US Army की मदद करने वालों पर टूटेगा कहर, Taliban ने तैयार की 'Kill List’, घर-घर जाकर तलाशी ले रहे लड़ाके
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US Army की मदद करने वालों पर टूटेगा कहर, Taliban ने तैयार की 'Kill List’, घर-घर जाकर तलाशी ले रहे लड़ाके

अफगानिस्तान में जो कुछ हो रहा है, उससे ज्यादा बुरा होने वाला है. तालिबान ने उन लोगों की लिस्ट तैयार की है, जिन्होंने पिछले 20 सालों में अमेरिकी सेना और अशरफ गनी सरकार की मदद की. उसके आतंकी घर-घर जाकर ऐसे लोगों की तलाश कर रहे हैं, ताकि उन्हें मौत के घाट उतारा जा सके. 

US Army की मदद करने वालों पर टूटेगा कहर, Taliban ने तैयार की 'Kill List’, घर-घर जाकर तलाशी ले रहे लड़ाके

काबुल: अफगानिस्तान (Afghanistan) की राजधानी काबुल पर कब्जे के बाद तालिबान (Taliban) का पहला मिशन उन लोगों को ढूंढ-ढूंढकर खत्म करना है, जिन्होंने अमेरिकी सेना या सरकार का समर्थन किया था. इसके लिए तालिबान ने बाकायदा ‘किल लिस्ट’ (Kill List) तैयार की है और उसके लड़ाके घर-घर जाकर संबंधित लोगों की तलाश कर रहे हैं. करीब 20 साल बाद सत्ता में लौटा तालिबान हर उस व्यक्ति को सजा देना चाहता है, जिसने उसके खिलाफ जाकर अमेरिकी सेना की मदद की.    

ये लोग हैं निशाने पर

‘द सन’ की रिपोर्ट के अनुसार, राजधानी काबुल में तालिबानी लड़ाके घर-घर जाकर अमेरिकी सेना (US Army) की मदद करने वालों को तलाश रहे हैं. इसमें पुलिस, सैन्यकर्मी, सरकारी अधिकारी, विदेशी NGO से जुड़े कार्यकर्त्ता और पत्रकार शामिल हैं. काबुल में फंसे ‘रेडियो फ्री यूरोप’ के पत्रकार सैयद मुस्तफा काजमी ने भी तालिबान के इस ऑपरेशन की जानकारी दी है. उन्होंने अपने ट्वीट में बताया है कि तालिबान अब अपने दुश्मनों की तलाश कर रहा है. 

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Journalists के घर की तलाशी

उन्होंने लिखा है, ‘तालिबानी आतंकी सरकारी अधिकारियों, पूर्व पुलिस और सैन्यकर्मियों, विदेशी गैर सरकारी संगठनों या अफगानिस्तान के विकास के लिए काम करने वालों की तलाश में घर-घर जा रहे हैं. कुछ वक्त पहले तक कम से कम तीन पत्रकारों के घर की तलाशी ली जा चुकी थी. काबुल में रहना अब घातक होता जा रहा है. किसी को नहीं पता कि आगे क्या होगा, हम सभी के लिए दुआ करें’.

Women की भी तैयार की गई लिस्ट

तालिबान ने उन महिलाओं की भी लिस्ट तैयार की है, जो सरकार और मीडिया के साथ काम कर रही थीं. काबुल की सड़कों पर तालिबानी आतंकी तैनात हैं और हर आने-जाने वाले की तलाशी हो रही है. कलाकारों को सरेआम पीटा जा रहा है, उनके इंस्ट्रूमेंट तोड़े जा रहे हैं. बता दें कि तालिबान के राज में न महिलाओं के कोई अधिकार होते हैं और न ही कलाकारों के लिए कोई जगह. यही वजह है कि अफगानी महिलाएं अपने भविष्य को लेकर सबसे ज्यादा चिंतित हैं.

‘44,000 Afghans को बचाना जरूरी’

ऑस्ट्रेलियाई गैर सरकारी संगठन Forsaken Fighters ने बताया कि उसके लिए काम करने वाले एक दुभाषिए को कंधार में तालिबान ने बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया. तालिबान हर उस व्यक्ति को मारने का इरादा रखते हैं, जो किसी न किसी रूप में विदेशी संस्थानों से जुड़ा था. वहीं, अफगान युद्ध में शामिल रहे पूर्व अमेरिकी सैन्य अधिकारी मैट जेलर ने कहा कि 20 साल के संघर्ष के दौरान वॉशिंगटन की मदद करने वाले लगभग 44,000 अफगानों को बचाया जाना चाहिए. 

Kandahar Stadium में Public Executions

अमेरिका में अफगानी नागरिकों की बसने में मदद करने वाली संगठन ‘नो वन लेफ्ट बिहाइंड’ के को-फाउंडर जेलर ने अल जज़ीरा से बातचीत में कहा कि काबुल से आ रही खबरें भयानक हैं. वहीं, कंधार स्टेडियम में लोगों को मौत के घाट उतारा जा रहा है. यूएस आर्मी के लिए काम करने वाले Interpreters सबसे ज्यादा खौफ में हैं, क्योंकि तालिबानी उन्हें अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानते हैं. काबुल पर तालिबानी कब्जे के बाद ये Interpreters अपने परिवार सहित अंडरग्राउंड हो गए हैं. वो अमेरिका सहित पश्चिमी देशों से मदद की गुहार लगा रहे हैं. 

 

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