vinay upadhyay

आत्मा का आलाप

यहां रचने की छटपटाहट और आनंद है, तो द्वंद्व और सवाल भी हैं. इन्हीं सबको मथते हुए विचार की कुछ चिंगारियाँ फूटती हैं. कुछ निष्कर्ष हाथ आते हैं. पहेली-सा जीवन कुछ सार समेटे नई भाषा और भंगिमा में संबोधित होने लगता है.

Jan 22, 2019, 10:57 PM IST

मधुकली वृंद : नई कविता को जनसंवादी बनाता वृंदगान

वृंदगान, संगीत की प्राचीन परंपरा का वह रूप है, जिसमें कभी वेदों की ऋचाएं गूंजती थीं, लोक और भक्ति पद, जिसमें पूरे समाज के प्रेरणादायी आश्रय बन जाते थे.

Apr 6, 2018, 03:57 PM IST

लोक गायिका शारदा सिन्हा के साथ कुछ दूर... कुछ देर : यह परंपरा में स्त्रियों का समय है...

शारदा सिन्हा का कहना है कि लोकगीत हमारे पुरखों की देन हैं जिनमें हर इंसान को अपने सुख-दुख की आवाज सुनाई देती है. यह हमारी तहजीब की रखवाली करने वाला वो अस्त्र है जिससे हर मुश्किल पार की जा सकती है.

Apr 4, 2018, 01:48 PM IST

धन्यता के गीत गाती आवाज़ें

सौन्दर्य के सितार पर सद्भाव का संगीत हैं. विकृति के बाज़ार में संस्कृति का शंखनाद हैं. संत प्यार की पेढ़ी पर परमात्मा की प्रार्थना है. वे सदाचरण के आशीष हैं. जागरण के ताबीज हैं. 

Apr 2, 2018, 02:23 PM IST

यादों में पं. ओमप्रकाश चौरसिया : अदम्य जिजीविषा की मिसाल

चौरसिया की पहचान एक संतूरवादक और कंपोजर की रही. उनके अकादमिक कार्यों की अलग श्रृंखला है लेकिन इस मसरूफियत के बीच नाट्य संगीत की ओर भी उनका रुझान रहा.

Apr 2, 2018, 01:41 PM IST

थिएटर ओलंपियाड : सांस्‍कृतिक हस्‍तक्षेप का विश्‍वमंच

मनुष्‍य की आवाज़ को मुखरित करने का एक बड़ा ज़रिया रंगमंच है और इसे सारी दुनिया स्‍वीकारती है.

Mar 27, 2018, 11:44 AM IST

विश्व रंगमंच दिवस : भरोसा अब भी कायम है...

पारंपरिक लोकनाट्यों के प्रदर्शनों में भी लोक समाज की गहरी रुचि है. यह जीवंत कला परंपरा है. इन कलारूपों तथा इनसे जुड़े कलाकारों का भी बहुत सम्मान है. 

Mar 26, 2018, 05:41 PM IST

स्मृति शेष: पं. ओमप्रकाश चौरसिया; सुरीली ख्वाहिशें और कुछ कतरे रोशनी के

पंडित ओमप्रकाश चौरसिया की शख्सियत के कई पहलू रहे. सुरीला कंठ उन्हें प्रकृति ने दिया और इसी के चलते बचपन में ही गायन के प्रति रुझान हो गया. सागर में फिल्मी गीत और भजन गाते हुए परिवार के लोगों को उन्होंने इस बात के लिए राज़ी कर लिया था कि उन्हें गायन के विधिवत प्रशिक्षण के लिए रास्ता चुनना चाहिए.

Feb 27, 2018, 12:48 PM IST

रंग सप्तक: कला लेखन की कंजूस फ़िक्रें...

दुर्भाग्यवश हमारे देश में जितने सरकारी और गैर सरकारी सांस्कृतिक संस्थान हैं वे अभी भी मीडिया के साथ कुंभकर्णी मुद्रा में हैं. उन्हें लगता है कि मीडिया खुद उनके पास जाएगा. इसलिए वे अभी भी सांस्कृतिक जनसंपर्क, विज्ञापन, प्रचार और नई मार्केटिंग से विमुख हैं.

Feb 20, 2018, 02:16 PM IST

खजुराहो नृत्य समारोह (20 से 26 फरवरी): रंगपटल पर लय-गतियों का राग

मंदिर की पृष्ठभूमि में नृत्य का सम्मिलन एक अनोखे कलात्मक आनंद की अनुभूति कराता है. हालांकि शुरुआती कुछ बरस तक उत्कृष्टता के मानदण्ड और आयोजकीय स्वायत्तता कायम रहे और इसी गुणकारी और बेहतर पहल की वजह से यह समारोह अपनी साख अर्जित कर सका.

Feb 19, 2018, 12:36 PM IST

अज़ीम शायर निदा फाज़ली : कहीं सपना ज़िंदा है...

राजनीति की रणभूमि पर चल रहे दांव-पेंच के खेल को भी इस अज़ीम शायर ने महसूस किया. कहा, ‘हमारे यहां ये क्यों हो रहा है? कैसे हो रहा है? किसके लिए हो रहा है? इन सवालों का एक ही जवाब है- इलेक्शन

Feb 8, 2018, 11:22 AM IST

रंग सप्तक : जीवन के खरे आनंद से भरपूर धरती के छंद

लोकगीतों की अवधारणा को भारतीय समाज से जोड़कर देखें, तो संस्कार गीतों की एक भरी-पूरी दुनिया से हमारा सामना होता है. सरल-सहज और मिठासभरी धुनों में रचे-पगे सैकड़ों गीत परंपरा से गलबाहें करते हमारी आत्मा में उतर जाते हैं.

Jan 17, 2018, 01:53 PM IST

रंग सप्तक : सबसे अलग आवाज़...

मुझे सबसे ज्यादा आलोक की कविताओं ने प्रभावित किया. ये कविताएं दरअसल मन से मन की बात हैं. आलोक को यह गलतफहमी कतई नहीं है कि उनके लिखे-कहे से साहित्य का कोई नया गोत्र शुरू हो रहा है. न ही साहित्य के किसी मठ में शरण लेने की उद्घोषणा उन्होंने कभी की.

Jan 16, 2018, 04:07 PM IST

रंग सप्तक : कोलाज में रमते श्रीकांत

श्रीकांत कहते हैं, 'हर व्यक्ति का चीज़ों को देखने-परखने और अभिव्यक्त करने का अपना तरीका होता है. मेरे लिए अभिव्यक्ति जीवन की अनिवार्यता है. जो कुछ देखूं-समझूं और जानूं उसे शब्दों या रंगों द्वारा व्यक्त कर सकूं. अभिव्यक्ति की यह छटपटाहट मुझे निरंतर प्रयोगशील रखती हैं.

Jan 15, 2018, 04:39 PM IST

रंग सप्तक : दक्षिण में जन्मा उत्तर भारतीय

गुरु होम्बल का मानना था कि स्कूलों में प्राथमिक कक्षाओं से ही संगीत नृत्य एक अनिवार्य विषय होना चाहिए जैसा कि मप्र में पहले था. किन्हीं कारणवश बंद कर दिया गया. असल पहल तो कलाकार को ही करनी है. सरकार पर सब कुछ छोड़ेंगे तो कुछ होने वाला नहीं है. हां, सरकार को साथ में लेकर तो चलना ही पड़ेगा.

Jan 4, 2018, 03:48 PM IST

मालिनी अवस्थी : धरती के छंद गाती आवाज़

कभी किसी सभागार की चार-दीवारी में, कभी आसमान तले भीड़ भरे जलसे के मंच पर, कभी दूरदर्शन के किसी चैनल पर, तो कभी अपनों के बीच किसी छोटी महफिल में. आवाज़ और अंदाज़ के निरालेपन के बीच मालिनी की पेशकश यकीनन सुनने वालों पर करिश्माई असर करती है.

Dec 4, 2017, 01:01 PM IST

रंगों की ‘रज़ा' थी कि यादों का उजास कायम रहे

मध्यप्रदेश को इस बात का फ़क्र है कि दुनिया का यह बुलंदपाया चित्रकार इसी सूबे के एक गांव में पैदा हुआ. नर्मदा के किनारे मंडला ज़िले की सरहद में बसा बबरिया देहात रज़ा की जन्मभूमि है.

Dec 1, 2017, 12:30 PM IST

विनम्र श्रद्धांजलि : गिरिजा देवी, काशी की कंठ माधुरी पर हर कोई था निहाल

बनारस के गैल-गलियारों, हवेलियों और मंदिरों से लेकर सीमा पार के मुल्कों की महफिलों तक गिरिजा देवी अपनी निराली तान का तिलिस्म जगा चुकी थीं. मान और शान अपने उत्कर्ष का चरम छू चुके थे लेकिन इन सबके वज़न से उनकी सहजता झुकी नहीं.

Oct 25, 2017, 02:15 PM IST

रुह में बसे रहते हैं गुरु

गुरु-शिष्य परंपरा के बगैर हमारे संगीत की विकास यात्रा को समझना निरर्थक होगा. आदिकाल से इस परंपरा को सम्मान और महत्व मिलता रहा है. वेद, शास्त्र, पुराण से लेकर आज तक गुरु और शिष्य की नातेदारी बराबर बनी हुई है.

Oct 13, 2017, 06:30 PM IST

'देखा, सीखा और परख्या ही काम आता है'

काशी की कंठ माधुरी से झरता राग रस का सम्मोहन इस मायने में अनोखा था कि इसके साथ तपस्या के ताप में निखरे सुरों की आभा थी. अपनापे की प्रभा थी. ...और इस महिमा को अपने गान-व्यक्तित्व में धारण किए आंखों के सामने थी गंगा किनारे की गिरिजा.

Oct 12, 2017, 03:12 PM IST