भारतीय सेना का डबल धमाका, पराक्रम के साथ लहराई अविष्कार की पताका

भारतीय सेना के जांबाज जवान सिर्फ सरहदों पर गोलियों से और अपने पराक्रम से सेना का मान नहीं बढ़ाते बल्कि भारतीय सेना को सशक्त बनाने के लिए प्रयोग भी करते हैं. ऐसा ही एक प्रयोग सेना के जवान मेजर अनूप मिश्रा ने किया है. उन्होंने एक बुलेटप्रूफ जैकेट तैयार किया है, जिसे स्नाइपर भी नहीं भेद सकते. 

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Dec 24, 2019, 02:16 PM IST
    • स्नापर भी नहीं भेद पाएगा इस जैकेट को
    • सेना में हो रहे हैं नित नए प्रयोग
भारतीय सेना का डबल धमाका, पराक्रम के साथ लहराई अविष्कार की पताका

नई दिल्ली: भारतीय सेना विश्व की चौथी सबसे बड़ी सेना है. सुरक्षाबलों की संख्या के हिसाब से भी और उत्तम तकनीक व हथियारों के जखीरों के लिहाज से भी. पिछले दिनों भारतीय थलसेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत ने आर्मी तकनीकी विकास सेमिनार में कहा था कि भारतीय सेना लगातार नए-नए प्रयोग करते जा रही है. यह प्रयोग सिर्फ जरूरत के हिसाब से नहीं किया जा रहा है बल्कि पहल के हिसाब से भी किया जा रहा है. उसी का एक नमूना दिखाया सेना के मेजर अनूप मिश्रा ने. मेजर अनूप मिश्रा ने खुद ही एक बुलेटप्रूफ जैकेट को विकसित किया है. यह एक उच्च तकनीक की तैयार की गई सुरक्षाकवच है. 

स्नापर भी नहीं भेद पाएगा इस जैकेट को

मेजर अनूप मिश्रा ने इसे तैयार करने के बाद सेना को सुपूर्द करते हुए यह बताया कि इस सुरक्षाकवच यानी जैकेट के पहनने के बाद एक स्नाइपर राइफल से 10 मीटर की दूरी पर फायर करने के बाद भी पहनने वाले व्यक्ति को कोई नुकसान नहीं होता. मेजर अनूज मिश्रा ने यह प्रयोग खुद के ऊपर कर के दिखाया था. उन्होंने जम्मू कश्मीर में इस जैकेट को पहनने के बाद खुद के ऊपर स्नाइपर राइफल से गोली मरवा कर इसका परीक्षण किया था. 

सेना में हो रहे हैं नित नए प्रयोग

इसके बाद कल उन्हें भारतीय सेना के सेनाप्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत ने दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में मेजर मिश्रा को उनके इस तकनीकी योगदान के लिए सम्मानित भी किया था. उन्होंने कहा था कि आवश्यकता से नहीं बल्कि पहल के हिसाब से अविष्कार का जन्म होता है. भारतीय सेना में तकनीक का इस्तेमाल और हथियारों की खरीद-बिक्री भी हाल के दिनों में बढ़ाई गई है. 

 

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