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अब महाराष्ट्र में गवर्नर ने भाजपा से पूछा, क्या सरकार बनाना चाहेंगे

महाराष्ट्र में राजनीतिक घटनाक्रम ने एक बार फिर करवट ली है. राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने भारतीय जनता पार्टी को सबसे बड़ा दल होने के नाते सरकार बनाने का न्यौता दिया है. जिसकी वजह से राजनीतिक हलचलें तेज हो गई हैं. 

अब महाराष्ट्र में गवर्नर ने भाजपा से पूछा, क्या सरकार बनाना चाहेंगे

मुंबईः महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर बना हुआ गतिरोध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. 24 अक्टूबर को चुनाव के नतीजे आने के करीब 15 दिन बाद भी सरकार गठन पर कोई सहमति नहीं बन सकी है. इस तरह यह चुनावी दंगल लगातार दिलचस्प होता जा रहा है. भाजपा और शिवसेना के एक-दूसरे पर आरोप लगाने के जारी दौर के बीच शनिवार को गवर्नर ने भी इस दिलचस्प बना दिया. गवर्नर भगत सिंह कोश्‍यारी ने शनिवार शाम को भाजपा से पूछा है कि क्या वह महाराष्ट्र में सरकार बनाने की इच्छा और क्षमता रखती है? इससे पहले देवेंद्र फडणवीस शुक्रवार को ही मुख्‍यमंत्री पद से इस्‍तीफा दे चुके हैं.

राजभवन की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक कहा गया है कि राज्य के गवर्नर बीएस कोश्यारी ने फडणवीस से पूछा है कि क्या उनकी पार्टी के पास राज्य में सरकार बनाने की क्षमता है, साथ उन्होंने भाजपा की ऐसी इच्छा भी पूछी है. अभी तक किसी भी पार्टी ने राज्य में सरकार बनाने का दावा नहीं किया है, ऐसे में गवर्नर ने खुद ही राज्य में नई सरकार की संभावनाएं खोजने का फैसला लिया है. फडणवीस से जुड़े सूत्रों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि गवर्नर की तरफ से उन्हें पत्र मिल गया है.

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शिवसेना ने किया स्वागत, लेकिन खरीद-फरोख्त का डर
शिवसेना ने कोश्यारी के फैसले का स्वागत किया है. शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि यह एक निर्धारित प्रक्रिया है, जिसके तहत गवर्नर ने भाजपा से सरकार बनाने की इच्छा पूछे जाने का पालन किया है. शिवसेना इसका स्वागत करती है. राउत ने कहा, कम से कम राज्यपाल ने राज्य में नई सरकार की संभावनाओं की प्रक्रिया तो शुरू की. भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है, इसलिए पहली दावेदारी उसी की बनती है. हालांकि शिवसेना को विधायकों के खरीद फरोख्‍त का भी डर है. खरीद फरोख्त के डर से ही शिवसेना ने अपने विधायकों को बांद्रा के रंगशारदा होटल से माध आइलैंड के किसी रिजॉर्ट में 15 नवंबर तक शिफ्ट कर दिया है. 

फ्लोर टेस्ट में भाजपा की खिलाफत करेगी एनसीपी
इसी तरह कांग्रेस ने भी अपने विधायकों को जयपुर के एक रिजॉर्ट में भाजपा की खरीद-फरोख्त से डरते हुए शिफ्ट कर दिया है. दूसरी ओर इस बारे में एनसीपी ने कहा कि गवर्नर को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भाजपा के पास बहुमत है या नहीं, नहीं तो विधायकों की खरीद-फरोख्त शुरू हो जाएगी. उ

न्होंने कहा कि अगर भाजपा फिलहाल सरकार बना भी लेती है तो एनसीपी फ्लोर टेस्ट में भाजपा के खिलाफ वोट करेगी. अगर भाजपा सरकार गिरती है तो हम एक वैकल्पिक सरकार बनाने की कोशिश करेंगे.

मेरे सामने नहीं हुआ साझेदारी पर समझौताः फडणवीस
इससे पहले शिवसेना ने दावा किया था कि लोकसभा चुनावों से पहले दोनों गठबंधन सहयोगियों ने अगले कार्यकाल में ढाई-ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद की साझेदारी का फैसला किया था. इस्तीफा देने के बाद शिवसेना के दावों को खारिज करते हुए फडणवीस ने जोर देकर कहा था कि मेरी मौजूदगी में दोनों दलों में मुख्यमंत्री पद की साझेदारी को लेकर कोई समझौता नहीं किया गया था.

फडणवीस ने दावा किया था कि उन्होंने शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से गतिरोध तोड़ने के लिए फोन पर बात करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने मेरा फोन नहीं उठाया. 

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महाराष्ट्र में 24 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के 15 दिन बाद भी सरकार गठन पर कोई सहमति नहीं बनी है. बीजेपी और शिवसेना के बीच मुख्यमंत्री के पद को लेकर खींचतान के कारण उनके पास संयुक्त रूप से 161 विधायकों के साथ बहुमत से अधिक का आंकड़ा होने के बावजूद सरकार गठन पर गतिरोध बना हुआ है. महाराष्ट्र में 288 सदस्यीय सदन में बहुमत का आंकड़ा 145 है. विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 105 सीट, शिवसेना ने 56, एनसीपी ने 54 और कांग्रेस ने 44 सीट जीती हैं.