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रोजवैली घोटाला मामले में जांच बढ़ी, सीबीआई ने उठाया पुलिस पर सवाल

2013 में पश्चिम बंगाल में रोजवैली चिटफंड घोटाला सामने आया था. इस योजना के जरिए लाखों निवेशकों से हजारों करोड़ रुपये जमा किए गए. समूह ने इस धन का निवेश यात्रा एवं पर्यटन, रियल एस्टेट, हाउसिंग, रिजॉर्ट और होटल, मनोरंजन और मीडिया क्षेत्र में व्यापक तौर पर किया था. रोज वैली के बारे में कहा जाता है कि इसने 15000 करोड़ रुपये जमा किए थे.

रोजवैली घोटाला मामले में जांच बढ़ी, सीबीआई ने उठाया पुलिस पर सवाल

कोलकाताः केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने करोड़ों रुपये के रोजवैली घोटाले की जांच के सिलसिले में उपायुक्त (बंदरगाह संभाग) वकार रजा से सोमवार को पूछताछ की. सीबीआई के सूत्रों ने बताया कि आईपीएस अधिकारी रजा आरोपी नहीं हैं लेकिन जब रोजवैली समूह ने कथित रूप से वित्तीय अनियमितताएं की थीं तब उनकी बतौर सीआईडी अधिकारी क्या भूमिका थी, उसका पता लगाने के लिए उन्हें यहां सीबीआई के सीजीओ परिसर कार्यालय में तलब किया गया था. प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार इस समूह ने निवेशकों को 15,000 करोड़ रूपये का चूना लगाया था जिसमें ब्याज और जुर्माने की राशि शामिल थी.

सूत्रों के अनुसार चिटफंड कंपनी रोजवैली के मामले की जांच के दौरान पता चला कि राज्य में चिटफंड घोटाले का खुलासा होने के बाद 2012 में सेबी और पुलिस के साथ एक बैठक हुई थी. इस बैठक में रोजवैली चिटफंड घोटाले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर जवाब मांगा गया था. जवाब में वकार रजा की ओर से जानकारी दी गई कि पुलिस के पास इस कंपनी के खिलाफ कोई शिकायत नहीं मिली. इसके बाद सेबी की तरफ से रोजवैली के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई गई. इसके बावजूद पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की? क्या पुलिस का मकसद इस कंपनी को मदद पहुंचाना था? पुलिस ने किसकी शह पर या किसके निर्देश में आकर कार्रवाई नहीं की. इन सवालों का जवाब वकार रजा से जानना चाहा. सीबीआइ सूत्रों का कहना है कि इन सवालों से जुड़े कुछ तथ्यों की जानकारी उन्हें मिली है, जल्द वे पूरे मामले में सख्त कार्रवाई करने की तैयारी कर रहे हैं.

यह है रोजवैली चिटफंड घोटाला
2013 में पश्चिम बंगाल में यह मामला सामने आया कि रोजवैली नाम की एक कंपनी ने लाखों निवेशकों से दशकों तक हजारों करोड़ रुपये वसूले. बदले में उन्हें बड़ी रकम की वापसी का वादा किया गया, लेकिन जब धन लौटाने की बारी आई तो भुगतान में खामियां होने लगीं। जिसका असर राजनीतिक गलियारे तक देखने को मिला. धन जमा करने वाली यह योजना कथित तौर पर बिना किसी नियामक से मंजूरी के 2000 से पश्चिम बंगाल और अन्य पड़ोसी राज्यों में चल रही थीं. लोगों के बीच यह योजना चिटफंड के नाम से मशहूर थी. इस योजना के जरिए लाखों निवेशकों से हजारों करोड़ रुपये जमा किए गए. समूह ने इस धन का निवेश यात्रा एवं पर्यटन, रियल एस्टेट, हाउसिंग, रिजॉर्ट और होटल, मनोरंजन और मीडिया क्षेत्र में व्यापक तौर पर किया था. रोज वैली के बारे में कहा जाता है कि इसने 15000 करोड़ रुपये जमा किए थे.

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