सबसे लंबे समय तक Israel के PM रहे Netanyahu नहीं बचा पाए कुर्सी, Naftali Bennett ने संभाली देश की कमान

बेंजामिन नेतन्याहू 2009 से इजरायल के प्रधानमंत्री थे. उनके नाम सबसे लंबे समय तक देश की कमान संभालने का रिकॉर्ड है. 2019 के बाद से उनकी लोकप्रियता के ग्राफ लगातार गिरता जा रहा था. इसकी वजह से उनके खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोप. इन्हीं के चलते उन्हें चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था.

सबसे लंबे समय तक Israel के PM रहे Netanyahu नहीं बचा पाए कुर्सी, Naftali Bennett ने संभाली देश की कमान
बेंजामिन नेतन्याहू और इजरायल के नए प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट

तेल अवीव: इजरायल (Israel) में बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) युग का अंत हो गया है. नफ्ताली बेनेट (Naftali Bennett) को देश का नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया है. बेनेट ने रविवार को PM पद की शपथ ली. बेंजामिन नेतन्याहू ने अपनी कुर्सी बचाने की हर संभव कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सके. रविवार देर रात नई सरकार के पक्ष में 60, जबकि विरोध में 59 सांसदों ने वोट किया. इसके साथ ही 12 साल से प्रधानमंत्री पद पर काबिज बेंजामिन नेतन्याहू का कार्यकाल खत्म हो गया.

8 दलों की नई Government

हमारी सहयोगी वेबसाइट WION के अनुसार, इजरायल में 8 दलों की इस सरकार को मामूली बहुमत प्राप्त है. इस गठबंधन की कमान दक्षिणपंथी यामिना पार्टी के 49 वर्षीय नेता नफ्ताली बेनेट के हाथों में है. नई सरकार में 27 मंत्री हैं, जिनमें से सात महिलाएं हैं. नई सरकार के लिए अलग-अलग विचारधारा के दलों ने गठबंधन किया है. इनमें दक्षिणपंथी, वाम, मध्यमार्गी के साथ अरब समुदाय की एक पार्टी भी है.

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Netanyahu समर्थकों ने किया हंगामा

इससे पहले, बेनेट के संसद में संबोधन के दौरान 71 वर्षीय नेतन्याहू के समर्थकों ने बाधा डालने का प्रयास किया. प्रतिद्वंद्वी पार्टी के सांसदों के शोर-शराबे के बीच बेनेट ने कहा कि उन्हें गर्व है कि वह अलग-अलग विचार वाले लोगों के साथ काम करेंगे. बेनेट ने कहा कि इस निर्णायक समय हम यह जिम्मेदारी उठा रहे हैं. उन्होंने कहा कि देश में जो माहौल था, उससे बाहर निकलने के लिए चुनाव बेहद जरूरी थे.

लगातार गिर रहा था लोकप्रियता का ग्राफ

बेंजामिन नेतन्याहू 2009 से इजरायल के प्रधानमंत्री थे. उनके नाम सबसे लंबे समय तक देश की कमान संभालने का रिकॉर्ड है. 2019 के बाद से उनकी लोकप्रियता के ग्राफ लगातार गिरता जा रहा था. इसकी वजह से उनके खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोप. इन्हीं आरोपों के चलते 23 मई को हुए चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. हालांकि, उन्होंने अपनी हार को साजिश बताया और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल भी उठाए, लेकिन कुछ काम नहीं आया. बता दें कि नेतन्याहू पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अच्छे दोस्त हैं.

 

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