झारखंड चुनावः निर्णायक लड़ाई में बागी बिगाड़ रहे हैं दलों का गणित

झारखंड में चुनाव का आखिरी चरण बाकी है और पांचवे चरण में सभी पार्टियां अपना दमखम झोंक चुकी हैं. चुनाव प्रचार थम गया है. अब बारी है तो बस कल होने वाले वोटिंग की और इसके बाद 23 दिसंबर को होने वाले वोटों के गिनती की. इस बीच पांचवें चरण का मुकाबला बागियों की वजह से काफी दिलचस्प बन गया है या हो सकता है कि यहीं निर्णायक भी हो.   

झारखंड चुनावः निर्णायक लड़ाई में बागी बिगाड़ रहे हैं दलों का गणित

रांची: पांचवे चरण में यानी 20 दिसंबर को 16 सीटों पर वोटिंग होने  वाली है. इनमें से ज्यादातर सीटें संथाल परगना क्षेत्र की ही हैं. वर्चस्व की बात करें तो यहां मुख्य रूप से भाजपा और झामुमो ही आमने-सामने होते हैं. लेकिन इस बार की लड़ाई बागियों की वजह से कुछ बदल सी गई है. चुनावी मैदान में अपने ही दलों से बगावत कर बैठे कुछ नेता इस बार काफी नुकसान पहुंचाने के मूड में हैं. हालांकि, यह तब संभव है जब जनता भी उनका ही साथ देगी. 

मोहत्याग कर गए प्रत्याशी बिगाड़ रहे हैं पार्टी का काम

झारखंड में शुरुआती चरण से ही कई विधानसभा सीटों पर बागियों ने पहले ही काम बिगाड़ने का काम कर दिया है. अभी तक के रूझानों की मानें तो ज्यादा नुकसान सत्ताधारी पार्टी भाजपा को हो रहा है जो इस बार किसी भी सहयोगी दल का साथ नहीं ले रही है. कई प्रत्याशियों में पार्टी से मोहत्याग कर निर्दलीय ही दावा ठोंक दिया है. ज्यादातर जीते हुए प्रत्याशी हैं. 

महागठबंधन की भी कम नहीं हैं मुश्किलें

भाजपा को अपने बागियों की वजह से नुकसान पहुंचाना पड़ सकता है इसका मतलब यह बिल्कुल भी नहीं कि महागठबंधन यानी झामुमो, कांग्रेस और राजद जैसी पार्टियां सेफ हैं. जरमुंडी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी का खेल बिगाड़ने के लिए बसपा ने संजयानंद झा को उतार दिया है.

वहीं निर्दलीय प्रत्याशी सीताराम पाठक भी इसी सीट से दावा ठोंक चुके हैं. कांग्रेस का असल वोटबैंक इन क्षेत्रों में ही था लेकिन पार्टी के दो बागी नेताओं ने इस सीच से उतरकर भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र कुंवर को थोड़ी बढ़त जरूर दे दी है. 

पाकुड़ में कांग्रेस को सता रहा है भीतरघात का डर 

बात करें पाकुड़ विधानसभा सीट की तो वहां कांग्रेस ने आलमगीर आलम को अपना प्रत्याशी बनाया था जो खुद ही के चक्रव्यूह में फंस गए हैं. कांग्रेस के हिस्से में आई इस सीट पर उसके ही सहयोगी दल झामुमो से बागी हो कर आजसू में शामिल हुए प्रत्याशी अकील अख्तर ने दावा ठोंक दिया है और चुनावी मुकाबले को दिलचस्प मोड़ पर ला खड़ा किया है. जाहिर है अंदरूनी भीतरघात की आशंका से कांग्रेस डरी हुई होगी. 

नाला में भाजपा के सहयोगियों ने  ही कर दिया है पार्टी को परेशान

नाला विधानसभा क्षेत्र जहां भाजपा के पुरानी सहयोगी और सहयोगी दल दोनों ही ने पार्टी का काम बिगाड़ने की पूरी तैयारी कर ली है. नाला से भाजपा के प्रत्याशी हैं सत्यानंद बाटुल और उनके खिलाफ उनके चुनावी विजय रथ को रोकने उतरे हैं आजसू से माधवचंद्र महतो और नेशनल पीपुल्स पार्टी के प्रवीण प्रभाकर. दिलचस्प बात यह  है कि प्रवीण भाजपा के प्रवक्ता रह चुके हैं और आजसू तो भाजपा की पुरानी सहयोगी दल. 

वहीं हाल शिकारीपाड़ा विधानसभा सीट का है जहां भाजपा प्रत्याशी पारितोष सोरेन के सामने हैं आजसू से श्याम मरांडी और झामुमो से नलिन सोरेन. जबकि कांग्रेस से नए-नए बागी बने नेता हाबिल मुर्मू ने भी ताल ठोंक दिया है. 

सिर्फ एक नहीं बोरिया, जामताड़ा और अन्य सीटों का भी यहीं हाल है. मालूम हो कि यह आखिरी चरण है. लेकिन संभावनाएं यह भी कम नहीं कि यह काफी निर्णायक चरण भी हो सकता है. इसलिए जहां सभी पार्टियों ने खूब जोर-आजमाइश की वहीं बागियों ने भी अपना महत्व दिखाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया.