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दिवंगत जयललिता की सहेली शशिकला की 1600 करोड़ की बेनामी संपत्ति जब्त

 शशिकला पर 1996 से आय से अधिक संपत्ति के मामले में एक केस चल रहा था. यह मामला मुख्यमंत्री रहीं जयललिता पर भी जारी था, लेकिन दिसंबर 2016 में निधन के बाद उन्हें इससे बरी कर दिया गया. इधर शशिकला सीएम कुर्सी की तरफ बढ़ रही थीं कि 14 फरवरी 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें व दो अन्य को इस मामले में दोषी करार दिया. लिहाजा शशिकला को जेल मिली.

दिवंगत जयललिता की सहेली शशिकला की 1600 करोड़ की बेनामी संपत्ति जब्त

नई दिल्लीः आयकर विभाग ने तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा नाम रहीं शशिकला पर मंगलवार को शिकंजा कसा है. विभाग ने एआईएडीएमके की पूर्व महासचिव वीके शशिकला की 1600 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्ति जब्त कर ली. अफसरों के मुताबिक नवंबर 2016 में नोटबंदी के तुरंत बाद शशिकला ने चेन्नई, पुड्‌डुचेरी और कोयम्बटूर में संपत्तियां खरीदी थीं. इस वक्त शशिकला भ्रष्टाचार के मामले में चार साल की जेल काट रही हैं. सूत्रों ने बताया कि शशिकला पर आरोप है कि उन्होंने नोटबंदी के दौरान पुराने नोटों से काल्पनिक नामों से करीब 1500 करोड़ रुपये की संपत्ति जुटाई थी. आयकर विभाग ने 2017 में शशिकला और अन्य के खिलाफ ऑपरेशन क्लीन मनी के तहत उनके ठिकानों पर छापेमारी की थी. इस दौरान बेनामी संपत्ति का पता चला था. अधिकारियों ने इसे लेकर शशिकला से पूछताछ भी की थी. तमिलनाडु में शशिकला की अब तक की भूमिका पर डालते हैं नजर

जयललिता की रही थीं करीबी



5 दिसंबर 2016 को तमिलनाडु की सीएम रहीं जे. जयललिता का निधन हो गया. अम्मा के नाम से मशहूर जयललिता की सबसे करीबी रहीं थी शशिकला और उनके निधन के बाद एआईएडीएमके की बागडोर भी संभाली. मौत के बाद शशिकला नटराजन को पार्टी का नया जनरल सेक्रेट्री बनाया गया है. इससे पहले 27 वर्ष तक एआईएडीएमके के जनरल सेक्रेट्री का पद जयललिता के पास था. इस पद पर काबिज होने के बाद शशिकला ने ऐलान किया कि वह बिल्कुल जयललिता की तरह ही काम करेंगी. इसके बाद एआईएडीएमके में उथल-पुथल का दौर रहा.

जयललिता की मौत को लेकर हुई थी पूछताछ



शशिकला से जयललिता की मौत के मामले में कथित संलिप्तता को लेकर भी पूछताछ हुई थी. दरअसल यह आरोप थे कि पॉवर में आने के लिए शशिकला ने ही जयललिता को मौत के मुंह में पहुंचाया है. एआईएडीएमके की कमान मिलने के बाद पार्टी में फूट पड़ गई. शशिकला को बाद में तत्कालीन मुख्यमंत्री पलानीस्वामी के नेतृत्व वाले खेमे ने पार्टी से निकाल दिया था. जयललिता की मृत्यु को लेकर सवाल उठाने वालों का कहना था कि जिस तरह जयललिता के स्वास्थ्य को लेकर रिपोर्ट्स समय-समय पर बदलती रहीं, इससे अम्मा की मृत्यु संदेह के घेरे में है. सवाल उठाने वालों में पार्टी के नेता, विपक्ष के नेता, यहां तक की फिल्म स्टार्स भी शामिल थे.

शशिकला बनने वालीं थीं मुख्यमंत्री, लेकिन मिली जेल



जयललिता के निधन के बाद पैदा हुई अस्थिरता की हालत में ओ पनीरसेल्वम राज्य के मुख्यमंत्री ज़रूर बन गए, लेकिन पनीरसेल्वम के नाम को लेकर पार्टी में पूरी तरह से सहमति नहीं थी. पार्टी के अंदर ऐसे कई लोग थे जो उन्हें पसंद नहीं कर रहे थे. जयललिता के घर-परिवार और उनके राजनीतिक विरासत को संभालने वाली शशिकला ने अपने भाषण में ख़ुद को 'पार्टी की उद्धारक' और अम्मा के सपनों को पूरा करने वाली बताया. इन्हीं परिस्थितियों में उन्हें शशिकला के नाम में वे संभावनाएं नजर आईं कि वो पनीरसेल्वम की जगह ले सकती हैं. इस दौरान शशिकला पर 1996 से चला आ रहा आय से अधिक संपत्ति का एक केस चल रहा था. यह मामला मुख्यमंत्री रहीं जयललिता पर भी जारी था, लेकिन दिसंबर 2016 में निधन के बाद उन्हें इससे बरी कर दिया गया. इधर शशिकला सीएम कुर्सी की तरफ बढ़ रही थीं कि 14 फरवरी 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें व दो अन्य को इस मामले में दोषी करार दिया. लिहाजा शशिकला को जेल मिली.

ऐसे बनीं जयललिता की करीबी

शशिकला पहले एक वीडियो पार्लर चलाती थीं. जयललिता और शशिकला की दोस्ती की शुरुआत 1984 में हुई थी. जयललिता तब मुख्यमंत्री रहे एमजी रामाचंद्रन की प्रोपेगैंडा स्क्रेटरी थीं. शशिकला के पति नटराजन उस वक्त राज्य के सूचना विभाग में काम कर रहे थे. उन्होंने अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर जयललिता की सभी जनसभाओं के वीडियो शूट का ठेका शशिकला को दिलवा दिया. जयललिता को शशिकला का काम पसंद आया और दोनों के बीच रिश्ते गहरे होने शुरू हो गए. 1987 में एमजी रामचंद्रन की मृत्यु के बाद जब जयललिता मुश्किल दौर से गुजर रही थीं तब शशिकला ने उन्हें सहारा दिया था. उस वक्त पार्टी में जानकी रामचंद्रन के समर्थकों की ओर से जयललिता का विरोध हो रहा था और उन्हें पार्टी से बाहर निकालने की मांग हो रही थी.इसके बाद ही शशिकला अपने पति नटराजन के साथ जया के घर उनकी 'मदद' करने के लिए रहने लगीं. दोनों के संबंधों में उतार-चढ़ाव के दौर भी आते रहे, लेकिन फिर भी दोस्ती कायम रही.

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