काला जादू, अंधविश्वास और जबरन धर्मांतरण के खिलाफ दायर याचिका पर SC का सुनवाई से इनकार

देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने काला जादू, अंधविश्वास और जबरन धर्मांतरण के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है.

Written by - Sumit Kumar | Last Updated : Apr 9, 2021, 12:17 PM IST
  • काला जादू के खिलाफ सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट का इनकार
  • अदालत ने कहा- ये नुकसान पहुंचाने वाली याचिका है
काला जादू, अंधविश्वास और जबरन धर्मांतरण के खिलाफ दायर याचिका पर SC का सुनवाई से इनकार

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने काला जादू, अंधविश्वास और जबरन धर्मांतरण के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है. याचिका पर सुनवाई के दौरान नाराज सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये किस तरह की याचिका है? हम आप पर जुर्माना ला देंगे, ये नुकसान पहुंचाने वाली याचिका है.

याचिकाकर्ता ने वापस ली याचिका

कोर्ट ने कहा कि याचिका प्रचार के मकसद से दाखिल की गई है. जस्टिस नरीमन ने कहा कि 18 से अधिक उम्र के लोगों को अपना धर्म चुनने का अधिकार संविधान देता है. कोर्ट की फटकार के बाद याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस ले ली.

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी जिसमें अंधविश्वास, काले जादू और अवैध और जबरन धर्मांतरण पर रोक लगाने की मांग की गई थी. बीजेपी नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने ये याचिका दायर की थी. याचिका में कहा गया था कि पूरे देश में हर हफ्ते जबरन धर्म परिवर्तन की घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है, समाजिक और आर्थिक स्थिति से कमजोर लोगों का जबरन धर्मांतरण किया जा रहा है.

याचिका में ये भी कहा था कि सरकारें ऐसे लोगों के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाने में नाकाम रही है. इसके अलावा याचिका में कहा गया था कि जबरन धर्मांतरण न केवल संविधान के अनुच्छेद 14, 21, 25 का उल्लंघन करता है बल्कि धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों के भी खिलाफ है जो संविधान के मूल ढांचे का अभिन्न अंग है.

यूपी और एमपी के कानून को SC में दी गई थी चुनौती

धर्म परिवर्तन के खिलाफ उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश सरकार द्वारा बनाए गए कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. पहले तो सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून पर रोक लगाने से इंकार करते हुए यूपी और एमपी सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था, लेकिन बाद में कुछ और याचिकाओं के आने के बाद सीजेआई एसए बोबड़े ने याचिकाकर्ताओं को हाई कोर्ट जाने को कहा था. सुप्रीम कोर्ट का मानना था कि पहले हाईकोर्ट इस मसले को सुने और अपना मत दे फिर मामला अगर सुप्रीम कोर्ट आएगा तो इस पर विचार किया जाएगा.

'हाईकोर्ट का मत देखना जरूरी'

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में वह हाईकोर्ट का मत देखना चाहता है लिहाजा याचिकाकर्ता मामले में हाईकोर्ट का रुख कर सकता है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता की इस मामले में दाखिल याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी थी और इस बात की अनुमति दी थी कि वह मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर सकते हैं.

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