किसी आतंकी घटना की परख तो नहीं था सड़क पर फैला रसायन?

सड़क पर फैले केमिकल की वजह से मौत मामले में तीन दिन हो चुके हैं, लेकिन पुलिस अभी तक टैंकर नहीं खोज पाई है. पिछले दिनों दिल्ली में आतंकी घटनाओं के इनपुट जारी हुए थे. सवाल उठ रहे हैं कि सड़क पर बिखरा यह रसायन आखिर जा कहां रहा था. अगर कहीं जा रहा था तो इतनी मात्रा में  सड़क पर फैला कैसे? क्या यह किसी आतंकी घटना के लिए कोई परीक्षण तो नहीं था. 

किसी आतंकी घटना की परख तो नहीं था सड़क पर फैला रसायन?

नई दिल्लीः हो सकता था कि शायद वह तीनों बाइक के गिरने से बच जाते, लेकिन सड़क पर फैला एक अनजाना केमिकल उन्हें जिंदगी से दूर ले गया. कश्मीरी गेट इलाके में डफरिन पुल के पास हुआ हादसा यह हादसा अभी तक रहस्य बना हुआ है. पुलिस-प्रशासन अभी तक नहीं पता लगा सके हैं कि आखिर वह कौन सा चिकना रसायन था, जिससे बाइक फिसल गई. जिसने तीन शरीरों को झुलसा कर राख कर दिया. कौन लेकर आया था वह टैंकर और फिर कब, किधर चला कहां गया ? ये कुछ सवाल हैं, जिनके जवाब कोई अभी तक तलाश नहीं सका है. 

यह है पूरा मामला
कश्मीरी गेट इलाके में सड़क पर फैले संदिग्ध रसायन पर तीनों दोस्तों की मोटरसाइकिल अचानक फिसल गई थी. गाड़ी से गिरने के बाद तीनों दोस्त उठकर खड़े हुए और अपने कपड़े ठीक करने लगे और चोट देखने लगे. लेकिन इतनी ही देर में उन्हें अपना शरीर झुलसता सा लगा और उनके बदन नीले पड़ते चले गए. तीनों को काफी जोर की खुजली होने लगी और तेज गर्मी से वे परेशान होने लगे. जलन इतनी बढ़ी कि तीनों ने झट अपने कपड़े फाड़ डाले.

इसके बाद भी उन्हें राहत नहीं मिली और तीनों सड़क पर गिरकर तड़पने लगे. किसी राहगीर की सूचना पर पुलिस पहुंची. दो दोस्तों ने घटना के कुछ घंटों बाद ही अस्पताल में दम तोड़ दिया. वहीं तीसरे दोस्त की सोमवार सुबह इलाज के दौरान मौत हो गई. शनिवार तड़के सुबह पांच बजे घटी इस घटना को जिसने सुना सबके दिल दहल गए. 

मौके पर पहुंची पुलिस भी बाल-बाल बची
तीनों दोस्त अपने किसी जानकार की बहन की शादी में शामिल होने नांगलोई गए थे. वहां से वह शनिवार तड़के ही लौट रहे थे. डफरिन पुल के पास पहुंचे ही थे कि यह हादसा हो गया. घटनास्थल पर पहुंचने वाले एक पुलिसकर्मी ने बताया कि, हम लोगों के पैरों में पहने मजबूत जूते भी इस केमिकल में बुरी तरह से जल गए थे. कुछ के पांवों में मौजूद चप्पलें पिघलने लगी थीं. घटनास्थल पर केमिकल की बदबू सहन करने लायक बिल्कुल भी नहीं थी. ऐसा लगा, हम सभी दम घुटने से मर जाएंगे. बड़ी मुश्किल से हमने खुद का वचाव किया. 

रेलवे में काम करते थे तीनों 
हादसे में जान गंवाने वाले तीनों दोस्त शिवम (23), महेश (24) और मोनू हैं. तीनों ही रेलवे में काम करते थे. शिवम और महेश की मौत घटना के कुछ घंटों बाद ही हो गई, जबकि मोनू की मौत सोमवार को हुई. विशेषज्ञों ने मौके से आकर संदिग्ध रसायन के नमूने लिए और जांच के लिए भेजे हैं.

कश्मीरी गेट थाना पुलिस ने मौके से उस सीसीटीवी फुटेज को भी कब्जे में ले लिया है, जिसमें तीनों दोस्त मोटरसाइकिल से फिसलकर गिरते और खड़े होते हुए दिखाई दे रहे हैं. बताया जा रहा है कि घटना के लिए जिम्मेदार वह ट्रक/टैंकर जिसमें यह जानलेवा रसायन संदिग्ध हालात में ले जाया जा रहा था, मौके से फरार हो गया.

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क्या था वह केमिकल, बड़ा सवाल, किसका था?
आर्टिकल 370 में बदलाव और अयोध्या मामले में फैसले के बाद हालांकि हालात सामान्य हैं. लेकिन सुरक्षा का मसला अभी बना हुआ है. राजधानी दिल्ली इस मामले में और भी अधिक संवेदनशील है. बीते दिनों हिंदुवादी नेता कमलेश तिवारी की हत्या के बाद कुछ अन्य हिंदू नेताओं ने खुद पर खतरे की आशंका जताई थी, वहीं दूसरी ओर दिल्ली पुलिस ने भी इनकी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की थी. दीपावली के समय कुछ हमले होने के इनपुट भी मिले थे. ऐसे में कयास लग रहे हैं कि राजधानी की सड़कों पर पहुंचा यह केमिकल ऐसे ही किसी शातिर की कारगुजारी तो नहीं है?

हादसे के बाद टैंकर का इस तरह फरार हो जाना और अब तक पकड़ में न आना पुलिस की सुरक्षा के दावे में सेंधमारी करता है. किसी होने वाली आशंकित आतंकी घटना में तो यह रसायन इस्तेमाल नहीं होने वाला था. या फिर कश्मीरी गेट की घटना किसी आतंकी घटना का पूर्व परीक्षण तो नहीं, जिसकी भेंट यह तीनों युवा चढ़ गए हों. दिल्ली पुलिस को इसके जवाब जल्द तलाशने होंगे. 

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