close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

भारत-चीन एक ही स्रोत से आतंकी खतरे का सामना कर रहे हैं: PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पाकिस्तान के आतंकी नेटवर्क का परोक्ष संदर्भ देते हुए शुक्रवार को कहा कि भारत और चीन बढ़ते उग्रवाद और आतंकवाद का सामना कर रहे हैं जिनका स्रोत एक ही क्षेत्र है।

भारत-चीन एक ही स्रोत से आतंकी खतरे का सामना कर रहे हैं: PM मोदी

बीजिंग : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पाकिस्तान के आतंकी नेटवर्क का परोक्ष संदर्भ देते हुए शुक्रवार को कहा कि भारत और चीन बढ़ते उग्रवाद और आतंकवाद का सामना कर रहे हैं जिनका स्रोत एक ही क्षेत्र है।

मोदी ने यहां सिंघहुआ विश्वविद्यालय में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत और चीन अपने ‘साझा पड़ोस’ से अस्थिरता का सामना कर रहे हैं जो सुरक्षा को खतरा पैदा करने के साथ ही दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को धीमा कर सकता है।

उन्होंने कहा, हम दोनों उस उग्रवाद और आंतकवाद की बढ़ती लहर से उठे खतरे का सामना कर रहे हैं, जिसका क्षेत्र एक ही है। उनका इशारा पाकिस्तान से पैदा उस सीमा पारीय आतंकवाद की ओर था जिसका सामना भारत और चीन कर रहे हैं।

मुंबई के 26/11 जैसे हमले के स्रोत अक्सर पाकिस्तान में होते हैं और उसी तरह चीन के शिनजियांग प्रांत में अशांति की वारदात की घटनाओं के सिरे भी कई बार पाकिस्तान के आतंकवादी प्रशिक्षण शिविरों में मिलते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, हमें आतंकवाद के बदलते स्वरूप से भी निपटना होगा जो अब काफी छितरा हुआ है और जिसका पूर्वानुमान लगाना कठिन है।

इससे पहले चीन के प्रधानमंत्री के साथ वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान में नरेन्द्र मोदी और ली क्विंग ने आतंकवाद के मुद्दे पर साझी चिंता व्यक्त की और करीबी सहयोग करने की जरूरत पर सहमति जतायी। मोदी ने कहा, ‘आतंकवाद हमारे समक्ष साझा खतरा है। पश्चिम एशिया में अस्थिरता हमारे दोनों के समक्ष अहम विषय है। अफगानिस्तान में शांति एवं विकास से हम दोनों को लाभ होगा।’

दोनों देशों ने आतंकवाद की निंदा करने और सभी स्वरूपों में विरोध करने का संकल्प व्यक्त किया और आतंकवाद विरोधी प्रयास में सहयोग करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। संयुक्त बयान में कहा गया है कि दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि आतंकवाद को उचित नहीं ठहराया जा सकता और सभी देशों एवं निकायों से आतंकवादी नेटवर्क एवं उनके वित्त पोषकों को ध्वस्त करने एवं सीमा पार आतंकी गतिविधियों को रोकने के लिए गंभीरता से मिलकर काम करने का आग्रह किया।

इन्होंने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर समग्र संधि पर बातचीत को जल्द से जल्द पूरा करने की जरूरत बतायी।