Corona का एक और Variant आया सामने, अब तक 29 देशों में फैल चुका है ‘Lambda’, WHO खतरे के आकलन में जुटा

विश्व स्वास्थ्य सगठन ने लैम्ब्डा (Lambda) को ‘वेरिएबल ऑफ इंटरेस्ट’ के रूप में वर्गीकृत किया है. पर्याप्त अध्ययन के बाद इसे ‘वेरिएबल ऑफ कंसर्न’ में शामिल करने पर निर्णय लिया जाएगा. ‘वेरिएबल ऑफ कंसर्न’ का सबसे ताजा उदाहरण डेल्टा (Delta) वैरिएंट है, जिसे पहली बार भारत में पहचाना गया था.  

Corona का एक और Variant आया सामने, अब तक 29 देशों में फैल चुका है ‘Lambda’, WHO खतरे के आकलन में जुटा
फाइल फोटो: रॉयटर्स

जिनेवा: कोरोना वायरस (Coronavirus) के एक और रूप की पहचान हुई है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि लैम्ब्डा (Lambda) नामक COVID-19 के नए वैरिएंट की पहचान की गई है, जो अब तक 29 देशों में फैल चुका है. WHO ने कहा कि नया वैरिएंट सबसे पहले अगस्त 2020 में पेरू (Peru) में मिला था, तब से अब तक ये लैटिन अमेरिका, अर्जेंटीना और चिली सहित 29 देशों में पहुंच चुका है. 

Variables of Concern के रूप में वर्गीकृत

हमारी सहयोगी वेबसाइट WION में छपी खबर के अनुसार, WHO ने लैम्ब्डा (Lambda) को ‘वेरिएबल ऑफ इंटरेस्ट’ (Variable of Interest) के रूप में वर्गीकृत किया है. संगठन का कहना है कि ‘वेरिएबल ऑफ कंसर्न’ (Variables of Concern) के रूप में वर्गीकृत करने से पहले इस वैरिएंट की प्रकृति और संक्रामकता शक्ति की निगरानी की जाएगी. पर्याप्त अध्ययन के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि कोरोना का नया रूप कितना घातक है. 

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दो Categories में होते हैं Variants

वैरिएंट को दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है: ‘वेरिएबल ऑफ कंसर्न’ (Variables of Concern) महामारी संबंधी समस्याएं (Epidemiological Problems) उत्पन्न कर सकते हैं. सीधे शब्दों में कहें तो इसमें तेज गति से फैलने और बड़ी संख्या में लोगों को संक्रमित करने की क्षमता होती है. जबकि ‘वेरिएबल ऑफ इंटरेस्ट’ (Variable of Interest) में यह क्षमता नहीं होती. बता दें कि इससे पहले, डब्ल्यूएचओ अल्फा, बीटा, गामा और डेल्टा वैरिएंट को ‘वेरिएबल ऑफ कंसर्न’ के रूप में वर्गीकृत कर चुका है.

Delta Variant है सबसे ताजा उदाहरण 

‘वेरिएबल ऑफ कंसर्न’ का सबसे हालिया उदाहरण डेल्टा (Delta) वैरिएंट है, जिसे पहली बार भारत में पहचाना गया था. 11 मई, 2021 को पहचान के साथ इसे ‘वेरिएबल ऑफ इंटरेस्ट’ के रूप में वर्गीकृत किया गया था. लेकिन बाद में दुनिया भर में इसके तेजी से प्रसार को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन को इसे ‘वेरिएबल ऑफ़ कंसर्न’ के तौर पर वर्गीकृत करने को मजबूर होने पड़ा.

 

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