निर्भया के दोषियों की सुनवाई 24 जनवरी तक नहीं टलेगी, आज ही होगी

कल तक तो ये तय हुआ था कि सुनवाई 24 जनवरी को की जायेगी, किन्तु आज कोर्ट का मन बदल गया लगता है..  

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Dec 19, 2019, 01:59 PM IST
    • निर्भया के दोषियों की सुनवाई आज ही होगी
    • कोर्ट ने बदला अपना फैसला
    • दिल्ली हाईकोर्ट कर रहा है आज ही सुनवाई
    • पवन के वकील ने नए दस्तावेज के लिए वक्त माँगा था
    • मामले के वक्त खुद को बताया नाबालिग बताया पवन ने
    • पवन की दरख्वास्त - ट्रायल कोर्ट ने गलत तरीके से काम किया
निर्भया के दोषियों की  सुनवाई 24 जनवरी तक नहीं टलेगी, आज ही होगी

नई दिल्ली.  निर्भया गैंगरेप मामले में सुनवाई अपने आखिरी छोर को छू रही है. ऐसे में कल तक हालत ये थी कि सुनवाई को अगली तारीख के लिए अगले साल तक टाल दिया गया था. किन्तु आज हालत बदल गई है और सुनवाई आज ही होने की जानकारी प्राप्त हुई है.

कोर्ट ने बदला अपना फैसला

आज अदालत ने अपना कल वाला फैसला वापस ले लिया है और  निर्भया के दोषी की याचिका पर सुनवाई अब 24 जनवरी को नहीं होगी बल्कि आज ही होगी. 

दिल्ली हाईकोर्ट कर रहा है आज ही सुनवाई 

निर्भया गैंगरेप केस में दोषी पवन कुमार गुप्ता की याचिका पर सुनवाई के लिए पांच दिन की प्रतीक्षा नहीं करनी होगी. निर्भया के वकील ने आगे बढ़कर मामले पर दखल दी जिसे स्वीकार करते हुए अदालत ने आज ही सुनवाई करने का फैसला किया है.

पवन के वकील ने नए दस्तावेज के लिए वक्त माँगा था 

दिल्ली है कोर्ट में अपराधी पवन के वकील नया दस्तावेज पेश करने के लिए समय माँगा था जिसे स्वीकार करते हुए अदालत ने 24 तारीख तक सुनवाई मुल्तवी कर दी थी. 

 मामले के वक्त खुद को बताया नाबालिग बताया पवन ने 

जो याचिका निर्भया के अपराधी पवन ने दिल्ली हाईकोर्ट में दायर की है उसमें मामले के समय वर्ष 2012 में खुद को नाबालिग बताया है. उसकी अपील है कि चूंकि वह उस समय नाबालिग था इसलिए उसके ऊपर किशोर न्याय कानून इस्तेमाल किया जाए.

पवन की दरख्वास्त - ट्रायल कोर्ट ने गलत तरीके से काम किया

फांसी के फंदे से ज़रा से ही दूर निर्भया गैंगरेप मामले में फांसी की सजा पाए पवन गुप्ता अपनी जान बचाने के लिए पूरा ज़ोर लगा रहा है. उसने अपनी याचिका में दावा किया कि जबकि दिसंबर 2012 में हुई वारदात के समय वह नाबालिग था, ट्रायल कोर्ट ने गलत तरीके से उसके खिलाफ काम किया और उसके ऊपर बालिगों वाला क़ानून लगा कर ट्रायल कोर्ट ने एक नाबालिग के तौर पर उसके अधिकारों का हनन किया है.

 

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