DNA ANALYSIS: जब सफेद चादर से ढक गया ऑस्ट्रेलिया का ये श​हर, सामने आया हैरान करने वाला वीडियो

इस शहर में बाढ़ आई हुई है जिसकी वजह से काफी नुकसान हुआ है, कई इमारतें गिर गईं हैं और जगह-जगह पानी भरा हुआ है. इस बीच पूरे शहर में सफेद चादर ​सी बिछी है, जिसका हैरान करने वाला वीडियो सामने आया है. 

DNA ANALYSIS: जब सफेद चादर से ढक गया ऑस्ट्रेलिया का ये श​हर, सामने आया हैरान करने वाला वीडियो

नई दिल्ली: आज हम आपको ऑस्ट्रेलिया में फैले एक ऐसे जाल के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे देखकर पहली नजर में तो आप समझ नहीं पाएंगे कि आखिर ये है क्या? इसमें नीचे हरी घास है और उसके ऊपर सफेद रंग की चादर बिछी है और ये सफेद चादर छोटी-मोटी भी नहीं है, काफी बड़ी है. दरअसल, ये मकड़ियों का जाल है. ऑस्ट्रेलिया में इस समय बाढ़ आई हुई है और मकड़ियों के ये जाल बाढ़ प्रभावित इलाकों में देखे जा रहे हैं.

कैसे बना सफेद चादर जैसा जाल?

बाढ़ की वजह से ऑस्ट्रेलिया में काफी नुकसान हुआ है, कई इमारतें गिर गईं हैं और जगह-जगह पानी भरा हुआ है. ऐसे में पानी से बचने के लिए मकड़ियों ने ऐसा जाल बुना जिसका सहारा लेकर वो ऊंचाई तक पहुंच सकें. इस प्रकिया को Ballooning कहते हैं. किसी विशेष स्थान से निकलने के लिए मकड़ियां Ballooning करती हैं. वे अपने अंदर से एक तरह का पदार्थ निकालती हैं, जो धागे की तरह होता है. उनकी ओर से निकाला गया ये धागा आसपास के पौधों पर चिपकता जाता है. इसी Ballooning का सहारा लेकर ये मकड़ियां आस-पास के पेड़ों और उंचे स्थान पर पहुंच जाती हैं और उनके आगे बढ़ने के बाद पीछे-पीछे सफेद चादर जैसा जाल बनता जाता है.

ऑस्ट्रेलिया में ऐसा ही हो रहा है. खास बात ये है कि ऊंचे स्थानों पर लाखों मकड़ियों के जाने की ये घटना एक साथ हुई है. निचले स्थानों से ऊपरी स्थानों पर जाने की प्रक्रिया में इन मकड़ियों ने अपने जाल को कुछ इस तरह बुना है कि इन इलाकों में कई किलोमीटर तक सफेद चादर जैसी जाल फैल गई है. मकड़ियों का ये जाल एक सप्ताह के बाद खुद खत्म हो जाएगा.

जाल के सहारे तय करती हैं 100 किलोमीटर तक की दूरी 

ऑस्ट्रेलिया के Victoria और Gippsland में मकड़ियों के जाल बनने की यह घटना सामान्य रूप से सर्दी के समय में होती है. उस वक्त ऑस्ट्रेलिया में सबसे ज्यादा बारिश होती है. बारिश होने पर मकड़ियां इस तरह का पतला और नाजुक जाल बुनती हैं, इनके सहारे वो करीब 100 किलोमीटर तक की दूरी तय कर लेती हैं.

काफी हल्का होने के कारण ये जाल पेड़-पौधे, लंबी घास से चिपक जाते हैं और उसके सहारे मकड़ियां को ऊपर चढ़ने में मदद मिलती है. मकड़ियों ने मिलकर ये काम इतने बड़े स्तर पर किया है कि ये जाल काफी बड़ा और फैला हुआ दिख रहा है.

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