'सावरकर न होते तो 1857 की क्रांति पहला स्वतंत्रता संग्राम नहीं बनता'

भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में सावरकर को भारत रत्न देने का मुद्दा क्या शामिल किया, हर तरफ सियासी संग्राम और तीखी बयानबाजी का सिलसिला शुरू हो गया. इस बीच अमित शाह ने सावरकर का जिक्र करते हुए ये कह दिया कि भारतीय इतिहास का भारतीय दृष्टिकोण से पुनर्लेखन जरूरी है.

'सावरकर न होते तो 1857 की क्रांति पहला स्वतंत्रता संग्राम नहीं बनता'

नई दिल्ली: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने अपना सबसे बड़ा दांव खेला और अपने संकल्प पत्र में वीर सावरकर को भारत रत्न देने का मुद्दा शामिल किया. जिसके बाद से देशभर में सियासी पारा हाई होता जा रहा है. विरोधी जहां, भाजपा के इस मास्टरस्ट्रोक की कमी निकालने में जुटे हुए हैं, तो वहीं अब भाजपा अध्यक्ष और गृहमंत्री अमित शाह ने खुद मोर्चा संभाल लिया है.

अमित शाह ने क्या कहा?

दरअसल, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने कहा कि 'वीर सावरकर न होते तो 1857 की क्रांति भी इतिहास न बनती, उसे भी हम अंग्रेजों की दृष्टि से ही देखते. वीर सावरकर ने ही 1857 की क्रांति को पहला स्वतंत्रता संग्राम का नाम दिया.'

इसके साथ ही शाह ने ये भी कहा कि 'भारतीय इतिहास का भारतीय दृष्टिकोण से पुनर्लेखन जरूरी है. मोदी जी के नेतृत्व में आज देश फिर से एक बार अपनी गरिमा पुन: प्राप्त कर रहा है. पूरी दुनिया के अंदर भारत दुनिया के अंदर सबसे बड़ा लोकतंत्र है इसकी स्वीकृति आज जगह-जगह पर दिखाई पड़ती है. पूरी दुनिया आज भारत के विचार को महत्व देती है.'

और शुरू हो गई 'जुबानी जंग'

सावरकर के नाम पार भाजपा और विरोधी दलों के बीच वर-पलटवार का सिलसिला बादस्तूर जारी है. कभी ओवैसी तो कभी कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह, एक के बाद एक लगातार कई नेताओं ने भाजपा को इस मसले पर घेरने की कोशिश की. लेकिन, भाजपा भी विपक्ष दलों का लगातार मुंहतोड़ जवाब दे रही है. अमित शाह ने इतिहास की बात कही तो वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विरोधियों को आईना दिखाया.

विपक्ष को पीएम की लताड़

पीएम मोदी ने कहा कि 'ये वीर सावरकर के ही संस्कार हैं, जो राष्ट्रवाद को हमने राष्ट्र निर्माण के मूल में रखा है. वहीं दूसरी तरफ कौन हैं, जरा एक-एक चेहरा याद कीजिए. ये वो लोग हैं जो वीर सावरकर को आए दिन गालियां देते हैं, उनका अपमान करते हैं.'

दो दिन में महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए चल रहा प्रचार का दौर थम जाएगा. ऐसे में सभी सियासी पार्टिया और सियासतदान अपनी एड़ी-चोटी का जोर लगाने में जुटे हुए हैं.