लालू यादव ने जब बिहार चुनाव जीतने के लिए लिया था 'ओसामा बिन लादेन' का सहारा

भले ही लालू प्रसाद यादव अब बिगड़ते स्वास्थ्य के चलते राजनीति में उतने सक्रिय न हों, लेकिन एक वक्त था जब लालू यादव के पीछे लोगों का काफिला रहता था. कहा जाता है कि लालू यादव को जनता की नब्ज पकड़ना आता था. भीड़ जुटाने के लिए लालू अलग-अलग तरीके भी अपनाते थे. ऐसा ही एक तरीका लालू यादव ने साल 2005 के बिहार चुनाव के दौरान अपनाया था.

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Aug 12, 2022, 04:16 PM IST
  • रामविलास पासवान और लालू ने कराया प्रचार
  • 'लादेन की तरह दिखने के चलते होती थी पूछ'
लालू यादव ने जब बिहार चुनाव जीतने के लिए लिया था 'ओसामा बिन लादेन' का सहारा

नई दिल्लीः भले ही लालू प्रसाद यादव अब बिगड़ते स्वास्थ्य के चलते राजनीति में उतने सक्रिय न हों, लेकिन एक वक्त था जब लालू यादव के पीछे लोगों का काफिला रहता था. कहा जाता है कि लालू यादव को जनता की नब्ज पकड़ना आता था. भीड़ जुटाने के लिए लालू अलग-अलग तरीके भी अपनाते थे. ऐसा ही एक तरीका लालू यादव ने साल 2005 के बिहार चुनाव के दौरान अपनाया था. तब वो प्रचार के लिए आतंकी ओसामा बिन लादेन के हमशक्ल को अपने साथ लेकर चलते थे.

ओसामा से मिलती है मिराज खालिद नूर की शक्ल
दरअसल, मिराज खालिद नूर नामक शख्स की शक्ल कुख्यात आतंकी ओसामा बिन लादेन से मिलती है. ऐसे में लालू यादव ने साल 2005 के चुनाव के दौरान प्रचार के लिए उनका इस्तेमाल किया. तब विपक्षी दल आरोप लगाते थे कि मुस्लिमों को आकर्षित करने के लिए खालिद नूर का इस्तेमाल किया गया. 

रामविलास पासवान और लालू ने कराया प्रचार
लालू यादव से पहले साल 2004 में लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) से रामविलास पासवान ने भी प्रचार के लिए नूर का इस्तेमाल किया. लंबे कद और लंबी दाढ़ी वाले नूर सिर पर पगड़ी बांधने पर ओसामा बिन लादेन के हमशक्ल दिखते हैं. 

'लादेन की तरह दिखने के चलते होती थी पूछ'
'न्यूज 18' की साल 2009 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नूर कहते हैं कि ओसामा बिन लादेन की तरह दिखने के चलते ही राजनीतिक पार्टियां उन्हें पूछती थी. क्योंकि न उन्हें भाषण देना आता और न ही उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि है. वह तो व्यापार से राजनीति में आए थे. हालांकि, लोग अब उनका असली नाम भूल गए और उन्हें लादेन कहकर बुलाते हैं. 

'मेरा इस्तेमाल किया गया और किनारे लगा दिया गया'
भले ही 2004 और 2005 के चुनाव में नूर का इस्तेमाल प्रचार के लिए किया गया हो. लेकिन इसके बाद के चुनाव में उनकी कोई पूछ नहीं रही. 'आज तक' की साल 2014 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नूर ने कहा था कि उनके पास कोई राजनीतिक काम नहीं है. अब उन्हें कोई नहीं पूछता. उनका इस्तेमाल किया गया और किनारे लगा दिया गया. 

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