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अभिमान कैसे विनाश कर देता है, जानिए देवराज इंद्र और दुर्वासा ऋषि की यह कथा

देवराज इंद्र ने भले ही त्रिदेवों (ब्रह्नमा-विष्णु-महेश) के कारण विजय पाई थी, लेकिन विजय का अभिमान ऐसा हो गया कि वह सोच बैठे थे कि अब कोई आक्रमण होगा ही नहीं. देवगुरु बृहस्पति की चिंता भी यही थी. वह भविष्य की आशंका से कम चिंतित थे, लेकिन वर्तमान में संकट यह था कि राग-रंग में डूबे देवराज ने युद्ध के बाद से ग्रहमंडल की बैठक ही नहीं की थी.

मई 12, 2021, 09:29 AM IST

नवरात्र विशेषः जानिए, शुंभ-निशुंभ के अत्याचार से देवी ने कैसे दिया भक्तों को अभयदान

देवी भगवती के जितने भी स्वरूप हैं, सभी के अलग-अलग तात्पर्य हैं और हर रूप में माता भक्तजनों का कल्याण करती हैं. नवरात्र के पांचवे दिन भक्त स्कंदमाता की पूजा करते हैं तो अगला छठवां दिन देवी कात्यायनी को समर्पित होता है. देवी भागवत से निकले भगवती के इन दोनों स्वरूपों की कथा, जिन्होंने देवताओं को अभयदान दिया और शुंभ-निशुंभ जैसे दानवों का वध किया. 

Mar 29, 2020, 08:06 PM IST