का अन्त होना ही चाहिए. 

पीओके पर संसद के सर्वसम्मत प्रस्ताव का सम्मान हो
सन् 1994 में कांग्रेस की नरसिम्हा राव सरकार के दौरान संसद ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करके पाक अधिकृत कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा बताया था. पीओके से ही कश्मीर में आतंकवाद की सप्लाई हो रही है, इसीलिए भारत ने वहाँ पर सर्जिकल स्ट्राइक  की थी. पीओके पर सामरिक और संवैधानिक  आधिपत्य जमाने के लिए भारत को अपने हिस्से के कश्मीर को मुख्य धारा में शामिल करना चाहिए, जिसके लिए धारा-370 रद्द करना जरुरी है.

भाजपा के घोषणा-पत्र का वादा पूरा हो
जनसंघ के दिनों से भाजपा नेताओं द्वारा अनुच्छेद-370 को समाप्त करने की मांग की जा रही है. आरक्षण और तीन तलाक जैसे मामलों पर कानून बनाने के लिए केन्द्र सरकार ने असाधारण प्रयास किये, तो फिर धारा-370 पर नई पहल क्यों नहीं हो रही, जिसके लिए पिछले चुनावी घोषणा-पत्र में भी वादा किया गया था.  

सिंधु नदी और जाधव के मामले अंतर्राष्ट्रीय अदालत में
कुलभूषण जाधव की रिहाई के लिए अंतर्राष्ट्रीय  न्यायालय में भारत सरकार द्वारा बड़े स्तर पर कानूनी प्रयास किये जा रहे हैं. दूसरी तरफ सिंधु नदी के पानी पर हक के लिए पाकिस्तान भी अंतर्राष्ट्रीय संधि की दुहाई दे रहा है. इस माहौल में भारत द्वारा पाकिस्तान के साथ सीधा युद्ध नहीं किया जा सकता. ऐसे किसी युद्ध में पाकिस्तान के साथ भारत को भी भारी नुकसान उठाना पड़ेगा. जबकि धारा-370 को रद्द करना भारत का आंतरिक मसला है, जिसे पाकिस्तान द्वारा अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर चुनौती नहीं दी जा सकती.

एमएफएन दर्जा छीनने के साथ पाकिस्तान को शत्रु देश घोषित करें
भारत सरकार ने आर्थिक पहल करते हुए पाकिस्तान को दिया गया मोस्ट फेवर नेशन का दर्जा वापस ले लिया है. पाकिस्तान से आयात और निर्यात पर प्रतिबन्ध या ड्यूटी बढ़ाने से भारतीय अर्थव्यवस्था को भी क्षति पहुँचती है. जबकि कश्मीर में धारा 370 खत्म करने के बाद, पाकिस्तान यदि कोई आना-कानी करे तो उसे शत्रु देश घोषित किया जा सकता है.  

अफगानिस्तान में नये समीकरणों के बाद कश्मीर में बढ़ेगी अशान्ति
अमेरिकी द्वारा अफगानिस्तान में नये समझौते के बाद वहां से आतंकियों का सफाया होगा, जिसके फलस्वरुप कश्मीर में आतंकियों के हमले में और तेजी आ सकती है. पूर्व सेना प्रमुख और विदेश राज्यमंत्री जनरल वी. के. सिंह के बयानों से भी इस स्थिति की झलक मिलती है. पिछले 70 सालों से कश्मीर की समस्या भारत के जी का जंजाल बन गई है, जिस समस्या के मुख्य कारण धारा-370 को निरस्त करके ही अलगांववाद पर लगाम लगाई जा सकती है. 

नये पाकिस्तान के खिलाफ नया भारत खड़ा हो
इमरान खान ने घुड़की देते हुए कहा है नया पाकिस्तान भारत के हमले का करारा जवाब देगा. धारा-370 को खत्म करके नया इण्डिया युद्ध किये बगैर ही पाकिस्तान को मुँहतोड़ जवाब दे सकता है. सरदार पटेल की सबसे ऊँची मूर्ति बनाने के साथ, उनके आदर्शों पर चलते हुए धारा-370 को अब खत्म ही करना चाहिए. इस निर्णायक सर्जिकल स्ट्राइक के बाद शक्तिमान नया भारत बगैर चिरौरी के अपने दम पर विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकेगा. 

(लेखक विराग गुप्‍ता सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता और संवैधानिक मामलों के विशेषज्ञ हैं)

(डिस्क्लेमर : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं)