नागरिकता क़ानून और NRC के बाद अब आ रहा है NPR

अब अगला नंबर है एनपीआर अर्थात नेशनल पापुलेशन रजिस्टर का जिसकी तैयारी पहले ही शुरू हो चुकी है..  

नागरिकता क़ानून और NRC के बाद अब आ रहा है NPR

नई दिल्ली. मोदी सरकार राष्ट्र-हित के लिए हर खतरा उठा रही है. इससे फर्क नहीं पड़ता कि कितनी राष्ट्रविरोधी शक्तियां सरकार के कदमों का विरोध करती हैं और विरोध करते हुए किस हद तक जाती हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में वाली ये सरकार हर राष्ट्रवादी फैसला लेते समय अपनी निडर सकारात्मक सोच का परिचय दे रही है.

नागरिकता को ले कर कई स्तरों पर कार्य चल रहा है सरकार का 

नागरिकता को लेकर भारत की राष्ट्रवादी सरकार किसी दबाव में नहीं है. नागरिकता क़ानून के विरुद्ध देशव्यापी प्रदर्शनों से भी सरकार ने अपनी योजनाओं में कोई काट-छांट नहीं की है. नागरिकता संशोधन कानून और NRC के बाद अब बारी है NPR की 

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क्या है एनपीआर 

एनपीआर अर्थात नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर. यह भारत की जनगणना की प्रक्रिया होगी. इसके अंतर्गत प्रयास ये जनगणना सही हो और पूरी हो ताकि देश के लोगों का सही आंकड़ा सामने आ सके. इस हेतु देश के हर घर के दरवाजे पर जाकर उनसे जनगणना संबंधी जानकारी ले कर एनपीआर में डाली जायेगी. 

क्या विशेष है एनपीआर में 

पहली बार देश में सटीक जनगणना के लिए डिजिटल गैजेट्स का इस्तेमाल किया जाएगा जिसमें बायोमेट्रिक का उपयोग करते हुए लोगों की वंशावली का भी विवरण दर्ज होगा ताकि इस बार जनगणना में कोई खामी न रहे और अगली बार होने वाली जनगणना में इन आंकड़ों का विवरण पुष्टि करने के लिए काम आ सके. 

स्वतंत्र भारत की प्रथम जनगणना हुई थी 1951 में 

आजादी के बाद देश में पहली बार जनगणना का कार्य 1951 में हुआ था. तबसे प्रति-दस वर्षों में जनगणना की जाती है. इस बार अप्रैल में शुरू होने वाली जनगणना की प्रक्रिया पर असम के अतिरिक्त सारे भारत में कार्य किया जाएगा.