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  • कोरोना से ठीक होने वाले लोगों की संख्या- 1,04,107 जबकि अबतक 6,075 मरीजों की मौत: स्त्रोत-PIB
  • एचआरडी मंत्री ने कक्षा XI और XII के लिए वैकल्पिक शैक्षणिक कैलेंडर जारी किया
  • पीएमजीकेपी के तहत प्रगति: अप्रैल के लिए 73.86 करोड़ लाभार्थियों को 36.93 एलएमटी खाद्यान्न प्रदान किया गया
  • पीएमजीकेपी के तहत प्रगति: मई के लिए 65.85 करोड़ लाभार्थियों को 32.92 एलएमटी खाद्यान्न उपलब्ध कराया गया
  • पीएमजीकेपी के तहत प्रगति: जून के लिए 7.16 करोड़ लाभार्थियों को 3.58 एलएमटी खाद्यान्न प्रदान किया गया
  • पीएमजीकेपी के तहत प्रगति: 17.9 करोड़ परिवारों को 1.91 एलएमटी दालें दी गईं
  • देश भर के 688 प्रयोगशालाओं (480 सरकारी और 208 निजी प्रयोगशालाओं) में कुल परीक्षणों की संख्या 41+ लाख के पार
  • रेलवे ने 4197 श्रमिक स्पेशल ट्रेन का परिचालन किया; 58+ लाख यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाया
  • सीएसआईआर-सीएमईआरआई के शोधकर्ताओं ने नए स्वदेशी वेंटिलेटर का विकास किया है जिसकी लागत 80,000-90,000 रुपये हैं

हिंदुओं से मेल-जोल था 'करीमन' का गुनाह, मौत के बाद दफन होने से रोका गया

देश में मजहबी कट्टरपंथी इतने ज्यादा सक्रिय होते जा रहे हैं कि उन्होंने झारखंड में एक मुस्लिम बुजुर्ग को दफन किए जाने से रोक दिया. करीमन नाम के इस शख्स का गुनाह बस इतना था कि उन्होंने पूरी जिंदगी अपने हिंदू भाईयों से मेल जोल बनाकर रखा. बाद में हिंदू समुदाय के लोगों ने पूरे सम्मान से उनकी मैयत को धफन करवाया.   

हिंदुओं से मेल-जोल था 'करीमन' का गुनाह, मौत के बाद दफन होने से रोका गया

गढ़वा: मौत के बाद जनाज़े को अपनों के हाथों क़फ़न और दफ़न दोनो मय्यसर हो.  ऐसी चाहत हर किसी की होती है. इसे पूरा किया जाना फर्ज माना जाता है. लेकिन गढ़वा में एक जनाज़े के साथ उनके अपने मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बदतमीजी की और दफन होने से रोक दिया. जिसके बाद हिंदू समुदाय ने दखल दिया और उनका सम्मान से अंतिम संस्कार करवाया. 

दफन करने से रोक दिया बुजुर्ग मुसलमान का जनाजा
ये मामला  भवनाथपुर थाना क्षेत्र  के मकरी गांव का है. जहां बे-ईमान और पत्थर दिल मुसलमानों ने अपनी ही क़ौम के बुजुर्ग के जनाज़े को कब्रिस्तान में दफ़नाने से रोक दिया. इस गांव के निवासी करीमन मियां की मौत हो गई थी. उनके जनाज़े को दफ़नाने के लिए क़ब्रिस्तान में गड्ढा ख़ोद कर परिजनों द्वारा उन्हें सुपुर्द एक खाक किए जाने की तैयारी की जा रही थी. 

तभी गांव के मुसलमान समुदाय के कुछ लोगों ने उन्हें क़ब्रिस्तान में दफ़नाने से रोक दिया. 

हिंदुओं से मेल जोल था करीमन का गुनाह
उपद्रवियों का आरोप था कि करीमन मियां मुसलमान जरूर थे लेकिन वह जीवन पर्यंत हिन्दुओं से मिल जुल कर रहे. उनके रीति रिवाजों में हिस्सा लेते रहे. इसीलिए उनके जनाज़े को कब्रिस्तान में दफ़नाने से रोक दिया गया. यही नहीं करीमन मियां को दफन करने के लिए खोदे हुए गड्ढे को भी भर दिया. सीधे रूप में कहें तो ज़नाज़े से क़फ़न भी छीन लिया गया. 

हिंदुओं ने निभाया साथ 
करीमन मियां के परिजनों ने बताया कि अपने ही समुदाय के लोगों के विरोध के कारण बुजुर्ग करीमन मियां का शव बहुत देर तक घर में ही पड़ा रहा. बाद में जब इसकी जानकारी गांव के हिन्दू समाज के लोगों को हुई, तो लोग तत्क्षण करीमन मियां के घर पहुंचे और आगे बढ़ कर गड्ढा खोदने से ले कर सारी प्रक्रिया पूरी करते हुए उनके जनाज़े को घर के पास ही खाली पड़ी ज़मीन में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया. 

इस्लाम के जानकारों ने भी की आलोचना 
अपने परिवार के बुजुर्ग को दफन किए जाने से रोके जाने से करीमन के परिजन बेहद आहत हैं. उधर इस्लाम के जानकार यासीन अंसारी ने कहा कि किसी के जनाज़े को मिट्टी देने से रोकना शरीयत में हराम माना गया है,ऐसा करने वाला व्यक्ति मौत के बाद नहीं बल्कि जीते जी दोज़ख देखता है. उन्होंने ये भी कहा कि जिस भी हिन्दू भाइयों ने जनाज़े को सुपुर्द-ए-ख़ाक किया है,ऐसे पाक काम के लिए उन्हें खुदा जन्नत अता करेगा. 

लेकिन ये घटना बताती है कि गढ़वा के भवनाथपुर इलाके के मुसलमानों में हिंदुओं के प्रति कितनी घृणा भरी हुई है. जिसकी वजह से उन्होंने अपने ही समुदाय के बुजुर्ग का अंतिम संस्कार रोक दिया.