जहां सचिन तेंदुलकर ने वनडे में पहली बार बनाए थे 200 रन, टूटने जा रहा है अब वही स्टेडियम
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जहां सचिन तेंदुलकर ने वनडे में पहली बार बनाए थे 200 रन, टूटने जा रहा है अब वही स्टेडियम

24 फरवरी 2010 को सचिन तेंदुलकर ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वनडे किक्रेट के इतिहास का पहला दोहरा शतक बनाया था.

स्डेटियम के टूटने से सचिन तेंदुलकर का बनाया विश्व रिकॉर्ड का इतिहास मिट जाएगा.

ग्वालियर (कर्ण मिश्रा): क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर ने मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित कैप्टन रूपसिंह इंटरनेशनल स्टेडियम में 200 रन बनाकर इतिहास रचा था, लेकिन इस खिलाड़ी का नाम इतिहास में दर्ज करवाने वाला स्टेडियम अब खुद इतिहास बनने जा रहा है. अगर कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई की गई तो जल्द ही स्टेडियम तोड़ दिया जाएगा. इसके साथ ही वह मैदान भी मिट जाएगा जहां कभी इंटरनेशनल मैच हुआ करते थे.

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने डीआरडीई के 200 मीटर के दायरे में आने वाली 142 से ज्यादा निजी, सरकारी संपत्तियों के साथ-साथ स्टेडियम को तोड़ने का आदेश जारी कर दिया है. जैसे ही यह खबर आयी है हर तरफ अब सन्नाटा है, तो वहीं खेलप्रेमी उदास हैं.

24 फरवरी 2010 को ग्वालियर के रूप सिंह स्टेडियम में सचिन तेंदुलकर ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ किक्रेट के इतिहास का पहला दोहरा शतक बनाया था. उसी दिन दुनिया ने उन्हें किक्रेट के भगवान का दर्जा दिया था, जिसके गवाह मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी बने थे. लेकिन अब यह बातें सिर्फ इतिहास के पन्नों में दर्ज होकर रह जाएंगी, क्योंकि ग्वालियर का रूप सिंह स्टेडियम अब रक्षा अनुसंधान एवं विकास स्थापना (डीआरडीई) के 200 मीटर के प्रतिबंधित क्षेत्र के दायरे में आ गया है, जिसे हटाने के आदेश हाईकोर्ट ने दे दिए हैं.

हाईकोर्ट के आदेश से रूपसिंह स्टेडियम ही नहीं बल्कि ग्वालियर नगर निगम के मुख्यालय सहित 37 शासकीय भवन, 54 निजी भवन जो कि अनुमति लेकर बनाए गए हैं, साथ ही 51 भवन जो बिना अनुमति के बने हैं इस दायरे में आ गए हैं. हालांकि, सचिन तेंदुलकर से जुड़ी यादों और 142 निजी और सरकारी संपत्तियों को बचाने के लिए जिला प्रशासन और निगम मध्य प्रदेश के एडवोकेट जरनल से इस मामले में शासन की ओर से रिव्यू पिटीसन दायर करने की योजना बना रहे हैं.

क्या है नियम
हाईकोर्ट के वकील अवधेश सिंह तोमर ने बताया, हाईकोर्ट ने वर्क्स ऑफ डिफेंस एक्ट 1903 के अनुसार डीआरडीई परिसर की 200 मीटर की परिधि में किसी भी प्रकार का निर्माण नहीं किया जा सकता है. इसका हवाला देकर यह आदेश पारित कर दिया है. डीआरडीई ने इसके लिए रक्षा विभाग द्वारा साल 2005 में अधिसूचना जारी कर दी थी. इसके बाद से इस क्षेत्र में यह एक्ट लागू हो गया है. वहीं, जिले के कलेक्टर अनुराग चौधरी ने हाईकोर्ट के आदेश का पालन करने की बात कही है.
 
ये संपत्तियां आ रही है दायरे में
रूपसिंह स्टेडियम, महापौर बंगला, मंत्री का बंगला 44-ए, हाईकोर्ट के प्रिंसिपल रजिस्ट्रार का बंगला-44 बी, जिला सत्र न्यायालय का अतिथि गृह, तीन सत्र न्यायाधीशों के बंगले, निगम अपर आयुक्त बंगला, स्पोट्र्स क्लब, तरण पुष्कर, निगम मुख्यालय एवं रूप सिंह स्टेडियम, फॉरेंसिक लैब, पर्यटन भवन जीवाजी विश्वविद्यालय, कर्मचारी आवास 9 से 12, टेनिस कोर्ट मैदान, युवा कल्याण विभाग व व्यावसायिक संस्थान, भारतीय खाद्य निगम भंडार, हिंदी भाषा अध्ययन केन्द्र, जिला व्यापार उद्योग केन्द्र, स्कूल ऑफ स्टडीज मैनेजमेंट, स्वास्थ्य विभाग कॉलोनी, सिंधिया मार्ग, ट्रैफिक थाना, बाल भवन, फायर ब्रिगेड ऑफिस, विद्युत विभाग.

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