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रवि शास्त्री-राहुल द्रविड़ का नाम आया तो नरम रुख क्‍यों अपना रहे विनोद राय?

अब सवाल उठता है कि अब विनोद राय और उनकी सीओए साथी डायना एडुल्जी को अचानक यह ख्याल कैसे आया कि न्यायविद लोढा कि सिफारिशें गलत हैं और बीसीसीआई के कर्मचारियों को कमेंट्री डील से दूर क्यों रखा गया है? 

रवि शास्त्री-राहुल द्रविड़ का नाम आया तो नरम रुख क्‍यों अपना रहे विनोद राय?
आईपीएल में ये दोनों कोच किसी फ्रैंचाइजी के साथ नहीं जुड़े हैं (फाइल फोटो)

चंद्र शेखर लूथरा, नई दिल्‍ली: सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2017 में बनाई गई गई कमेटी ऑफ एडमिनिस्ट्रेटर्स (COA) ने यह सुनिश्चित किया था कि लोढा पैनल की सभी सिफारिशों को जस का तस लागू किया जाए, लेकिन अब ऐसा दावा किया जा रहा है कि सीओए चाहता है कि सुप्रीम कोर्ट अपने कुछ सुझावों में थोड़ी ढील दे ताकि कुछ खास व्यक्तियों को इसका लाभ पहुंच सके. दरअसल सीओए प्रमुख विनोद राय चाहते हैं कि टीम इंडिया के प्रमुख कोच रवि शास्त्री और इंडिया ए एवं अंडर 19 के कोच राहुल द्रविड़ को आईपीएल में कमेंटरी के जरिये पैसा कमाने की अनुमति दी जानी चाहिए. गौरतलब है कि आईपीएल में ये दोनों कोच किसी फ्रैंचाइजी के साथ नहीं जुड़े हैं.

हालांकि 27 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी 8वीं स्टेटस रिपोर्ट में इस बात का कहीं जिक्र नहीं किया गया था. अब सवाल उठता है कि अब विनोद राय और उनकी सीओए साथी डायना एडुल्जी को अचानक ऐसा क्‍यों लग रहा है कि बीसीसीआई के कर्मचारियों को कमेंट्री डील से दूर रखने की जस्टिस लोढा की सिफारिशें तर्कसंगत नहीं थीं?

इस मामले में दोबारा सुप्रीम कोर्ट में जाने के लिए 12 अप्रैल को एक बैठक हुई. हमारे सहयोगी DNA के पास उपलब्ध मेल पर गौर किया जाए तो विनोद राय ने रवि शास्त्री और राहुल द्रविड़ दोनों के नामों पर कमेंट्री के लिए सहमति दी थी. यह जानकारी आईपीएल के ब्रॉडकास्टर को भी दी गई थी, ताकि ये दोनों आईपीएल के 11वें संस्करण में कमेंट्री कर सकें. 

शास्त्री और द्रविड़ की कमेंटेटर के रूप में नियुक्ति पर राय का जवाब था, मुझे इस पर कोई आपत्ति नहीं है. ये दोनों बीसीसीआई के कमेंटेटर्स होंगे. तर्क यह दिया गया था कि ये दोनों किसी फ्रैंचाइजी के साथ नहीं जुड़े हैं, इसलिए इन्हें अपनी इच्छा से कमेंट्री करने की छूट दी जाए. लेकिन कुछ अन्य चर्चा के बाद राय ने कहा कि दोनों कोचों को आईपीएल में कमेंट्री के लिए एंगेज नहीं किया जा सकता. 

विनोद राय के इस फैसले को बीसीसीआई सर्किल में आश्चर्य से देखा जा रहा है क्‍योंकि शास्त्री और द्रविड़ जैसे कद के कोचों को कभी कम नहीं देखा गया. ये दोनों टीमों के चयन में भी शामिल होते हैं और आईपीएल की नीलामी में भी. 

इस संबंध में एक बीसीसीआई अधिकारी ने सोमवार को कहा, ''यह सर्वविदित है कि इस मामले में जस्टिस जोढा पैनल के सुझाव क्‍या हैं? ऐसे में यदि सीओए शास्‍त्री और द्रविड़ को छूट देने की बात कह रहे हैं तो स्‍पष्‍ट रूप से आयु संबंधी और कूलिंग पीरियड से जुड़ी कुछ हमारी तर्कसंगत मांगों पर भी उनको विचार करना चाहिए.'' इसके साथ ही उन्‍होंने जोड़ा, ''हमें लगता है कि राय या सीओए में उनके सहयोगी उन मामलों में हस्‍तक्षेप करने का प्रयास कर रहे हैं जोकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनको दिए गए अधिकार से इतर दिखते हैं.''

इस बीसीसीआई अधिकारी ने इसके साथ ही कहा, ''दरअसल उनकी समस्‍या ये है कि बीसीसीआई सदस्‍यों ने 22 जून को प्‍लेयर्स के कांट्रैक्‍ट समेत अहम क्रिकेटीय विषयों पर विमर्श के लिए स्‍पेशल जनरल बॉडी मीटिंग(एसजीएम) बुलाई है. ऐसे में ये सब मीडिया में अधिक पब्लिसिटी पाने की कवायद है. अन्‍यथा, राय को प्रशासक के रूप में जस्टिस लोढा की सिफारिशों के तहत खुद ही इस्‍तीफा दे देना चाहिए क्‍योंकि इस पैनल ने सिफारिशों में कहा है कि प्रशासक की उम्र 70 साल से अधिक नहीं होनी चाहिए.'' स्‍पष्‍ट रूप से बीसीसीआई अधिकारी विनोद राय की उम्र की तरफ से इशारा कर रहे थे, जिन्‍होंने पिछली 23 मई को अपना 70वां जन्‍मदिन मनाया है.