Pakistan Strategy: ସିନ୍ଦୂର ଅପରେସନ୍ ସମୟରେ, ଏହା ପ୍ରମାଣିତ ହୋଇଥିଲା ଯେ ଚୀନ୍ ନିର୍ମିତ ବାୟୁ ପ୍ରତିରକ୍ଷା ପ୍ରଣାଳୀ ଭାରତର ସୁପରସୋନିକ୍ କ୍ରୁଜ୍ କ୍ଷେପଣାସ୍ତ୍ର, ବ୍ରହ୍ମୋସକୁ ପ୍ରତିହତ କରିପାରିବ ନାହିଁ। ତଥାପି, ପାକିସ୍ତାନ ଚୀନ୍ ଅସ୍ତ୍ର ବ୍ୟବହାର କରି ଭାରତୀୟ ଆକ୍ରମଣକୁ ପ୍ରତିହତ କରିବା ପାଇଁ ଏକ ପ୍ରତିରକ୍ଷା ପ୍ରଣାଳୀ ନିର୍ମାଣ କରିବାକୁ ସମସ୍ତ ପ୍ରୟାସ କରୁଛି।
Cheongung-II Air defence: दक्षिण कोरिया का चेओंगुंग-II एयर डिफेंस सिस्टम मिडिल ईस्ट युद्ध में बेहद प्रभावी साबित हुआ. UAE में तैनात इस सिस्टम ने ईरान के हमलों के दौरान 30 में से 29 मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर 96% सफलता हासिल की. इसकी सफलता के बाद UAE ने और सिस्टम की मांग बढ़ा दी है.
Patriot air defence: पोलैंड ने अमेरिका को ईरान युद्ध के लिए पैट्रियट एयर डिफेंस देने से इनकार कर दिया है. उसने अपनी और NATO की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है. यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप का एयर डिफेंस कमजोर हुआ है, जबकि अमेरिका के पास भी मिसाइलों की कमी बढ़ती जा रही है.
Patriot vs S-400: Patriot और S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की तुलना में दोनों की रणनीति अलग है. S-400 लंबी दूरी का एरिया डिफेंस देता है, जबकि Patriot सटीक पॉइंट डिफेंस करता है. यूक्रेन युद्ध में Patriot ने बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि S-400 को कुछ नुकसान भी झेलना पड़ा.
Air defence: ईरान के हमलों के बाद UAE ने अपनी सुरक्षा मजबूत करते हुए दक्षिण कोरिया से Cheongung-II की तीसरी एयर डिफेंस बैटरी मंगवाई है. यह सिस्टम मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोकने में सक्षम है. इससे क्षेत्र में UAE की रक्षा क्षमता और रणनीतिक स्थिति और मजबूत हुई है.
Tunguska Air Defense: भारत स्वॉर्म ड्रोन खतरे से निपटने के लिए तुंगुस्का एयर डिफेंस सिस्टम खरीद रहा है. 445 करोड़ के इस सौदे से मल्टीलेयर एयर डिफेंस मजबूत होगा. यह सिस्टम लो-एल्टीट्यूड ड्रोन और मिसाइल को मार गिराने में सक्षम है, जिससे सेना की सुरक्षा क्षमता और बढ़ेगी.
New Russian air defence: रूस ने पैंटसिर-S एयर डिफेंस सिस्टम की नई खेप सेना को सौंपी है. इसका नया SMD वर्जन ड्रोन हमलों से निपटने के लिए तैयार किया गया है, जो 48 मिसाइल ले जा सकता है. यह सिस्टम क्रूज मिसाइलों और ड्रोन के खिलाफ ज्यादा प्रभावी और आधुनिक सुरक्षा प्रदान करता है.
जंग में हथियारों से अहम रणनीति होती है. ये बात ईरान की IRGC फोर्स ने अमेरिका-इजरायल के साथ चल रही जंग के 7वें दिन ही साबित कर दिया था. ईरान हथियारों के साथ ही जियोपॉलिटिक्स को भी वेपन बना लिया है.
India's Air Defence System: ईरान ने अमेरिका और इजरायल में तैनात THAAD एयर डिफेंस को ब्लफ कर नष्ट कर दिया. ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइल की जगह ड्रोन ने हमला कर एलीट एयर डिफेंस को नष्ट कर दिया. भारत भी लगातार अपने एयरस्पेस की सुरक्षा मजबूत करने के लिए एयर डिफेंस में इन्वेस्ट कर रहा है.
Air Defence: पश्चिम एशिया में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने आधुनिक युद्ध में ड्रोन और मिसाइल खतरों को उजागर कर दिया है. पूर्व वायुसेना प्रमुख वीआर चौधरी ने कहा कि भारत को इससे सबक लेते हुए मजबूत एयर डिफेंस, अधिक रडार, हथियार प्रणालियां और साइबर इंटीग्रेशन वाला राष्ट्रीय सुरक्षा नेटवर्क बनाना होगा.
Air defence Shortage: यूक्रेन को पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम देने के बाद जर्मनी सहित यूरोप के कई देशों में एयर डिफेंस की कमी हो गई है. रूस से बढ़ते तनाव के बीच जर्मनी के स्टॉक लगभग खत्म हो चुके हैं. नए पैट्रियट सिस्टम का ऑर्डर दिया गया है, लेकिन उनकी डिलीवरी में अभी समय लगेगा.
Golden dome Air defence: अमेरिका का गोल्डन डोम एयर डिफेंस प्रोजेक्ट अंतरिक्ष आधारित मिसाइल रक्षा प्रणाली पर केंद्रित है. पेंटागन, स्पेसएक्स और ब्लू ओरिजिन मिलकर सैटेलाइट नेटवर्क और चंद्र इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर रहे हैं. 2028 तक प्रोटोटाइप लक्ष्य है. यह परियोजना चांद को रणनीतिक हाई ग्राउंड बनाकर राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है.
Sudarshan Chakra: भारत सुदर्शन चक्र नामक उन्नत एयर डिफेंस नेटवर्क विकसित कर रहा है, जो S-400, आकाश, आकाश-NG और कुशा जैसी प्रणालियों को जोड़कर काम करेगा. यह एंटी-स्टील्थ तकनीक से लैस होगा और चीन के J-20 व J-35 जैसे स्टील्थ विमानों को ट्रैक कर हवा में ही मार गिराने में सक्षम होगा.
S-500 Air Defence: रूस से भारत को S-500 कब मिलेगा? इस सवाल का जवाब मिल गया है. गौरतलब है कि दुनिया के सबसे बेहतरीन एयर डिफेंस S-500 प्रोमेथियस रूस में ऑपरेशनल हो चुका है. वर्तमान इसका तेजी से प्रोडक्शन हो रहा है, लेकिन अभी डिलीवरी सिर्फ रूसी सेना को मिलेगी. इसके बाद पहला ग्राहक भारत हो सकता है.
Indigenous air defense: भारत की स्वदेशी एयर डिफेंस क्षमता को बड़ा बढ़ावा मिला है. बेंगलुरु की ADTL ने भारतीय वायुसेना के पुराने पचोरा मिसाइल सिस्टम को पूरी तरह डिजिटाइज कर आधुनिक बनाया. यह अपग्रेड मिशन सुदर्शन चक्र के तहत ड्रोन से लेकर फाइटर जेट तक हवाई खतरों से देश की सुरक्षा मजबूत करेगा.
Project Kusha Air Defence System: प्रोजेक्ट कुशा पूरी तरह 'मेड इन इंडिया' होगा, जिससे युद्ध के समय हमें किसी और देश के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा. साथ ही, रूस या अमेरिका जैसे देशों को अरबों डॉलर नहीं देने पड़ेंगे. वहीं, इसमें ऐसी तकनीकें जोड़ी जा रही हैं जो आने वाले दशकों तक दुश्मन के किसी भी नए विमान को मार गिराने में सक्षम होंगी.
S-400 Attack on Ground: S-400 अब हवा के साथ-साथ जमीन पर भी हमला करने में सक्षम है. ऐसा दावा मिलिट्री वॉच मैग्जीन ने यूक्रेनी सूत्रों के हवाले से किया है. दावा है कि रूस ने यूक्रेन में स्थित जमीनी ठिकानों को S-400 से निशाना बनाया है. यह एक तरह से भारत के लिए खुशखबरी है.
Iran va America: ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर है. अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में Patriot और THAAD मिसाइल डिफेंस तैनात कर दी है. ट्रंप की सख्त चेतावनी, खामेनेई का पलटवार और 2025 युद्ध के सबक ने हालात विस्फोटक बना दिए हैं. एक चूक, पूरे क्षेत्र को जंग में झोंक सकती है.
Indian anti drone Air defence: भारत सरकार सुदर्शन चक्र एयर डिफेंस के अलावा एक ऑलराउंडर एयर डिफेंस बना रही है. जिसे आर्मी, नेवी और एयरफोर्स ड्रोन के खिलाफ इस्तेमाल करेंगी. यह एंटी ड्रोन एयर डिफेंस आबादी वाले इलाकों में लगाए जाएंगे. तीनों सेनाओं में इस डिफेंस के इस्तेमाल का समन्वय सीडीएस अनिल चौहान बनवाएंगे.
S-400 India Yenisei radar: रूस और भारत की दोस्ती अब आसमान में एक ऐसा अभेद्य किला बनाने जा रही है, जिसे भेदना दुश्मन के किसी भी लड़ाकू विमान या मिसाइल के लिए नामुमकिन होगा. रूस ने भारत को अपने सबसे आधुनिक रडार 'येनिसेई' का ऑफर दिया है. यह रडार इतना ताकतवर है कि यह दुश्मन के छिपने वाले स्टील्थ विमानों को भी बहुत दूर से पकड़ लेगा और पलक झपकते ही उन्हें मटियामेट कर देगा.
Sudarshan chakra air defence: राजधानी दिल्ली की हवाई सुरक्षा के लिए सरकार ने नए एयर डिफेंस की मंजूरी दी है. यह एयर डिफेंस DRDO द्वारा विकसित किया गया है. जो आगे चलकर सुदर्शन चक्र का हिस्सा बनेगा. इस एयर डिफेंस बैटरी को सुदर्शन की पहली तैनाती के रूप में देखा जा रहा है.
Russia offer S-350 Air defence: रूस ने भारत को एक नए एयर डिफेंस का ऑफर दिया है. रूस नए एयर डिफेंस S-350 को S-400 का पूरक बता रहा है. यह ऑफर ऐसे समय में आया है, जब भारत S-500 में दिलचस्पी दिखा रहा है. इसके काउंटर में रूस का कहना है कि इसे तत्काल तैनात किया जा सकता है.