शिवसेना का नया दांव अजित पवार को ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री बनने का ऑफर !

एक तरफ तो शिवसेना महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए कोर्ट के दरवाजे तक पहुंच गई है, वहीं दूसरी ओर गैर-भाजपा सरकार बनाने के लिए इतनी बेचैन है कि भाजपा से जा मिले अजित पवार के साथ रोटेशनल मुख्यमंत्री पद यानी की ढाई-ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री बनने के लिए भी तैयार हो गई है.  

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Nov 25, 2019, 07:08 PM IST
    • अलग-अलग होटल में ठहराए गए हैं पार्टियों के विधायक
    • संख्याबल को सुरक्षित रखने पर है सभी पार्टियों की नजर
    • कांग्रेस और एनसीपी विधायकों पर है खास नजर

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शिवसेना का नया दांव अजित पवार को ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री बनने का ऑफर !

मुबंई: शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस के गठबंधन वाली सरकार बनने ही जा रही थी कि भाजपा ने झटका देते हुए अजित पवार को अपने पाले में खीच लिया. अब शिवसेना अजित पवार को वापस लाने के लिए नए-नए पैंतरे अपना रही है. सूत्रों के हवाले से मिली खबर के मुताबिक शिवसेना अजित पवार को ढाई साल के लिए सीएम पद देने को तैयार है, अगर वे भाजपा का साथ छोड़ वापस आ जाते हैं तो. फिलहाल आज सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पूरी की जा चुकी है. कल यानी की मंगलवार को इस पर फैसला आने वाला है. इस बीच शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस ने अपने विधायकों को होटल हयात में आज एक साथ बुलाया है. जिससे कि वे पार्टी की बहुमत का फैसला कर सकें. 

अलग-अलग होटल में ठहराए गए हैं पार्टियों के विधायक

शिवसेना नेता सुभाष देसाई ने कहा था कि वे शिवसैनिकों से नजीदीकी बनाए हुए हैं. अब तक अलग-अलग होटल में ठहराए गए शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी के विधायकों को किसी से मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही है. विधायकों की सुरक्षा के प्रबंध भी चाक-चौबंद रखे हुए हैं. शिवसेना की ओर से यह जिम्मेदारी मिलिंद नार्वेकर संभाल रहे हैं. 

संख्याबल को सुरक्षित रखने पर है सभी पार्टियों की नजर

मालूम हो कि महाराष्ट्र की राजनीति अब विधायकों की संख्या और फ्लोर टेस्ट पर ही टिकी है. ऐसे में सभी पार्टियां इस कोशिश में लगी हुईं हैं कि किसी तरह विधायकों को सुरक्षित रख संख्याबल को कम न होने दिया जाए. शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस सभी पार्टियों को डर है कि विधायकों की खरीद-फरोख्त का खेल भी चल सकता है. इसी बीच शिवसेना ने अजित पवार को गठबंधन का हिस्सा फिर से बनने के लिए ऑफर दिया है कि अगर वह बागी तेवर छोड़ कर शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस का साथ देंगे तो उन्हें भाजपा के साथ गठबंधन में रह कर उप-मुख्यमंत्री बने रहने के बजाए ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री बनने का मौका मिल सकता है. 

कांग्रेस और एनसीपी विधायकों पर है खास नजर

एनसीपी के विधायकों की जिम्मेदारी जितेंद्र अहवद को मिली थी. बताया जा रहा है कि उनकी विशेष नजर गणेश नाईक पर है जिन्होंने भाजपा से संपर्क साधने की कोशिश की थी. एनसीपी प्रमुख शरद पवार पार्टी के सभी विधायकों पर अपनी नजर बनाए हुए हैं. कांग्रेस के विधायकों पर नजर बनाए रखने की जिम्मेदारी पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण और पृथ्वीराज चव्हाण को मिली है. इनका भी कहना है कि बिना पार्टी के आलाकमान के आदेश के किसी भी विधायक से मिलने की अनुमति नहीं दी जाएगी. केंद्रिय स्तर पर इसकी जिम्मेदारी पार्टी के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल संभाले हुए हैं जो दिल्ली से ही टीम को निर्देश दे रहे हैं और तमाम जानकारियां ले रहे हैं.

 

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